बेंगलुरु में काम करने वाले एक टेक कर्मचारी ने सोशल मीडिया पर बताया कि उसे दो साल से लग रहा था कि वह आर्थिक रुप से सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं लेकिन जब उसके पिता की तबीयत खराब हुई तो, उनके लिए आर्थिक सुरक्षा काम नहीं आई. दरअसल, बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल की हर महीने की सैलरी करीब 1.8 लाख रुपये थी और उसने हर महीने 8000 रुपये की SIP में निवेश भी किया था. उस ऐसा लग रहा था कि वह आर्थिक रुप से सुरक्षित है.
लेकिन एक दिन अचानक उनके पिता बेहोश हो गए. इसके बाद उनके लिए आर्थिक सुरक्षा का मतलब ही बदल गया. अस्पताल में पिता के इलाज के दौरान ICU में भर्ती करने के लिए 2.5 लाख रुपये की जमा राशि मांगी गई. तभी उन्हें एहसास हुआ कि अच्छी सैलरी होने का मतलब यह नहीं है कि जरूरत के समय पैसा तुरंत उपलब्ध भी हो. इस टेक प्रोफेशनल ने अपनी इस स्टोरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर शेयर किया है.
कागजों पर अच्छी थी सैलरी
पोस्ट की शुरुआत में उन्होंने लिखा कि उनकी आर्थिक स्थिति सुरक्षित थी. वह हर महीने करीब 80 हजार रुपये SIP में निवेश कर रहे थे और आरामदायक लाइफस्टाइट जी रहे थे. उनकी हर महीने की सैलरी 1.8 लाख रुपये थी, जो अच्छी टेक सैलरी के हिसाब से ठीक थी. लेकिन उनके पास परेशानी ये नहीं थी कि उनके पास पैसे कम है बल्कि ये था कि पैसे होने के बावजूद वह उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे.
उन्होंने आगे बताया कि उनके सेविंग अकाउंट में सिर्फ करीब 32,000 रुपये थे. लैपटॉप खरीदने के बाद उनका मुख्य क्रेडिट कार्ड भी लगभग पूरी तरह इस्तेमाल हो चुका था. वहीं, उनके निवेश को तुरंत कैश में बदलना आसान नहीं था. पिता की अचानक इमरजेंसी मेडिकल स्थिति आने पर यह समस्या और साफ हो गई. तब उन्हें समझ आया कि निवेश में पैसा होना और जरूरत के समय तुरंत कैश उपलब्ध होना, दोनों अलग-अलग चीजें हैं.
2.5 लाख की जरूरत और 32 हजार कैश उपलब्ध
अस्पताल की तत्काल मांग 2.5 लाख रुपये थी. लेकिन उनके पास केवल 32 हजार रुपये ही मौजूद थे. इस दौरान उनकी सैलरी और नियमित निवेश बहुत कम उपयोगी लगने लगे. उस टेक कर्मचारी ने आगे बताया कि म्यूचुअल फंड में लगा उनका पैसा तुरंत नहीं मिल पा रहा था. TPA की प्रक्रिया में देरी और पैसे निकालने में लगने वाले समय के कारण वह रकम उस समय उनके काम नहीं आ सकी.
वहीं, ICU के लिए तुरंत जमा राशि की जरूरत थी, इसलिए उन्हें दूसरी जगह से पैसे जुटाने पड़े. मैं रात 1:30 बजे अस्पताल के ठंडे गलियारे में बैठा था और नकद उधार लेने के लिए दूर के रिश्तेदारों को लगातार फोन कर रहा था. अच्छी कमाई और नियमित निवेश के बावजूद उनके सामने ऐसी स्थिति आ गई, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी. इस घटना ने उन्हें समझाया कि वित्तीय सुरक्षा के लिए निवेश के साथ इमरजेंसी फंड और तुरंत उपलब्ध नकदी भी जरूरी है.
जब निवेश और आर्थिक तैयारी एक जैसी नहीं होती
इस अनुभव से उन्हें एक जरूरी बात समझ आई कि कागज पर मौजूद पैसा और तुरंत इस्तेमाल की जाने वाले कैश में फर्क होता है. उन्होंने लिखा कि जब मेरे पास नकदी बिल्कुल नहीं थी, तो ज्यादा सैलरी कमाने का कोई मतलब नहीं था. उनकी कहानी उन युवा प्रोफेशनल्स के लिए भी एक सबक है, जो लंबे समय के निवेश पर ज्यादा ध्यान देते हैं लेकिन अचानक आने वाले खर्चों के लिए पर्याप्त पैसा नहीं रखते. SIP और दूसरे निवेश से पैसा बनाने में मदद मिलती है, लेकिन इमरजेंसी कभी भी आ सकती है और उस समय तुरंत कैश की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि निवेश बंद कर देना चाहिए बल्कि जरूरी है कि निवेश के साथ इमरजेंसी फंड और पर्याप्त नकदी भी रखी जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसा उपलब्ध हो सके.
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