उसने बहुत शौख से साइकिल चलाना सीखा था। पर उसे कभी चलाने के लिए अपनी साइकिल नहीं मिली। और जब साइकिल मिली तो उसे 1200 किलोमीटर, लगातार आठ दिनों तक इसे चलाते रहना पड़ा। अगर वो ऐसा ना करती तो शायद उसके पिता की जान भी जा सकती थी। ये किसी फिल्म की कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। बिहार की ज्योति कुमारी ने 6 साल पहले अपने पिता के लिए एक ऐसा कदम उठाया,जिसकी चर्चा देश के बाहर अमेरिका तक हुई।
साल 2020 का नाम सुनते ही आपके दिमाग में भी कोरोना और लॉकडाउन जैसे शब्द ही आते होंगे। बिहार के दरभंगा जिले की रहने वाली ज्योति कुमारी की कहानी लॉकडाउन से थोड़ा पहले शुरू होती है।
ज्योति के पिता मोहन पासवान गुरुग्राम में रहकर ईरिक्शा चलाते थे और उनका पूरा परिवार बिहार में रहता था। वहीं जनवरी 2020 में मोहन का एक एक्सीडेंट हो जाता है और उनके बाएं पैर का घुटना बुरी तरह जख्मी हो जाता है। ऑपरेशन के बाद भी मोहन चलने फिर नहीं पाते। पिता की देखभाल करने के लिए ज्योति बिहार से गुरुग्राम आती हैं। सबकुछ धीरे-धीरे ठीक हो रहा होता है कि, उसी दौरान देश में कोरोना का काला साया छा जाता है। कोरोना वायरस के बढते ही पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया जाता है। लॉकडाउन लगने के बाद ज्योति और उसके पिता गुरुग्राम में ही फंस जाते हैं।
पैसे खत्म होने के बाद ज्योति और उसके पिता का गुरुग्राम में रहना हर दिन मुश्किल होता जाता है। दोनों को अपने गांव वापस लौटना ही एक माात्र रास्ता दिखाई देता है। पिता को परेशान देखकर ज्योति को अपने अकाउंट की याद आती है, जिसमें प्रधानमंत्री जन-धन योजना से आये हुए कुछ पैसे पड़े थे। ज्योति ने अपने पिता से इन पैसों से एक सेकंड हैंड साइकिल खरीदने को कहती है। साइकिल खरीदने के बाद उसने पिता को अपना आगे का प्लान बताया। कि वो उन्हें खुद साइकिल पर बिठाकर गांव ले जाएगी। शुरू में तो मोहन इस बात से बिलकुल सहमत नहीं हुए। लेकिन उनके पास भी और कोई चारा भी नहीं था।
मई 2020 की एक सुबह को ज्योति अपने बीमार पिता को साइकिल पर पीछे बिठाये गुरुग्राम से निकल पड़ती है। ज्योति, तेज गर्मी में भी हर दिन 50-60 किमी साइकिल चलाती है और रात में पेट्रोल पंप पर रूकती है। रास्ते में लोगों से जो खाना पीना मिलता वो खा लेते। ज्योति 10 मई को गुरुग्राम से चलीं और 17 मई को दरभंगा पहुंचीं। उन्होंने आठ दिन में 1200 किलोमीटर दूरी तय की और अपने बीमार पिता को साइकिल के पीछे बिठाकर हरियाणा के गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा तक अपने घर ले आई। ज्योति की कहानी देश ही नहीं बल्कि सात समंदर पार अमेरिका भी पहुंची। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवांका ट्रंप ने भी ज्योति के लिए ट्वीट किया।
इवांका ट्रंप ने अपने ट्विट में लिखा, 15 साल की ज्योति कुमारी साइकिल से अपने घायल पिता को लेकर 1,200 किलोमीटर से अधिक की दूरी सात दिनों में तय कर गांव पहुंच गई। धैर्य और प्रेम के इस खूबसूरत कार्य ने भारतीय लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
इस घटना के बाद ज्योति को साइकिल गर्ल के नाम से पुकारा जाने लगा। 26 जनवरी 2021 को ज्योति को इस साहस के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज्योति से बात की और उसे सराहा भी।
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