लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही है। 63 किमी लंबे इस एक्सप्रेसवे के 42 किमी लंबे ग्रीनफील्ड वाले हिस्से पर बार-बार सड़क धंसने और तारकोल उखड़ने से अब यह धंसने वाले एक्सप्रेसवे के नाम से मशहूर होता जा रहा है। अब कानपुर-लखनऊ लेन में स्थित भगवतपुर पुल के साइड बांध की मिट्टी का कुछ हिस्सा बारिश में बहने का मामला सामने आया है। इसके अलावा दो स्थानों पर सड़क भी धंसी है।
एक्सप्रेसवे के कानपुर-लखनऊ लेन में करौंदी से भगवतपुर जाने के दौरान पड़ने वाले पुल के रिटेरिंग वाल से सटी मिट्टी का एक हिस्सा बह गया है। पिछले दिनों हुई बारिश से यहां से मिट्टी धीरे-धीरे बही और एक हिस्से को प्रभावित कर गई। यदि समय रहते इसे बांधा नहीं गया और फिर बारिश हुई तो मिट्टी का काफी बड़ा हिस्सा बह सकता है। मौके को देखकर लग रहा कि रिटेरिंग वाल को सपोर्ट देने के लिए यहां मिट्टी का बांध बनाने के दौरान उसमें बोल्डर का प्रयोग नहीं किया गया है, जिससे पकड़ ढीली होने से वह बहीई। किमी 66.2 पर क्रैश बैरियर के नीचे की मिट्टी का कुछ हिस्सा भी बहा। बुधवार को वहां पर क्रैश बैरियर को खोल कर मिट्टी का भराव किया जा रहा था।
कानपुर-लखनऊ लेन में किमी 70.8 पर सड़क के तीसरे लेन में सड़क की पट्टी का एक बड़ा हिस्सा धंस गया है। क्रैश बैरियर से सटे इस हिस्से में हुए धंसाव से बारिश का पानी रिस कर सड़क की सतह में जाने का खतरा बना हुआ है। लखनऊ-कानपुर लेन में किमी 37 पर मंगलवार की देर शाम को तीसरी लेन में लगभग पांच मीटर सड़क हल्की सी धंस गई थी। जिसकी बुधवार तक मरम्मत कर दी गई। तारकोल सूखने तक यहां पर कोन लगा कर ट्रैफिक को बगल वाली लेन से निकाला जा रहा है।
लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन में किमी 68.6 से 68.7 के बीच क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत का कार्य चल रहा है। जिसके कारण यहां पर लगभग एक किमी रूट डायवर्ट कर दिया गया है। वाहनों की आवाजाही कानपुर-लखनऊ लेन पर हो रही है।
कानपुर-लखनऊ वाली लेन में किमी 70.4 पर आटा गांव के पास एक्सप्रेसवे की सड़क पर बारिश का जमा पानी निकालने के लिए सड़क की पट्टी से नाली बनाई गई थी। बिना किसी सोच-विचार के बनी इस नाली के कारण मिट्टी बहनेसे क्रैश बैरियर के धंसने का खतरा मंडराने लगा। यह देख कर नाली को तुरंत बंद कर मिट्टी को बहने से रोका गया।
एक्सप्रेसवे पर कानपुर-लखनऊ लेन में किसी 64 पर स्थित कोरारी रेलवे पुल के जोड़ के पास सीमेंट उखड़ गया था। पूरे पुल की चौड़ाई में उखड़े सीमेंट के कारण कहीं सवा से डेढ़ फिट तो कहीं आठ से 10 इंच की दरार नजर आने लगी थी। बुधवार को इसकी मरम्मत कर दी गई। ‘हिन्दुस्तान’ ने बुधवार के अंक में कोरारी रेलवे पुल पर सीमेंट की परत उखड़ी शीर्षक से खबर का प्रकाशन किया था। खबर को संज्ञान में लेते हुए एनएचएआई ने तुरंत पेट्रोलिंग टीम और निर्माणदायी संस्था को मौके पर भेजा। वहां सीमेंट की परत उखड़ी देख कर उसकी मरम्मत कराई। एनएचएआई के अधिकारियों ने बताया कि कुछ दूर तक सीमेंट उखड़ी थी। वहां पर नए सिरे से सीमेंट बिछा दी गई। बुधवार दोपहर को यहां पर मरम्मत कार्य में श्रमिक जुटे रहे।
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