अगर देश में आज लोकसभा चुनाव हो जाएं, तो केंद्र में किसकी सरकार बनेगी? प्रधानमंत्री पद के लिए जनता की पहली पसंद कौन है और राज्यों में सियासी हवा किस तरफ बह रही है? इन तमाम सवालों का जवाब इंडिया टुडे और सी-वोटर के ताजा 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे में सामने आ गया है.
अगर आज लोकसभा चुनाव होते हैं तो केंद्र में एक बार फिर एनडीए की सरकार बन सकती है. सर्वे के मुताबिक, लोकसभा चुनाव होने पर एनडीए को 326 सीटें, INDIA ब्लॉक को 185 सीटें और अन्य के खाते में 32 सीटें जाने का अनुमान है.
वोट शेयर की बात करें तो एनडीए को 45 फीसदी, INDIA ब्लॉक को 39 फीसदी और अन्य को 16 फीसदी वोट मिलने का अनुमान जताया गया है. सर्वे के मुताबिक, अकेले बीजेपी को 261 सीटें मिल सकती हैं, जबकि कांग्रेस के खाते में 106 सीटें जाने का अनुमान है. अन्य दलों को कुल 176 सीटें मिलने का अनुमान है.
कैसे किया गया सर्वे?
देश के सभी राज्यों और लोकसभा क्षेत्रों में 1 जुलाई 2026 से 25 अगस्त 2026 के बीच अलग-अलग आयु वर्ग, जाति, धर्म और लिंग के 25,184 वयस्कों की राय ली गई. इसके अलावा पिछले 24 हफ्तों में 91,795 लोगों से ली गई राय का विश्लेषण भी सर्वे में शामिल किया गया.
इस तरह कुल 1,16,644 लोगों की राय का निचोड़ लेकर देश के अलग-अलग मुद्दों पर जनता का मूड समझने की कोशिश की गई है. सर्वे के आंकड़ों में मोटे तौर पर 3 फीसदी और बारीक स्तर पर 5 फीसदी तक का मार्जिन ऑफ एरर हो सकता है.
राज्यों में किसकी बढ़त?
राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में INDIA ब्लॉक को 40 फीसदी और एनडीए को 42 फीसदी वोट शेयर मिलने का अनुमान है. वहीं सीटों के मामले में INDIA ब्लॉक को 41 सीटें और एनडीए को 38 सीटें मिल सकती हैं.
महाराष्ट्र में एनडीए को 49 फीसदी और INDIA ब्लॉक को 43 फीसदी वोट शेयर मिलने का अनुमान है. यहां एनडीए को 31 सीटें, जबकि INDIA ब्लॉक को 17 सीटें मिल सकती हैं.
पश्चिम बंगाल में तस्वीर एनडीए के पक्ष में दिखाई दे रही है. यहां एनडीए को 46 फीसदी, जबकि INDIA ब्लॉक को सिर्फ 11 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है. सीटों में एनडीए को 35 और INDIA ब्लॉक को 7 सीटें मिलने का अनुमान है.
पंजाब में INDIA ब्लॉक को 25 फीसदी और एनडीए को 16 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है. सीटों के लिहाज से INDIA ब्लॉक को 11 सीटें, जबकि एनडीए को 1 सीट मिलने का अनुमान जताया गया है.
पीएम मोदी के कामकाज को लेकर क्या है जनता की राय?
सर्वे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज, एनडीए सरकार के प्रदर्शन और कई महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दों पर जनता की राय सामने आई है. सर्वे के नतीजे सत्ताधारी गठबंधन के प्रति मिजाज और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाते हैं.
अगस्त 2026 के सर्वे में जब लोगों से प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी के कामकाज के बारे में पूछा गया तो 51 प्रतिशत ने इसे अच्छा बताया. 17 प्रतिशत ने औसत करार दिया, जबकि 27 प्रतिशत लोगों ने इसे खराब माना. ये आंकड़े मोदी के व्यक्तिगत प्रदर्शन को लेकर अभी भी बहुमत का समर्थन दिखाते हैं.
