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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका स्थित हिंदू हितों की पैरवी करने वाले संगठन हिंदूपैक्ट ने अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी यूएससीआईआरएफ के कुछ सदस्यों के रुख की आलोचना की है। यूएससीआईआरएफ के अध्यक्ष आसिफ महमूद और आयुक्त जीन मिल्स ने भागवत के न्यूयॉर्क दौरे का विरोध किया है। उन्होंने अमेरिकी सरकार से आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी की है। इसके बाद हिंदूपैक्ट ने इसे लेकर कड़ा विरोध जताया।
हिंदूपैक्ट के संस्थापक और अध्यक्ष अजय शाह ने कहा कि यूएससीआईआरएफ ने अपने दायित्व की गरिमा को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के अध्यक्ष जब भारत और आरएसएस के बारे में बोलते हैं तो उनका रुख एक बहुलतावादी अमेरिकी आयोग के प्रमुख से ज्यादा हिंदू विरोधी विचार रखने वाले व्यक्ति जैसा लगता है। शाह ने कहा कि अमेरिकी हिंदू अपने धर्म, संस्थाओं और भारत की लोकतांत्रिक आवाज को बदनाम करने की कोशिश को स्वीकार नहीं करेंगे।
अजय शाह ने आरएसएस के सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन दशकों से राहत कार्य, शिक्षा, गांवों के विकास और सामाजिक संगठन के क्षेत्र में काम करता रहा है। उनके मुताबिक, इन कार्यों के रिकॉर्ड को विरोधी बयानों से मिटाया नहीं जा सकता। हिंदूपैक्ट ने कहा कि वह यूएससीआईआरएफ के उस प्रयास को स्वीकार नहीं करता, जिसके जरिए भागवत के दौरे की वैधता पर सवाल उठाया जा रहा है। संगठन ने अमेरिकी निर्वाचित प्रतिनिधियों और सामुदायिक नेताओं से भी ऐसे रुख को खारिज करने की अपील की है।
भागवत के अमेरिका दौरे का विरोध केवल यूएससीआईआरएफ के दो सदस्यों तक सीमित नहीं है। काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस, हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स और इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने भी उनके दौरे का विरोध किया है। हिंदूपैक्ट ने इन संगठनों के रुख पर भी आपत्ति जताई। अजय शाह ने आरोप लगाया कि ये संगठन हिंदू पहचान की मुखर अभिव्यक्ति को चरमपंथ के रूप में पेश करते हैं। उन्होंने कहा कि भागवत जैसे महत्वपूर्ण हिंदू संगठन के प्रमुख का अमेरिका दौरा इस तरह के आरोपों से नहीं रोका जाना चाहिए।
यूएससीआईआरएफ कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि आरएसएस नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों, हाई-लेवल मीटिंग या राजनयिक सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बजाय, अमेरिकी सरकार (USG) को उन आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए, जो फ्रीडम ऑफ रिलिजन ऑर बिलीफ यानी धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं। यूएससीआईआरएफ ने आसिफ महमूद और जीन मिल्स की इन टिप्पणियों को अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया है।
मामले ने अमेरिका में भारत, आरएसएस और हिंदू संगठनों को लेकर चल रही बहस को फिर सामने ला दिया है। एक तरफ यूएससीआईआरएफ के सदस्यों और कुछ संगठनों ने भागवत के दौरे का विरोध करते हुए आरएसएस के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर हिंदूपैक्ट ने इसे पक्षपातपूर्ण और हिंदू विरोधी रुख बताते हुए खारिज किया है। संगठन ने कहा कि अमेरिकी हिंदू अपने धर्म और संस्थाओं को लेकर किसी बाहरी अनुमति के मोहताज नहीं हैं। फिलहाल भागवत के दौरे को लेकर दोनों पक्षों के रुख ने अमेरिका में राजनीतिक और सामुदायिक बहस को तेज कर दिया है।
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