गोरखपुर विकास प्राधिकरण के विस्तारित क्षेत्र में शामिल तीन नगर पंचायतों पिपराइच, पीपीगंज और मुण्डेरा बाजार समेत 233 नए राजस्व गांवों में अब भवनों के मानचित्र स्वीकृत हो सकेंगे। जीडीए बोर्ड की 131वीं बैठक में शासन द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अंगीकार करने के प्रस्ताव को सोमवार को स्वीकृति मिल गई। इससे महायोजना-2031 (पुनरीक्षित) में भू-उपयोग निर्धारण के अभाव में मानचित्र स्वीकृति की समस्या झेल रहे लाखों लोगों को राहत मिलेगी।
कमिश्नर एवं प्राधिकरण अध्यक्ष इन्द्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया गया। प्राधिकरण के 2020 में हुए सीमा विस्तार के बाद पिपराइच, पीपीगंज और मुंडेरा बाजार नगर पंचायत के साथ 233 राजस्व गांव प्राधिकरण क्षेत्र में शामिल किए गए थे। इन नए क्षेत्रों की अलग महायोजना तैयार नहीं होने के कारण मानचित्र स्वीकृत नहीं हो रहे थे। महायोजना-2031 (पुनरीक्षित) में शामिल इन क्षेत्रों में मास्टर प्लान के अभाव में शासन की एसओपी अपनाई जाएगी, जिसके नियमानुसार मानचित्र स्वीकृत होंगे। बैठक में उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल, नगर आयुक्त अजय जैन, प्रभारी सचिव प्रखर उत्तम, ओएसडी डॉ. संजीव दीक्षित मौजूद रहे।
बोर्ड ने रामगढ़झील के चल रहे और प्रस्तावित सुंदरीकरण कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान वर्तमान जेटी पर स्थापित फव्वारे का नियमित संचालन के निर्देश दिए गए। वहीं नई फ्लोटिंग जेटी को भी स्वीकृति मिली। नया सवेरा फेज-एक के प्रवेश द्वार के समीप एक और प्रवेश द्वार बनाए जाने जाने का निर्णय लिया गया।
बोर्ड बैठक में राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम लिमिटेड के माध्यम से प्राधिकरण की जर्जर और पुरानी संपत्तियों के पुनर्विकास के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव शून्य वित्तीय भार के आधार पर तैयार होगा। बैठक में महायोजना-2031 लागू होने के बाद विकासकर्ताओं, आम लोगों और आर्किटेक्ट की ओर से उठाए गए विभिन्न बिंदुओं पर भी विचार हुआ। बोर्ड ने संबंधित प्रस्तावों को शासन को भेजने के निर्देश दिए। विस्तारित क्षेत्र के लिए जीआइएस आधारित महायोजना तैयार कराने की प्रक्रिया भी पहले से चल रही है।
कमिश्नर ने निर्देशित किया कि स्वीकृत मानचित्र का लिखित विवरण रखा जाएगा, जिससे जब महायोजना बने तो उस जगह पर वही भू-उपयोग हो, जिसका मानचित्र स्वीकृत हुआ है। जल्द ही नए एसओपी के तहत प्राधिकरण सर्वे करेगा। जहां कई स्कूल होंगे, वहां स्कूल का मानचित्र स्वीकृत होगा। इसी तरह व्यावसायिक क्षेत्रों में व्यावसायिक मानचित्र पास होगा। आवासीय क्षेत्रों में प्लाटिंग के लिए लेआउट भी स्वीकृत किए जाएंगे। इन क्षेत्रों में आवासीय मानचित्र पास होगा। लेकिन जहां कृषि वहां किसी अन्य का मानचित्र पास नहीं किया जाएगा।
बोर्ड बैठक में खोराबार आवासीय योजना में निर्माणाधीन बहुमंजिली आवासीय परियोजनाओं को नई पहचान मिली। निर्माणाधीन बहुमंजिली ईडब्ल्यूएस और एलआइजी आवासों का नाम अब ‘रुद्राक्ष एनक्लेव’ होगा। वहीं, बहुमंजिली मिनी एमआइजी और एमआइजी आवासों को ‘मानसरोवर एनक्लेव’ नाम मिला है। इसके अलावा गोरखनाथ क्षेत्र में निर्माणाधीन बहुमंजिली आवासीय योजना कुश्मी एन्क्लेव का नाम बदलकर ‘नवनाथ एन्क्लेवन्कर दिया गया है।
जीडीए में सिविल और विद्युतीकरण कार्यों के लिए ठेकेदारों का पंजीकरण अब मार्च और सितंबर में साल में दो बार खोला जाएगा। इससे सभी श्रेणी के ठेकेदारों को समान अवसर मिलने और प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है। नलकूप (सिंचाई) विभाग के कर्मचारियों के आवास निर्माण को उप श्रम आयुक्त कार्यालय के पीछे 4000 वर्गमीटर भूमि का भू-उपयोग कार्यालय व सार्वजनिक अर्द्ध सार्वजनिक सुविधा से आवासीय करने के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए शासन को भेजने का निर्णय लिया गया।
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