एनडीए के समग्र प्रदर्शन पर संतुष्टि का रुझान भी सर्वे में दर्ज किया गया. जनवरी 2023 में 56 प्रतिशत लोग एनडीए से संतुष्ट थे, जो अगस्त 2023 में 58 प्रतिशत और अगस्त 2024 में बढ़कर 62 प्रतिशत हो गया. इसके बाद गिरावट दर्ज हुई और अगस्त 2025 तथा जनवरी 2026 में यह 52 प्रतिशत पर आ गया. अगस्त 2026 में संतुष्टि का आंकड़ा और घटकर 50 प्रतिशत रह गया, जबकि असंतुष्टों की संख्या 29 प्रतिशत पहुंच गई.
NDA सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है, इस सवाल पर 13 प्रतिशत लोगों ने राजनीतिक स्थिरता को चुना. राम मंदिर और बुनियादी ढांचे के विकास को 11-11 प्रतिशत लोगों ने सबसे बड़ी उपलब्धि बताया.
दल-बदल विरोधी कानून को और मजबूत किए जाने के मुद्दे पर भारी बहुमत सामने आया. 65 प्रतिशत लोगों ने कहा कि दल-बदल विरोधी कानून और मजबूत होना चाहिए, जबकि सिर्फ 14 प्रतिशत ने इसका विरोध किया.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड के राजनीतिक असर को लेकर भी राय ली गई. 47 प्रतिशत लोगों का मानना था कि इसका केंद्र और राज्य दोनों सरकारों पर नकारात्मक असर पड़ा है. 8 प्रतिशत ने सिर्फ केंद्र सरकार पर असर बताया, 7 प्रतिशत ने राज्य सरकार पर असर माना, जबकि 20 प्रतिशत का कहना था कि इसका कोई बड़ा राजनीतिक असर नहीं है और यह स्थानीय प्रशासनिक मुद्दा है.
अगले पीएम के लिए कौन पहली पसंद?
एमओटीएन सर्वे में अगले प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरों, परिसीमन और एक देश-एक चुनाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जनता की राय सामने आई है. जब लोगों से पूछा गया कि अगले प्रधानमंत्री के लिए सबसे अच्छा कौन है, तो 49 प्रतिशत ने नरेंद्र मोदी का नाम लिया. राहुल गांधी को 27 प्रतिशत समर्थन मिला, जबकि तमिलनाडु के नेता सी. जोसेफ विजय को 9 प्रतिशत लोगों ने अपना पसंदीदा चेहरा बताया. ये आंकड़े मोदी की व्यक्तिगत लोकप्रियता को अभी भी सबसे आगे रखते हैं.
परिसीमन का आधार क्या होना चाहिए, इस सवाल पर भी दिलचस्प नतीजे आए. 40 प्रतिशत लोगों का मानना था कि जनसंख्या नियंत्रण को भी आधार बनाया जाना चाहिए. 33 प्रतिशत ने कहा कि केवल जनसंख्या ही आधार बने, जबकि 9 प्रतिशत का मत था कि मौजूदा बंटवारा जारी रहना चाहिए. इससे साफ है कि ज्यादातर लोग परिसीमन में जनसंख्या नियंत्रण को भी शामिल करने के पक्ष में हैं.
एक देश, एक चुनाव के मुद्दे पर भारी समर्थन
एक देश, एक चुनाव के मुद्दे पर भारी समर्थन दिखा. 70 प्रतिशत लोगों ने एक देश-एक चुनाव का समर्थन किया, जबकि 24 प्रतिशत ने इसका विरोध जताया. ये आंकड़े बताते हैं कि देश की बड़ी आबादी एक साथ चुनाव कराने के विचार से सहमत है.
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