कोयला क्षेत्र में निवेश करने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। कोल इंडिया (Coal India) की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी MCL (Mahanadi Coalfields Limited) ने अपने प्रस्तावित IPO के लिए DRHP (Draft Red Herring Prospectus) बाजार नियामक SEBI (Securities and Exchange Board of India) के पास दाखिल कर दिया है। MCL देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनियों में से एक है और खासतौर पर नॉन-कोकिंग कोयले के उत्पादन में इसकी मजबूत पकड़ है। प्रस्तावित IPO पूरी तरह OFS (Offer for Sale) होगा। इसके तहत कंपनी की प्रमोटर कोल इंडिया लिमिटेड अपनी हिस्सेदारी के अधिकतम 66,18,36,300 इक्विटी शेयर बेचने की योजना बना रही है। इन शेयरों की फेस वैल्यू ₹2 है। चूंकि यह इश्यू पूरी तरह OFS है, इसलिए शेयरों की बिक्री से मिलने वाला पैसा महानदी कोलफील्ड्स (Mahanadi Coalfields) के खाते में नहीं जाएगा, बल्कि कोल इंडिया (Coal India) को मिलेगा।
MCL का IPO बुक-बिल्डिंग प्रक्रिया के जरिए लाया जाएगा। प्रस्तावित इश्यू में नेट ऑफर का अधिकतम 50% हिस्सा QIB (Qualified Institutional Buyers) के लिए उपलब्ध होगा। वहीं नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए अधिकतम 15% और खुदरा व्यक्तिगत निवेशक (Retail Individual Investors) के लिए अधिकतम 35% हिस्सा रखा जाएगा। IPO के बाद MCL के शेयर NSE और BSE पर लिस्ट होने प्रस्तावित हैं। इस इश्यू के लिए SBI कैपिटल मार्केट, एक्सिस कैपिटल (Axis Capital), BOB कैपिटल मार्केट, IDBI कैपिटल मार्केट & सिक्योरिटीज और IIFL कैपिटल सर्विसेस को बुक रनिंग लीड मैनेजर्स बनाया गया है, जबकि KFin टेक्नोलॉजीस रजिस्ट्रार की भूमिका निभाएगी।
MCL की स्थापना 3 अप्रैल 1992 को ओडिशा के Talcher और Ib Valley कोलफील्ड्स में कोयला उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से हुई थी। कंपनी आज कोल इंडिया (Coal India) की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक सब्सिडियरी बन चुकी है। वित्त वर्ष 2026 में MCL ने 218.31 मिलियन टन (MT) कोयले का उत्पादन किया। CRISIL की रिपोर्ट के मुताबिक, यह भारत के कुल नॉन-कोकिंग कोयला उत्पादन का करीब 22.40% और कोल इंडिया (Coal India) के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 28.3% है। FY2024 में कंपनी का उत्पादन 206.10 MT था, जो FY2026 में बढ़कर 218.31 MT हो गया।
कंपनी के पास बड़े कोयला संसाधन और मजबूत माइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर है। 1 अप्रैल 2026 तक Talcher और Ib वैली कोलफील्ड्स में अनुमानित कुल कोयला संसाधन करीब 106.76 अरब टन था। वहीं MCL के ऑडिटेड कोयला भंडार करीब 9,840.31 MT थे। मौजूदा उत्पादन दर के आधार पर इन भंडारों से करीब 45 साल तक खनन किया जा सकता है। अगर अतिरिक्त संसाधनों को भविष्य में रिजर्व में बदला जाता है और उत्पादन लगभग इसी स्तर पर जारी रहता है, तो कंपनी की ऑपरेशनल लाइफ काफी लंबी हो सकती है।
जून 2026 तक MCL के पास कुल 17 खदानें थीं, जिनमें 14 ओपनकास्ट और 3 अंडरग्राउंड माइंस शामिल हैं। कंपनी का 99% से ज्यादा उत्पादन ओपनकास्ट खदानों से आता है। इसके अलावा MCL के पास कोयला हैंडलिंग प्लांट, रैपिड लोडिंग सिस्टम, साइलो, रेलवे कनेक्टिविटी और रोड नेटवर्क जैसी मजबूत सप्लाई इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं हैं। कंपनी तीन रेलवे जोन से जुड़ी है और पारादीप, धामरा, गोपालपुर, विजाग और गंगावरम जैसे बंदरगाहों के जरिए भी कोयले की ढुलाई कर सकती है।
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो जून 2026 तिमाही में MCL का ऑपरेशंस से रेवेन्यू बढ़कर ₹8,033.7 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹7,548.3 करोड़ था। हालांकि, नेट प्रॉफिट मामूली घटकर ₹2,398.7 करोड़ रहा, जबकि जून 2025 तिमाही में यह ₹2,448.3 करोड़ था। कंपनी को दिसंबर 2019 में मिनीरत्न कैटेगिरी-I का दर्जा भी मिला था
कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Limited) के शेयर NSE पर बुधवार 2026 को 3.66% की उछाल के साथ 416.30 रुपये पर बंद हुए।
महानदी कोलफील्ड्स (Mahanadi Coalfields) का प्रस्तावित IPO निवेशकों को देश की बड़ी नॉन-कोकिंग कोयला उत्पादक कंपनी में सीधे निवेश का अवसर दे सकता है। हालांकि, IPO की कीमत, इश्यू की तारीख और अन्य अहम शर्तों की जानकारी आगे सामने आएगी। चूंकि पूरा इश्यू OFS है, इसलिए निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि IPO से मिलने वाली रकम कंपनी के विस्तार के लिए सीधे MCL को नहीं मिलेगी, बल्कि कोल इंडिया (Coal India) अपनी हिस्सेदारी बेचकर रकम जुटाएगी।
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