राजस्थान के कोटा के कोचिंग संस्थानों में हर साल हजारों छात्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में दाखिला लेकर इंजीनियर बनने का सपना लेकर पहुंचते हैं। बिहार के पटना जिले के पनेतालव गांव के रहने वाले युवराज कुमार शर्मा उर्फ सोनू कुमार ने भी कभी यही सपना देखा था। वह आईआईटी का प्रवेश परीक्षा क्लियर नहीं कर सका और अंततः उसने 2016 में पुणे के एमआईटी एकेडमी से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। लेकिन सालों बाद पुलिस की जांच में जो सच्चाई सामने आई है वह हैरान करने वाली है। सोनू कुमार ने उसी सपने को ढाल बनाकर देश भर के सैकड़ों छात्रों और उनके अभिभावकों से करोड़ों रुपये ठगने का एक बड़ा फर्जीवाड़ा खड़ा कर दिया।
इसका भंडाफोड़ मुंबई के पवई थाने में दर्ज हुई एक शिकायत के बाद हुआ। पवई की निवासी ग्रेसी पीटर स्वामी ने पुलिस से शिकायत की कि उनके बेटे को हैदराबाद स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) में दाखिला दिलाने के नाम पर 16.5 लाख रुपये की ठगी की गई है। ग्रेसी स्वामी को इंस्टाग्राम पर “techorbit1111” नाम का एक हैंडल मिला था, जहां मैनेजमेंट या एनआरआई कोटा के तहत दाखिले का वादा किया गया था। पैसे ट्रांसफर करने के बाद जब एडमिशन की सूची आई तो उनके बेटे का नाम नदारद था और आरोपियों के फोन बंद हो चुके थे।
शिकायत मिलते ही पुलिस उपायुक्त दत्ता नलवडे की देखरेख में जांच शुरू की गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंकों से संपर्क कर 16 लाख रुपये तुरंत फ्रीज करवा दिए। बाद में अदालत के आदेश के माध्यम से यह पूरी राशि महिला को वापस दिला दी गई।
मामले की जांच कर रही पुलिस टीम ने आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबरों का डिजिटल ट्रेल ट्रैक किया। इसके आधार पर पुलिस पुणे के पॉश इलाकों विमान नगर, लोहेगांव और खराड़ी स्थित सिटी विस्टा बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर संचालित हो रहे दो फर्जी कॉल सेंटरों तक पहुंची। 16 अगस्त को पुलिस ने इन ठिकानों पर छापेमारी की। मौके से 10 लोगों को पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, यह कोई साधारण कंसल्टेंसी नहीं थी, बल्कि एडमिशन सीजन के दौरान चलने वाला एक संगठित नेटवर्क था।
गिरोह के सदस्य फर्जी सिम कार्डों का उपयोग करके इंस्टाग्राम और फेसबुक पर पेड अकाउंट बनाते थे और कॉलेज एडमिशन से जुड़े पोस्ट व कमेंट्स पर नजर रखते थे। संपर्क होने पर अभिभावकों और छात्रों को नामी इंजीनियरिंग कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटा से सीट दिलाने का झांसा दिया जाता था। विश्वास जीतने के लिए आरोपी खुद को कॉलेज प्रशासन का प्रतिनिधि बताते थे और उनसे कॉलेजों के बाहर मुलाकात करते थे।
अधिकांश फीस कैश में ली जाती थी। ऑनलाइन भुगतान के लिए 2024 में खोले गए एक फर्जी बैंक खाते का इस्तेमाल किया जाता था। खाते में पैसे आते ही आरोपी पेट्रोल पंप कर्मचारियों को कमीशन का लालच देकर गूगल पे या डेबिट कार्ड के जरिए नकदी ले लेते थे। एडमिशन लिस्ट जारी होने से ठीक पहले यह कॉल सेंटर बंद कर दिया जाता था। इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और सिम कार्ड नष्ट कर दिए जाते थे, जिससे पीड़ित जब तक ठगी समझ पाते आरोपी गायब हो चुके होते।
सोनू कुमार के दादा एक शिक्षक थे और उन्होंने ही सोनू की गणित में रुचि देखकर उसे कोटा भेजा था। आईआईटी न मिलने के बाद उसने पुणे में पढ़ाई की। ग्रेजुएशन के बाद नौकरी न मिलने पर उसने कोचिंग सेंटर शुरू किया। धीरे-धीरे उसने विद्यार्थियों को कमीशन लेकर मैनेजमेंट कोटा से सीटें दिलवाना शुरू किया। 2019 में उसने एडमिशन कंसल्टेंसी शुरू की और दिल्ली, पुणे, यूपी और बेंगलुरु में कई बड़े अधिकारियों और कारोबारियों के बच्चों का एडमिशन कराया। लेकिन 2022 में उसने इसे एक बड़े स्कैम का रूप दे दिया। उसने बेरोजगार इंजीनियरों और कॉलेज छात्रों को 3 महीने के इंटर्नशिप सर्टिफिकेट और स्टाइपेंड का लालच देकर कॉल सेंटर में भर्ती करना शुरू कर दिया। हाल ही में NEET पेपर लीक विवाद के बाद बढ़ी जांच के डर से उसने अपना कोचिंग सेंटर बंद कर दिया था।
पुलिस ने गिरोह के पास से बीएमडब्ल्यू (BMW) और जगुआर (Jaguar) जैसी लग्जरी गाड़ियों समेत 1.35 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। इसके अलावा 22 मोबाइल, 23 सिम कार्ड, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और 24 लाख रुपये कैश बैंक खातों में फ्रीज किए गए हैं। पकड़े गए आरोपियों में लखनऊ से सिविल इंजीनियर देवेंद्र सिंह, गाजीपुर का सौरभ सिंह, जमशेदपुर का दीपेंद्र प्रजापति, नोएडा का एमबीए छात्र शुभम शर्मा और नोएडा के ही इंजीनियरिंग छात्र तुषार सैनी, सात्विक सिंह, प्रांजल सिंह और सौरभ कुमार शामिल हैं। फर्जी सिम मुहैया कराने वाले अंधेरी निवासी सिम विक्रेता अबू इशतियाक सैफ को भी गिरफ्तार किया गया है।
सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में तलोसा जेल में बंद हैं। पुलिस का मानना है कि इस रैकेट ने उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और दिल्ली में सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया है और मामले की आगे की जांच जारी है।
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