बिहार के गोपालगंज में एसपी विनय तिवारी के आदेश पर जादोपुर थानाध्यक्ष समेत चार लोगों को कानून का भय दिखाकर अवैध उगाही के आरोप जेल भेज दिया गया है। इनमें थानाध्यक्ष अनिल कुमार राम, एक चौकीदार, थाने का ड्राइवर और एक बिचौलिया शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपितों में जादोपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष सब इंस्पेक्टर अनिल राम, चौकीदार महंथ यादव, चालक राकेश कुमार और कथित बिचौलिया राजू यादव शामिल हैं। थानेदार इन लोगों के सहयोग से निर्दोष लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखने और रुपये लेकर छोड़ने का रैकेट चलाता था। सभी के खिलाफ जादोपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। निर्दोष लोगों को बचाने और अपने ही अधिकारी को जेल भजेने पर विनय तारीफ की जमकर तारीफ हो रही है। सोशल मीडिया पर उनका बयान वायरल हो रहा है।
एसपी विनय तिवारी ने बताया कि जादोपुर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गांजे की खेप को पकड़ा। लेकिन, वहीं पर गाय खरीदने बेतिया से पहुंची एक महिला और उनकी बेटी मौजूद थीं। पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया और 36 घंटे तक थाने पर अवैध रूप से डिटेन रखा और लाखों रुपए उगाही के बाद छोड़ दिया। थानेदार ने दस्तावेज में उनकी हिरासत, पूछताछ या अन्य कार्रवाई की बात छिपा ली। शिकायत मिलने पर डीएसपी मुख्यालय से जांच कराई गई तो पूरे मामले का पर्दफाश हो गया। बुधवार को सदर एसडीपीओ टू राजेश कुमार के नेतृत्व में आरोपितों को मुजफ्फरपुर स्थित विशेष निगरानी न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
एसपी विनय तिवारी ने बताया कि 16 अगस्त को सूचना मिली थी कि जादोपुर थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष अनिल राम पद और दायित्व का दुरुपयोग कर आम नागरिकों से अवैध राशि की मांग और वसूली कर रहे हैं। मामले की जांच मुख्यालय डीएसपी को सौंपी गई। जांच में सामने आया कि आरोपितों ने लोगों को केस में फंसाने और केस से नाम निकालने के नाम पर करीब 1.80 लाख रुपये की वसूली की थी।
जांच में यह भी आरोप सामने आया कि चार लोगों को करीब 36 घंटे तक हिरासत में रखा गया और बाद में कथित तौर पर अवैध वसूली कर उन्हें छोड़ दिया गया। एसपी के निर्देश पर आरोपित पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। एसपी ने बताया कि मामले में सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
एसपी विनय तिवारी ने बताया कि पुलिस मुख्यालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद चौकीदारों से थाना लेखक और उनके निर्धारित दायित्व व अधिकार क्षेत्र से बाहर के कार्य कराए जाने की बात जांच में सामने आई है। गवाहों को प्रभावित करने और जांच में बाधा डालने के प्रयास का भी आरोप है। डराने-धमकाने और प्रभावित करने के उद्देश्य से कथित तौर पर दलालों व चौकीदारों को भेजे जाने की बात सामने आई है।
जादोपुर थाने में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की शिकायत पर एसपी विनय तिवारी के सख्त एक्शन के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। एसपी ने बताया कि मामले की जांच मुख्यालय डीएसपी ने की। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की गई। जांच में केस में फंसाने की धमकी देकर अवैध वसूली, लोगों को बिना प्राथमिकी और सक्षम कानूनी अनुमति के करीब 36 घंटे तक थाना परिसर में रखने तथा केस से नाम हटाने के नाम पर पैसे लेने के आरोप सामने आए हैं।
जांच में जितन राम, विजय राम, शंकर राम समेत अन्य ग्रामीणों को मुकदमे में फंसाने की धमकी देने की बात सामने आई। जांच रिपोर्ट के अनुसार कथित दलाल राजू यादव के माध्यम से जितन राम व अन्य निर्दोष ग्रामीणों से 50 हजार रुपये की अवैध वसूली की गई। वहीं, महिला और उसकी नाबालिग बेटी को छोड़ने के नाम पर चौकीदार महंथ यादव के माध्यम से 75 हजार रुपये लेने का तथ्य भी जांच में सामने आया है।
जांच में केस से नाम हटाने के नाम पर भी अवैध वसूली की बात सामने आई। सत्येन्द्र सिंह के बेटे लवकुश का नाम मामले से हटाने और मुकदमे से बचाने के नाम पर 55 हजार रुपये लेने की बात प्रथमदृष्टया प्रमाणित हुई है। जांच रिपोर्ट में अलग-अलग मामलों में कुल 1.80 लाख रुपये की अवैध वसूली का उल्लेख है।
जादोपुर थाने में निर्दोष लोगों को केस में फंसाने की धमकी देकर रुपए वसूलने के मामले में जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि रुपए की डील जादोपुर थाने के सामने स्थित एक होटल में की गई थी। चालक राकेश कुमार और कथित दलाल राजू यादव के होटल में बैठकर रुपए के लेन-देन की योजना बनाने की बात सामने आई है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मामले में पुलिस ने होटल संचालक को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। करीब 12 घंटे पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया। मालूम हो कि पद और सरकारी दायित्व के दुरुपयोग, लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखने और रुपए लेकर छोड़ने के आरोप में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। एसपी विनय तिवारी को मिली शिकायत के बाद हुई जांच में आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए जाने पर प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष अनिल कुमार राम, चालक राकेश कुमार, चौकीदार महंत कुमार यादव और कथित दलाल राजू यादव को गिरफ्तार किया गया।जांच में यह भी बात सामने आई कि राजू यादव और चालक राकेश कुमार ने जादोपुर थाने के सामने स्थित होटल में बैठकर रुपए कब और कितने लेने हैं, इसकी योजना बनाई थी। इसके बाद महंत यादव ईके माध्यम से थानाध्यक्ष तक पूरी जानकारी पहुंचाई गई। आरोप है कि इसके बाद रुपए का लेन-देन हुआ और रकम थानाध्यक्ष तक पहुंचाई गई।
आठ जुलाई को गांजा बरामदगी के बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष अनिल कुमार राम, चौकीदार महंत कुमार यादव और चालक राकेश कुमार ने कुछ लोगों को थाने में रखा था। आरोप है कि उन्हें केस में फंसाने की धमकी देकर रुपए लिए गए और बाद में छोड़ दिया गया। पूरे मामले में कथित दलाल राजू यादव की भूमिका पुलिस तक रुपए पहुंचाने में बताई जा रही है। एसपी को मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित लोगों को अलग-अलग पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया। इसी क्रम में होटल संचालक से भी पूछताछ की गई और बाद में उसे छोड़ दिया गया।
जादोपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष अनिल कुमार राम, चौकीदार महंत कुमार यादव, चालक राकेश कुमार और कथित दलाल राजू यादव को पुलिस ने कोर्ट में पेश कर दिया है। मामले में अनुसंधान तेज कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद आरोपितों की संपत्ति की भी जांच कराई जा सकती है। एसपी विनय तिवारी ने बताया कि मामले में अनुसंधान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपितों की संपत्ति की जांच भी कराई जा सकती है।
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