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राजधानी दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 का गंभीर प्रकोप देखा जा रहा है। जिस गति से ये संक्रमण बढ़ता जा रहा है इसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी चिंतित हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार संक्रमण पहले से ही करीब 6 गुना से ज्यादा रिकॉर्ड किया जा चुका है। इसके अलावा लगातार बढ़ते मामलों के चलते अब अस्पतालों में भारी भीड़ भी देखी जा रही है। .metering_wall_container {min-height:58px;max-height:58px;position:relative;transition:max-height 0.5s ease-in-out;}
स्वाइन फ्लू से कोरोना जैसा घबराने की जरूरत नहीं स्वाइन फ्लू की स्थिति की समीक्षा के लिए शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बैठक की और जरूरी निर्देश दिए। संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा रस्तोगी पांडा कहती हैं, इन्फ्लूएंजा और फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों में बढ़ोतरी हो रही है। कई मरीजों में लंबे समय तक रहने वाली खांसी और तेज बुखार देखने को मिल रहा है। अमर उजाला से बातचीत में इंटेंसिव केयर के डॉक्टर उत्कर्ष सिन्हा कहते हैं, स्वाइन फ्लू कोरोना जैसा कोई नया वायरस नहीं है, ये पहले भी फैलता रहा है। ये इन्फ्लूएंजा वायरस का ही एक सबटाइप है और मानसून के दौरान मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामलों में भी बढ़ोतरी होती रही है।
स्वाइन फ्लू से मौत के मामले मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक गंभीर स्थितियों में एच1एन1 का संक्रमण कमजोर इम्युनिटी, बुजुर्गों या फिर पहले से बीमार लोगों में फेफड़ों और हृदय स्वास्थ्य के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है। इससे कुछ लोगों में मौत के मामले भी देखे गए हैं जोकि चिंता बढ़ा रहे हैं। एच1एन1 वैसे तो हल्के संक्रमण वाला माना जाता है पर इसकी गंभीर स्थिति में मौत का भी जोखिम रहता है।
संक्रमितों में फेफड़ों से संबंधित दिक्कतें डॉक्टर उत्कर्ष कहते हैं, एच1एन1 एक श्वसन संक्रमण है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने-छींकने या बात करने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के संपर्क में आने पर वायरस दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। शरीर में प्रवेश के बाद यह मुख्य रूप से नाक, गले और श्वसन तंत्र की कोशिकाओं को संक्रमित करता है। इसी वजह से शुरुआती लक्षण भी अधिकतर सांस की नली से जुड़े होते हैं। एच1एन1 का आपके फेफड़ों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है। सामान्य फ्लू में संक्रमण ऊपरी श्वसन तंत्र तक सीमित रह सकता है, लेकिन गंभीर मामलों में वायरस निचले श्वसन तंत्र तक पहुंच सकता है।
संक्रमण का हृदय पर भी हो सकता है असर स्वाइन फ्लू का असर केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता। गंभीर संक्रमण में कुछ लोगों में हृदय से जुड़ी जटिलताएं भी हो सकती हैं।
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