सरकारी नौकरी आज भी देश के युवाओं के लिए करियर का बड़ा टारगेट है. खासकर Gen-Z के बीच रोजगार सबसे बड़ी चिंता बनकर सामने आया है. ऐसे में सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर युवाओं का भरोसा अहम सवाल है.
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे में इस सवाल पर युवाओं की राय सामने आई है. तस्वीर साफ है कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर बड़ी संख्या में युवा पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं.
40 फीसदी को बिल्कुल भरोसा नहीं
सर्वे के मुताबिक, 40 फीसदी युवाओं ने कहा कि उन्हें सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर बिल्कुल भरोसा नहीं है. वहीं 27 फीसदी लोगों का भरोसा बहुत ज्यादा नहीं है. यानी कुल 67 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिनका भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर भरोसा कम या बिल्कुल नहीं है.
यह आंकड़ा युवाओं के बीच बढ़ती चिंता को दिखाता है. सरकारी नौकरी पाने के लिए बड़ी संख्या में युवा सालों तक तैयारी करते हैं. परीक्षा के लिए मेहनत और पैसा दोनों खर्च होते हैं. ऐसे में परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल उठने से युवाओं का भरोसा प्रभावित हो सकता है.
सर्वे में 14 फीसदी लोगों ने भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर बहुत अधिक भरोसा जताया. वहीं 9 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें काफी हद तक भरोसा है. यानी कुल 23 फीसदी लोग ही ऐसे हैं, जिन्हें भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया पर पूरा या काफी भरोसा है.
इसके अलावा 10 फीसदी लोगों ने इस सवाल पर अपनी राय नहीं बताई या उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी. आंकड़ों से साफ है कि भरोसा रखने वालों की तुलना में संदेह जताने वालों की संख्या काफी ज्यादा है.
नौकरी Gen-Z की सबसे बड़ी चिंता
भर्ती परीक्षाओं को लेकर यह राय उस समय सामने आई है, जब युवाओं के लिए नौकरी सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है. MOTN सर्वे में 53 फीसदी Gen-Z ने रोजगार को अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया. 22 फीसदी युवाओं ने शिक्षा को सबसे अहम मुद्दा माना.
महंगाई यानी रहने-सहन का बढ़ता खर्च 12 फीसदी युवाओं के लिए सबसे बड़ी चिंता रहा. वहीं सिर्फ 4 फीसदी ने मानसिक स्वास्थ्य को सबसे बड़ा मुद्दा बताया. इससे पता चलता है कि युवा फिलहाल रोजगार और करियर से जुड़े सवालों को सबसे ज्यादा महत्व दे रहे हैं.
सर्वे में युवाओं से देश में उपलब्ध मौकों को लेकर भी सवाल किया गया. 32 फीसदी युवाओं ने माना कि कठिन मेहनत और प्रतिभा आज भी मायने रखती है. यानी एक वर्ग को लगता है कि मेहनत के दम पर आगे बढ़ने का रास्ता मौजूद है. हालांकि 26 फीसदी युवाओं का मानना है कि पैसा और संपर्क ज्यादा काम आते हैं. 22 फीसदी ने कहा कि देश में बहुत कम मौके उपलब्ध हैं. वहीं 14 फीसदी युवाओं ने माना कि मौके तो हैं, लेकिन वे चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित हैं.
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सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भर्ती परीक्षा सिर्फ एक परीक्षा नहीं होती. इसके पीछे लंबे समय की तैयारी और उम्मीद जुड़ी होती है. इसलिए परीक्षा की प्रक्रिया को लेकर भरोसा बेहद जरूरी है. MOTN के आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में युवा भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर आश्वस्त नहीं हैं. वहीं रोजगार को सबसे बड़ी चिंता बताने वाले युवाओं की संख्या भी काफी ज्यादा है. ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता युवाओं के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण बन जाती है.
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