सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मेघालय हनीमून हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत रद्द कर दी। अदालत ने उसे तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। सोनम पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रचने का आरोप है।
अदालत की टिप्पणी
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और पी.बी. वराले की पीठ ने कहा कि इस स्तर पर आरोपी की रिहाई से चल रहे मुकदमे में बाधा आ सकती है। पीठ ने यह टिप्पणी मेघालय सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए की। सरकार ने मेघालय उच्च न्यायालय के 29 जून के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें सोनम को जमानत दी गई थी।
गिरफ्तारी के आधार पर विवाद
उच्च न्यायालय ने यह माना था कि पुलिस गिरफ्तारी के आधारों को प्रभावी ढंग से संप्रेषित करने में विफल रही, जिसके कारण जमानत दी गई। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि गिरफ्तारी के आधारों की सेवा न करने और अपर्याप्त विवरण देने में अंतर है। अदालत ने पाया कि आरोपी को गिरफ्तारी के आधारों से अवगत कराया गया था और तकनीकी त्रुटि (अरेस्ट मेमो में गलत धारा का उल्लेख) से उसके अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा।
आगे की कार्यवाही
पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि छह माह के भीतर मुकदमा पूरा नहीं होता है तो सोनम ट्रायल कोर्ट में ताजा जमानत याचिका दायर कर सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के आधारों की कमी को दूर किया जा सकता है और आरोपी को पुनः गिरफ्तार किया जा सकता है।
यह मामला इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़ा है, जो मई 2025 में अपनी पत्नी सोनम के साथ मेघालय में हनीमून मनाने गए थे। दोनों 23 मई को सोहरा क्षेत्र से लापता हो गए थे और राजा का शव 2 जून को एक गहरी खाई से बरामद हुआ था।
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