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बिहार के बेगूसराय जिले से स्वास्थ्य विभाग में करीब तीन दशक पुरानी एक नियुक्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने का मामला सामने आया है। बरौनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीन बीहट स्वास्थ्य उपकेंद्र में कार्यरत एएनएम मंजू कुमारी की वर्ष 1993 में हुई नियुक्ति को लेकर शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने आरोप लगाया है कि मंजू कुमारी कथित तौर पर फर्जी नाम और नियुक्ति पत्र के आधार पर नौकरी कर रही हैं। हालांकि, ये आरोप अभी जांच के अधीन हैं और नियुक्ति में अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सेवा पुस्तिका में 12 अगस्त 1966 दर्ज है जन्मतिथि
शिकायत में बताया गया है कि मंजू कुमारी, पति अनिल कुमार राय, चेरिया क्षेत्र की निवासी हैं और बीहट स्वास्थ्य उपकेंद्र में एएनएम के पद पर कार्यरत हैं। उनकी सेवा पुस्तिका में जन्मतिथि 12 अगस्त 1966 दर्ज होने की बात कही गई है। .ads-row{display:flex;gap:10px;flex-wrap:wrap;}
RTI के जवाब के बाद बढ़ा विवाद
आरटीआई के जवाब में स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से पत्र संख्या 6/एम-16-27/2026-961(6) के माध्यम से जानकारी दी गई। जवाब में बताया गया कि संबंधित ज्ञापांक वाला पत्र अधीक्षक, एनएमसीए के नाम से जारी बताया गया है। इसके बाद शिकायतकर्ता ने नियुक्ति पत्र की वास्तविकता पर सवाल उठाते हुए मूल अभिलेखों के सत्यापन की मांग की। उनका कहना है कि मूल दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियुक्ति निर्धारित नियमों के तहत हुई थी या नहीं।
सिविल सर्जन ने रोका वेतन, तीन सदस्यीय टीम ने की जांच
मामले में बेगूसराय के सिविल सर्जन ने 27 जून 2026 के पत्रांक 834 के माध्यम से मंजू कुमारी का वेतन रोकने की कार्रवाई की थी। इसके साथ ही मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया। जांच टीम में एसएमओ डॉ. अंजू तुतरियार, एनसीडीओ डॉ. संजय कुमार और सीडीओ डॉ. राजू कुमार को शामिल किया गया था। गठित टीम ने मामले की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट विभाग को भेज दी है।
पहली जांच के बाद फिर खुली नियुक्ति की फाइल
मामले में नया मोड़ तब आया, जब शिकायतकर्ता के अनुसार पहली जांच के बाद भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद शिकायत को स्वास्थ्य निदेशालय के स्तर तक उठाया गया। स्वास्थ्य निदेशालय की निदेशक प्रमुख डॉ. रेखा झा ने मामले में दोबारा तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। नई टीम अब नियुक्ति प्रक्रिया और उससे संबंधित दस्तावेजों की फिर से जांच कर रही है।
अगस्त 2026 में सेवानिवृत्ति, जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
मामले की संवेदनशीलता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि संबंधित एएनएम के अगस्त 2026 में सेवानिवृत्त होने की बात सामने आई है। ऐसे में अब नई जांच रिपोर्ट पर सभी की नजर टिकी हुई है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं और इन्हें अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। विभागीय जांच और मूल दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही नियुक्ति की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
सबसे बड़ा सवाल, 1993 की नियुक्ति की सच्चाई क्या?
यदि दस्तावेजों की जांच में नियुक्ति प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता या फर्जीवाड़ा साबित होता है, तो करीब 33 साल पुरानी सरकारी नियुक्ति पर बड़ा सवाल खड़ा हो सकता है। वहीं, यदि शिकायत में लगाए गए आरोप गलत पाए जाते हैं, तो जांच पूरी होने के बाद संबंधित कर्मचारी को राहत मिल सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्ष 1993 में हुई इस नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज कितने सही हैं और करीब तीन दशक तक इस मामले पर किसी का ध्यान क्यों नहीं गया। इसका स्पष्ट जवाब नई जांच और मूल अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही सामने आने की उम्मीद है।
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