बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के सहयोगी दलों के आधा दर्जन सवर्ण नेताओं को बोर्ड, समिति और परिषद में नियुक्त किया है, जिसमें सबसे अहम चेहरा पूर्व एमएलसी देवेश कुमार और पूर्व सीएम नीतीश कुमार के सुरक्षा अफसर रहे हरेंद्र बहादुर सिंह हैं। उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के लिए विधान पार्षद पद छोड़ने वाले देवेश कुमार को सरकार ने बिहार राज्य योजना पर्षद (बिहार स्टेट प्लानिंग बोर्ड) का उपाध्यक्ष बनाया है। सीएम बोर्ड के अध्यक्ष होते हैं। बोर्ड उपाध्यक्ष के तौर पर देवेश को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलेगा और उसी अनुरूप सुविधाएं भी। सम्राट सरकार ने चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी - रामविलास के नए प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र विवेक को राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति (20 सूत्री) का सदस्य बनाया है। सुरेंद्र विवेक को उप-मंत्री का दर्जा मिला है।
सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली 20 सूत्री समिति में सुरेंद्र विवेक के अलावा उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के विधायक आलोक सिंह और जीतनराम मांझी की पार्टी से पूर्व मंत्री अनिल कुमार को भी सदस्य बनाया गया है। संयोग से तीनों सवर्ण समाज से हैं। देवेश कुमार की तरह सुरेंद्र विवेक और अनिल कुमार भूमिहार जाति से आते हैं, जबकि आलोक सिंह राजपूत समाज से हैं। सरकार सुरेंद्र विवेक, अनिल कुमार और आलोक सिंह को उप-मंत्री दर्जा स्तर की सुख-सुविधा देगी। समिति में पहले से अन्य सदस्यों के अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा उपाध्यक्ष हैं। दोनों को बतौर उपाध्यक्ष राज्यमंत्री का दर्जा मिला है।
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सरकार ने इसके अलावा बिहार राज्य नागरिक परिषद में सरकार ने रिक्त पदों को भरते हुए पूर्व सीएम नीतीश कुमार के सुरक्षा अधिकारी रहे हरेंद्र बहादुर सिंह को महासचिव और सीवान के डॉक्टर अजय कुमार सिंह को उपाध्यक्ष बनाया गया है। नीतीश कुमार के भरोसेमंद हरेंद्र सिंह की राजनीतिक पारी की चर्चा लंबे समय से होती रही है, लेकिन अब जाकर यह फलीभूत हुआ है। अजय सिंह सीवान की पूर्व सांसद कविता सिंह के पति हैं। यह दोनों भी राजपूत समाज से आते हैं।
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मजेदार बात यह है कि हरेंद्र सिंह नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से निकाले गए नागरिक परिषद के पूर्व महासचिव छोटू सिंह की जगह लेंगे। छोटू सिंह को कुछ समय पहले पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से उलझने के बाद दल से निष्कासित कर दिया गया था। उसके कुछ दिन बाद सरकार ने उन्हें नागरिक परिषद के महासचिव पद से भी हटा दिया था। मंत्री अशोक चौधरी के करीबी रहे छोटू सिंह को हटाने के बाद से यह पद खाली था, जिसे अब नीतीश के विश्वासपात्र हरेंद्र सिंह भरेंगे।
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