कमाई छोटी है तो सेविंग मुश्किल होगी। यह सोच अक्सर लोगों को सेविंग शुरू करने से ही रोक देती है। लेकिन पैसे बचाने के लिए हमेशा बड़ी सैलरी की जरूरत नहीं होती। अगर आप हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम भी नियमित रूप से अलग करें और छोटे खर्चों पर लगाम लगाएं, तो साल के अंत तक एक अच्छी रकम तैयार हो सकती है। इसे ही माइक्रो-सेविंग यानी छोटी-छोटी रकम से सेविंग की आदत कहा जा सकता है।
अगर आपकी सैलरी आते ही खर्चों में चली जाती है और महीने के बीच में बैंक अकाउंट खाली नजर आने लगता है, तो सबसे पहले सेविंग का तरीका बदलने की जरूरत है। इंतजार मत कीजिए कि महीने के अंत में पैसा बचेगा और तब उसे सेव करेंगे। इसके बजाय शुरुआत में ही छोटी रकम अलग कर दें।
अपनी मंथली इनकम को तीन हिस्सों में बांटने की कोशिश करें।
- 50% जरूरी खर्च: किराया, राशन, बिजली-पानी, बच्चों की फीस और दूसरे जरूरी बिल।
- 30% चाहतों पर खर्च: बाहर खाना, शॉपिंग, घूमना-फिरना और मनोरंजन।
- 20% सेविंग और निवेश: इमरजेंसी फंड, RD, FD या आपकी जरूरत के मुताबिक दूसरे निवेश विकल्प।
हालांकि, अगर आपकी आय कम है और 20% बचाना मुश्किल है तो परेशान न हों। शुरुआत 5% या 10% से करें। असली टारगेट रकम नहीं, नियमित सेविंग की आदत बनाना है।
अधिकतर लोग पहले पूरे महीने खर्च करते हैं और जो पैसा सेविंग है उसे सेव करते हैं। समस्या यह है कि महीने के अंत तक अक्सर कुछ सेविंग ही नहीं बची। इसका उल्टा तरीका अपनाएं। सैलरी आते ही सबसे पहले एक छोटी रकम सेविंग के लिए अलग कर दें। उदाहरण के लिए, अगर आप हर महीने 500 या 1,000 रुपये आराम से बचा सकते हैं, तो उसे ऑटो-डेबिट के जरिए RD, SIP या किसी दूसरे सेविंग ऑप्शन में डाल सकते हैं। यानी पहले सेविंग, फिर खर्च।
माइक्रो-सेविंग सिर्फ पैसे अलग रखने का नाम नहीं है। पैसे को बेवजह खर्च होने से रोकना भी उतना ही जरूरी है।
कोई गैर-जरूरी चीज ऑनलाइन पसंद आ जाए तो तुरंत ऑर्डर न करें। उसे कार्ट में डालकर कम से कम 24 घंटे इंतजार करें। अगले दिन खुद से पूछें क्या इसकी सही में जरूरत है? कई बार एक दिन का इंतजार आपको अनावश्यक खरीदारी से बचा सकता है।
हफ्ते में कम से कम एक दिन ऐसा रखें जब आप गैर-जरूरी खर्च बिल्कुल न करें। उस दिन बाहर से खाना मंगाने, ऑनलाइन स्नैक ऑर्डर करने या अचानक की गई छोटी-मोटी खरीदारी से बचें। घर का खाना खाएं और पहले से मौजूद चीजों का इस्तेमाल करें।
मान लीजिए आप सामान्य तौर पर ऐसे छोटे खर्चों पर हर बिना खर्च के दिनों पर 100 से 200 रुपये खर्च कर देते हैं। महीने में चार ऐसे दिन रखने पर 400 से 800 रुपये तक बच सकते हैं। रकम छोटी लग सकती है, लेकिन पूरे साल में यही आदत हजारों रुपये बचा सकती है।
20, 50 या 100 रुपये की रकम को अक्सर लोग बहुत छोटा समझकर खर्च कर देते हैं। लेकिन माइक्रो-सेविंग का पूरा विचार ही छोटी रकम को महत्व देने पर आधारित है। आप रोज 20 रुपये अलग रखते हैं तो महीने में करीब 600 रुपये और साल में 7,300 रुपये तक जमा हो सकते हैं। इसी तरह रोज 50 रुपये बचाने पर सालभर में करीब 18,250 रुपये हो सकते हैं।
यानी बड़ा फंड बनाने के लिए हर बार बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती। छोटी रकम + नियमितता + समय = अच्छी सेविंग।
कम कमाई में सेविंग करने का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी हर छोटी खुशी बंद कर दें। जरूरत यह है कि खर्च करने से पहले तय करें कि कौन-सा खर्च जरूरी है और कौन-सा सिर्फ आदत या अचानक आया लालच है। अगर अभी 20% बचाना संभव नहीं है तो 20% का इंतजार भी न करें। 500 रुपये से शुरुआत करें, फिर धीरे-धीरे रकम बढ़ाएं। आज बचाए गए 50 या 100 रुपये शायद बहुत छोटे लगें, लेकिन लगातार कई साल तक यही छोटी रकम आपकी इमरजेंसी फंड, बड़े टारगेट और आर्थिक सुरक्षा की मजबूत नींव बन सकते हैं।
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