केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए DA (Dearness Allowance) और DR (Dearness Relief) सैलरी और पेंशन का अहम हिस्सा है। महंगाई के असर को कम करने के लिए DA में समय-समय पर बदलाव किया जाता है। लेकिन, कई कर्मचारियों के मन में यह सवाल रहता है कि DA पर इनकम टैक्स लगता है या नहीं? इसका सीधा जवाब हां है, DA आपकी टैक्सेबल इनकम का हिस्सा है और इस पर आपकी लागू आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स देना पड़ता है, यानी सैलरी में मिलने वाला DA टैक्स से अलग या पूरी तरह टैक्स-फ्री नहीं होता। ITR भरते समय इसे आय के संबंधित हिस्से में सही तरीके से रिपोर्ट करना जरूरी है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए DA आमतौर पर बेसिक सैलरी के प्रतिशत के रूप में तय किया जाता है। वहीं, पेंशनर्स को इसी तरह DR (Dearness Relief) मिलता है। DA और DR में बदलाव आम तौर पर साल में दो बार किया जाता है। इसका प्रभाव सामान्य तौर पर जनवरी और जुलाई से माना जाता है। इन बदलावों का लाभ केंद्र सरकार के करीब 50 लाख कर्मचारियों और लगभग 65 लाख पेंशनर्स को मिलता है, जिनमें रेलवे और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारी और पेंशनर्स भी शामिल हैं। महंगाई बढ़ने के साथ DA बढ़ाने का उद्देश्य कर्मचारियों की वास्तविक आय पर पड़ने वाले महंगाई के असर को कम करना है।
टैक्स के लिहाज से समझें तो DA आपकी सैलरी का हिस्सा है और पूरी तरह टैक्सेबल है। अगर किसी कर्मचारी को बेसिक सैलरी के अलावा DA मिलता है, तो यह उसकी कुल वेतन आय में शामिल होता है। इसके बाद कर्मचारी की कुल टैक्सेबल इनकम और लागू टैक्स व्यवस्था के आधार पर उस पर आयकर की गणना होती है। इसलिए यह मानना गलत होगा कि DA बढ़ने का मतलब पूरी बढ़ी हुई रकम कर्मचारी के हाथ में टैक्स कटने के बाद भी समान रूप से आएगी। DA बढ़ने से ग्रॉस सैलरी बढ़ती है, लेकिन टैक्स देनदारी भी आपकी कुल आय के हिसाब से बदल सकती है।
मौजूदा घटनाक्रम की बात करें तो इस साल DA में 2% की बढ़ोतरी की गई थी, जिससे DA 58% से बढ़कर 60% हो गया और इसका प्रभाव 1 जनवरी 2026 से माना गया। इसके बाद अलग-अलग क्षेत्रों और संस्थानों में भी DA और DR से जुड़े संशोधन किए गए। अब कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर अगली DA बढ़ोतरी पर है। AICPI-IW के आंकड़ों के आधार पर जुलाई 2026 से संभावित बढ़ोतरी को लेकर 3-4% की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि, घोषणा में देरी के कारण अब साल के दूसरे हिस्से में अपडेट आने की संभावना पर नजर है।
DA के भविष्य को लेकर 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। आयोग फिलहाल कर्मचारी और पेंशनर संगठनों समेत विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श कर रहा है। आयोग वेतन, भत्तों, पेंशन और अन्य सुविधाओं में संभावित बदलावों पर अपनी सिफारिश देगा। आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था और उसे अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है, यानी मई 2027 तक रिपोर्ट आने की समयसीमा है।
इसलिए कर्मचारियों के लिए जरूरी है कि DA को सिर्फ अतिरिक्त रकम के तौर पर न देखें, बल्कि इसे टैक्सेबल सैलरी का हिस्सा समझें। ITR भरते समय सैलरी से जुड़े सभी घटकों को सही तरीके से रिपोर्ट करना चाहिए। DA बढ़ने से हाथ में आने वाली रकम बढ़ सकती है, लेकिन अंतिम लाभ आपकी बेसिक सैलरी, कुल आय, लागू टैक्स व्यवस्था और अन्य उपलब्ध कटौतियों पर निर्भर करेगा।
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