पांचवीं कक्षा से ऊपर जाने पर 28 फीसदी बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं। इसमें पांचवी से छठी में जाने वाले बच्चे शामिल हैं। हालांकि इन्हें फिर से स्कूल लाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाता है और इनमें से कुछ बच्चे विलंब से स्कूल लौटते भी हैं। पर नौ फीसदी बच्चे पूरी तरह स्कूल छोड़ देते हैं। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। इस वर्ष प्रारंभिक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि पांचवीं से छठी में जाने पर बच्चे तेजी से स्कूल छोड़ते हैं। इस दौरान पहली से पांचवीं तक हर साल तीन फीसदी बच्चे पढ़ाई छोड़ते हैं। बीते साल माध्यमिक कक्षाओं में जाने वाले बच्चों की संख्या 78 फीसदी थी। इस प्रकार 22 फीसदी बच्चे पढ़ाई छोड़ते थे। इस साल यह दर बढ़कर 28 फीसदी तक पहुंच गया है। हालांकि, विभाग के मुताबिक यह प्रारंभिक रिपोर्ट है और इसे अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है।
यू-डाइस की पिछले साल की रिपोर्ट के अनुसार माध्यमिक स्कूल के बच्चों में प्रारंभिक स्कूल से ऊपर जाने वाले बच्चों की संख्या 99.9 फीसदी थी लेकिन माध्यमिक कक्षाओं में इसकी संख्या 78 फीसदी और इससे ऊपर की कक्षाओं में बच्चों के ऊपर जाने की संख्या 74 फीसदी है। इससे स्पष्ट है कि प्रारंभिक कक्षाओं के बाद बच्चे बड़ी संख्या में स्कूल छोड़ रहे हैं। इनमें सर्वाधिक संख्या उच्च कक्षाओं की है।
माध्यमिक कक्षाओं में ऊपर जाने वाले बच्चों की संख्या कम होने को शिक्षा विभाग ने चुनौती के रूप में लिया है। कार्ययोजना बनायी गयी है। माध्यमिक कक्षाओं में सितंबर तक नामांकन की छूट दी गयी है। इसमें जो बच्चे अबतक किसी कारण से नामांकन नहीं करा पाए हैं, वे फिर से नामांकन करा सकते हैं।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि ऊपर की कक्षाओं में स्कूली बच्चों के नामांकन की घटती संख्या को सरकार ने गंभीरता से लिया है। ऊपर की कक्षाओं से छूटे और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को फिर से स्कूल तक लाने को विशेष अभियान चलाया जा रहा है। राज्य मुख्यालय से इसकी मानिटरिंग की जा रही है। बच्चों व उनके अभिभावकों की समस्याओं को देखा जा रहा है। उसके समाधान को हर संभव काम किये जा रहे हैं। ड्रापआउट और ट्रांजिशन दर को न्यूनतम स्तर पर लाने की योजना पर काम हो रहा है। मंत्री ने कहा कि कुछ दिनों में हालात पूरी तरह बदले मिलेंगे। बच्चे माध्यमिक व उच्च कक्षाओं में भी शत-प्रतिशत नामांकित होंगे, हम इसकी योजना बना रहे हैं। स्कूलों में बच्चों को तमाम सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी। हमारे सरकारी स्कूल निजी विद्यालयों से बेहतर होंगे।
इस समय स्थिति गंभीर होती जा रही है। पांचवीं और आठवीं कक्षा में बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण जागरूकता की कमी है। अभिभावक और शिक्षकों के स्तर पर इसका अभियान चलाया जाना चाहिए। गरीबी और अज्ञानता के कारण ग्रामीण क्षेत्र में अभिभावक बच्चों का नामांकन उच्च कक्षाओं में नहीं करा पाते हैं। ऐसा तब है जबकि स्कूलों में सुविधाएं बढ़ी हैं और बच्चों के पढ़ने का बढ़िया प्रबंध है। लेकिन माध्यमिक विद्यालय थोड़ दूर पर हैं।
रियाटर अधिकारी और शिक्षाविद् विनोदानंद झा ने कहा कि ऐसे में बच्चों को नामांकन के लिए प्रेरित करना होगा। आज एक बड़ी समस्या यह है कि विद्यालय बच्चों को आकर्षित ही नहीं कर पा रहे। इस परिदृश्य को बदलना आवश्यक है। यह देखना होगा कि विद्यालयों में जो इंतजाम किये जा रहे हैं, वह जिनके लिए किये जा रहे हैं, उसको उसका कितना लाभ मिल रहा है।
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