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भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज गाउँपालिका-3 स्थित दारुल उलूम अलसफा मदरसा इन दिनों प्रशासनिक जांच के केंद्र में है। मदरसे के पंजीकरण और संचालन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर नेपाल प्रशासन ने प्रबंधन से जवाब मांगा है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, संस्थान का पंजीकरण संबंधित गाउँपालिका या वार्ड कार्यालय में दर्ज नहीं पाया गया है। प्रशासन ने मदरसा प्रबंधन को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए समय दिया है।
इन दस्तावेजों में संस्थान के पंजीकरण, संचालन की अनुमति, शिक्षकों और विद्यार्थियों का विवरण, पाठ्यक्रम, भवन तथा वित्तीय गतिविधियों से जुड़े कागजात शामिल हैं। जिला प्रशासन की अनुगमन टीम द्वारा संस्थान का स्थलीय निरीक्षण किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
भारतीय विद्यार्थियों की संख्या को लेकर दावा मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू मदरसे में बड़ी संख्या में भारतीय बच्चों के अध्ययनरत होने का दावा है। विभिन्न रिपोर्टों में करीब 2,500 भारतीय विद्यार्थियों के मौजूद होने और कुल विद्यार्थियों की संख्या लगभग 5,000 बताए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
यदि जांच में ये आंकड़े सही पाए जाते हैं, तो विद्यार्थियों के प्रवेश, पहचान, अभिभावकीय अनुमति, आवासीय व्यवस्था और सीमा पार से आने-जाने से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
खुली सीमा के कारण बढ़ी संवेदनशीलता भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही आसान है। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्र में संचालित किसी बड़े शैक्षणिक संस्थान के पंजीकरण और विद्यार्थियों के रिकॉर्ड की पारदर्शिता को लेकर प्रशासनिक निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
हालांकि, किसी संस्थान का पंजीकरण नहीं होना अपने आप में किसी आपराधिक या सुरक्षा गतिविधि का प्रमाण नहीं है। इसलिए मदरसे से जुड़े किसी भी सुरक्षा संबंधी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रशासनिक जांच और प्रमाणों का सामने आना जरूरी है।
59 पन्नों की रिपोर्ट का भी संदर्भ नेपाल में हालिया घटनाक्रम से जुड़ी बताई जा रही 59 पन्नों की एक जांच रिपोर्ट में सीमावर्ती क्षेत्रों के धार्मिक शिक्षण संस्थानों, खुले सीमा क्षेत्र और निगरानी व्यवस्था से जुड़े विषयों का उल्लेख होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में संस्थानों के पंजीकरण, पाठ्यक्रम, वित्तीय स्रोत और संचालन की नियमित निगरानी की आवश्यकता पर चर्चा किए जाने का दावा किया जा रहा है।
रिपोर्ट में कुछ व्यक्तियों को लेकर लगाए गए आरोपों और आशंकाओं का भी उल्लेख होने की बात कही गई है। हालांकि, इन आरोपों को अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा, जब तक संबंधित जांच एजेंसियों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आती।
जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति फिलहाल नेपाल प्रशासन का फोकस मदरसे के कानूनी पंजीकरण, संचालन की अनुमति, विद्यार्थियों के रिकॉर्ड और संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों के सत्यापन पर है। दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संस्थान किस कानूनी व्यवस्था के तहत संचालित हो रहा था और वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या तथा उनकी पृष्ठभूमि क्या है? यह मामला भारत-नेपाल सीमा पर शैक्षणिक संस्थानों की निगरानी, विद्यार्थियों के सत्यापन और सीमा पार आवागमन के रिकॉर्ड को लेकर महत्वपूर्ण प्रशासनिक सवाल जरूर खड़ा करता है।
भारत नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र के नेपाल में बना मदरसा
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