बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एके-47 हथियार तस्करी नेटवर्क के तार अब म्यांमार के मिलिशिया समूह से जुड़ रहे हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि तस्करों ने म्यांमार के केरेन नेशनल यूनियन जैसे मिलिशिया समूह से एके-47 और अन्य अत्याधुनिक हथियारों की खेप ली थी। इस कांड में गिरफ्तार अहमद अंसारी के दीमापुर में नेटवर्क की एनआईए जांच कर रही है। दीमापुर में अहमद अंसारी के पास से दो वॉकी-टॉकी की जब्ती के बाद से ही इसमें मिलिशिया ग्रुप के जुड़ाव की आशंका जताई जा रही थी। सूत्रों के अनुसार, जांच में सामने आया है कि हथियार तस्करी का नेटवर्क कोहिमा, मिजोरम और आइजोल तक फैला है। म्यांमार सीमा से लगे पूर्वोत्तर राज्यों के रास्ते हथियारों को पहले नगालैंड लाया जाता था, फिर वहां से बिहार समेत अन्य राज्यों में सप्लाई किया जाता था। एनआईए इससे पहले भी हथियार तस्करी को लेकर नगालैंड में मिलिशिया ग्रुप से जुड़ाव के तार खंगाल रही थी।
इस मामले में दीमापुर में सक्रिय अहमद अंसारी के हथियार सप्लायर नेटवर्क की जांच एनआईए कर रही है। बताया जा रहा है कि अहमद अंसारी का नेटवर्क ही म्यांमार के सप्लायरों से संपर्क में था और एके-47 की खेप मंगवाकर मुजफ्फरपुर के तस्करों को पहुंचाता था। मुजफ्फरपुर में पकड़े गए तस्करों से पूछताछ में भी कई लिंक मिले हैं, जो दीमापुर के हथियार डीलरों से जुड़ते हैं। एनआईए की टीम ने हाल में नगालैंड में कई ठिकानों पर छापेमारी की है। अधिकारियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी का यह नेटवर्क काफी संगठित है। जांच पूरी होने के बाद कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
बता दें कि सात मई 2024 को पुलिस टीम ने एके-47 जब्त की थी। इस मामले में पुलिस ने पहले मुजफ्फरपुर जंक्शन से विकास और सत्यम को एके-47 में लगने वाला बट और लेंस के साथ गिरफ्तार किया था। दोनों से पूछताछ के बाद पुलिस टीम ने फकुली थाना के मनकौली गांव में देवमनी को गिरफ्तार किया था। उसकी निशानदेही पर मनकौली गांव स्थित श्मसान स्थित पुल के नीचे छिपाकर रखी गई एके-47, मैग्जिन और 5 कारतूस जब्त किए गए थे।
इधर मुजफ्फरपुर शहर के स्टेशन रोड स्थित दुकान से बांग्लादेशी ठग नजबुल आलम का मोबाइल मिलने के बाद जिला पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां हरकत में आ गई हैं। बांग्लादेश में करोड़ों की ठगी कर भागे इस आरोपी के मुजफ्फरपुर में ठहरने और बिना सिम के केवल वाई-फाई और वाट्सएप के जरिए नेटवर्क चलाने के खुलासे ने सुरक्षा तंत्र को चौकन्ना कर दिया है। पुलिस सूत्रों की मानें तो मामला सामने आने के बाद पुलिस के वरीय अधिकारियों से लेकर अन्य जांच एजेंसियों ने सोमवार को नगर थानेदार से संपर्क कर इसकी जानकारी ली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब स्टेशन रोड और आसपास के होटलों, लॉज और धर्मशालाओं का रिकॉर्ड खंगाल रही है। बीते 2 सितंबर की शाम नजबुल जिस दुकान पर मोबाइल भूला था, उसके आसपास के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों के फुटेज निकाले जा रहे हैं।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शहर में उसे किसने शरण दी और उसकी मदद में कौन-कौन शामिल थे। जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के मोबाइल से मिले बांग्लादेशी पहचान पत्र (एनआईडी) और अन्य संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर केंद्रीय एजेंसियों ने भारत-बांग्लादेश और भारत-नेपाल सीमा पर अलर्ट जारी कर दिया है। पुलिस को अंदेशा है कि नजबुल मुजफ्फरपुर को सेफ हाउस की तरह इस्तेमाल कर नेपाल भागने की फिराक में हो सकता है।
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