भारत में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की विशेष योजना को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 21 अगस्त 2026 तक कुल 72.85 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई जा चुकी है। इसमें सबसे बड़ा योगदान FCNR(B) (Foreign Currency Non-Resident (Bank) Deposits) का रहा है। इस माध्यम से अकेले 65.397 अरब डॉलर जुटाए गए हैं। यानी कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह का करीब 90 फीसदी हिस्सा FCNR(B) जमा से आया है। यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि FCNR(B) के तहत विदेशी मुद्रा जुटाने की सुविधा 31 अगस्त 2026 को बंद होने वाली है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
RBI के आंकड़ों के अनुसार, FCNR(B) जमा के अलावा OFCBs (Overseas Foreign Currency Borrowings) से करीब 4.86 अरब डॉलर और ECBs (External Commercial Borrowings) के जरिए करीब 2.591 अरब डॉलर जुटाए गए हैं। इन तीनों स्रोतों को मिलाकर कुल विदेशी मुद्रा जुटाने का आंकड़ा 72.85 अरब डॉलर हो गया है। इससे साफ है कि RBI की इस विशेष योजना में FCNR(B) ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। विदेशों में रहने वाले भारतीयों और बैंकों की भागीदारी से डॉलर जमा बढ़ाने में मदद मिली है।
दरअसल, RBI ने इस विशेष USD-INR फॉरेक्स स्वैप फैसिलिटी की शुरुआत जून में की थी। इसका उद्देश्य देश में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाना और उस समय रुपये पर बने दबाव को कम करना था। इस योजना के तहत FCNR(B) जमा के लिए विंडो 31 अगस्त तक खुली है, जबकि ECB और OFCB से जुड़े विकल्प 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेंगे। योजना के जरिए RBI ने बैंकों को विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया, ताकि भारतीय वित्तीय प्रणाली में डॉलर की उपलब्धता मजबूत हो सके।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल में उम्मीद जताई थी कि केंद्रीय बैंक की इन पहलों के जरिए कम से कम 80 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित किया जा सकता है। 21 अगस्त तक 72.85 अरब डॉलर जुटने के बाद RBI का यह लक्ष्य अब काफी करीब नजर आ रहा है। गवर्नर ने FCNR(B) विंडो को एक महीने पहले बंद करने के फैसले को नीति में बदलाव के बजाय आंकड़ों के आधार पर किया गया ‘कैलिब्रेशन’ बताया था। उनका कहना था कि हर अतिरिक्त डॉलर को स्वैप करने से मिलने वाला फायदा धीरे-धीरे कम हो रहा था।
हालांकि, इतनी बड़ी विदेशी मुद्रा जुटाने के बावजूद रुपये में 2013 जैसी तेज मजबूती देखने को नहीं मिली है। रुपया व्यापक तौर पर उन स्तरों के आसपास बना हुआ है, जहां 5 जून को RBI ने विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के उपायों की घोषणा की थी। इसके बावजूद बैंकिंग सिस्टम के जरिए करीब $72.85 अरब की विदेशी मुद्रा जुटना भारत के लिए महत्वपूर्ण है। इससे देश के विदेशी मुद्रा संसाधनों और वित्तीय प्रणाली में डॉलर की उपलब्धता को सहारा मिल सकता है। अब सबकी नजर 31 अगस्त की FCNR(B) डेडलाइन पर है। इसके बाद इस विंडो के तहत नए जमा जुटाने की सुविधा बंद हो जाएगी, जबकि ECB और OFCB के जरिए विदेशी मुद्रा जुटाने की प्रक्रिया दिसंबर के अंत तक जारी रहेगी।
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!