IOC (Indian Oil Corporation) ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) के जरिए समुद्री व्यापार में आई बाधाओं के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने कम समय में अपने LPG उत्पादन में करीब 30% की बढ़ोतरी की और देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए अपनी रिफाइनरियों को 100% से ज्यादा क्षमता पर चलाया। IOC के चेयरमैन अरविंदर सिंह साहनी ने कंपनी की 67वीं एनुअल जनरल मीटिंग में बताया कि मौजूदा संकट के दौरान कंपनी ने कच्चे तेल की खरीद के स्रोतों में बदलाव किया। इसके साथ ही रिफाइनरी ऑपरेशन को जरूरत के मुताबिक ढाला और वैकल्पिक देशों से सप्लाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
दरअसल, भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 88% से ज्यादा हिस्सा आयात करता है। वहीं, भारत के करीब 45% क्रूड आयात और लगभग 90% LPG आयात का संबंध किसी न किसी रूप में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Hormuz) से जुड़ा है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर लंबे समय तक व्यवधान भारत की ऊर्जा सप्लाई के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
साहनी के मुताबिक संकट के दौरान IOC ने मिडिल ईस्ट से आने वाले रेगुलर क्रूड ग्रेड पर निर्भरता कम करते हुए दूसरे क्षेत्रों से कच्चा तेल खरीदना शुरू किया। कंपनी ने सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ लगातार समन्वय किया और 24 घंटे चलने वाले कंट्रोल रूम, रोजाना समीक्षा तथा रियल टाइम मार्केट मॉनिटरिंग की व्यवस्था की। इसका उद्देश्य किसी भी क्षेत्र में संभावित सप्लाई गैप की तुरंत पहचान कर उसे दूर करना था।
IOC के अनुसार मिडिल ईस्टर्न क्रूड (Middle Eastern crude) की खरीद में बड़ा बदलाव करने के बावजूद उसकी रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर चलीं। इसी दौरान LPG उत्पादन को करीब 30% तक बढ़ाया गया, जबकि गैस कारोबार के तहत जरूरी क्षेत्रों में सप्लाई जारी रखने के लिए अलग-अलग देशों से अतिरिक्त LNG की व्यवस्था की गई।
पश्चिम एशिया संकट के बीच IOC ने मार्च 2026 में समाप्त वित्त वर्ष में रिकॉर्ड ऑपरेशनल प्रदर्शन दर्ज किया। कंपनी ने करीब ₹8.86 लाख करोड़ के टर्नओवर पर ₹36,802 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट कमाया। पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, प्राकृतिक गैस और पेट्रोकेमिकल्स की कुल बिक्री 105 मिलियन टन से अधिक रही।
कंपनी की रिफाइनरियों ने रिकॉर्ड 75.45 मिलियन टन क्रूड प्रोसेस किया, जबकि लिक्विड पाइपलाइन थ्रूपुट 102.52 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। घरेलू पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री भी 88.97 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर रही। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी IOC ने 19.17 मिलियन टन क्रूड प्रॉसेस किया, जो 109.4% क्षमता उपयोग के बराबर है। इस दौरान पाइपलाइन थ्रूपुट भी 28.55 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर रहा और घरेलू पेट्रोलियम उत्पाद बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी बढ़कर 43.1% हो गई।
IOC आने वाले वर्षों में अपनी रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने के साथ कारोबार में विविधता लाने पर भी जोर दे रही है। पानीपत (Panipat), गुजरात (Gujarat) और बरौनी (Barauni) रिफाइनरियों के विस्तार के बाद कंपनी की ग्रुप रिफाइनिंग क्षमता 80.75 मिलियन टन से बढ़कर करीब 98 मिलियन टन सालाना हो सकती है। कंपनी पेट्रोकेमिकल्स, नेचुरल गैस, रिन्यूएबल एनर्जी, बायोफ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (Sustainable Aviation Fuel) जैसे क्षेत्रों में भी निवेश बढ़ा रही है।
IOC का लक्ष्य 2030 तक पेट्रोकेमिकल इंटेंसिटी को करीब 15% और प्राकृतिक गैस बिक्री को 1.5 गुना बढ़ाना है। पानीपत (Panipat) में बड़े ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट (Green Hydrogen Plant) का निर्माण भी शुरू हो चुका है। कंपनी की रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) यूनिट टेरा क्लीन 1 GW क्षमता विकसित कर रही है, जबकि 4.3 GW क्षमता की अन्य प्रोजेक्ट तैयारी में हैं। साहनी ने साफ कहा कि मौजूदा संकट ने एक बार फिर दिखाया है कि ऊर्जा सुरक्षा केवल बड़ी क्षमता से नहीं, बल्कि सप्लाई के अलग-अलग स्रोत, तेजी से फैसले लेने की क्षमता और पहले से की गई तैयारी से मजबूत होती है।
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