अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) ने 5 नवंबर 2026 को अपने छात्रसंघ चुनावों में एक नया अध्याय लिखा। 22‑साल की छात्रा नशरा नईम ने 7,091 वोटों से उपाध्यक्ष पद जीतकर विश्वविद्यालय के तीन शीर्ष निर्वाचित पदों—अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मानद सचिव—में पहली महिला बनकर इतिहास रचा।
गोरखपुर की रहने वाली नशरा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी साकिब अली खान को 1,273 वोटों से हराया। इस जीत के साथ AMU के 10‑सदस्यीय कैबिनेट में पाँच महिलाएं और AMU Court में दो महिला प्रतिनिधि चुनी गईं, जिससे कैंपस में महिला भागीदारी का स्तर पहले से कहीं अधिक ऊँचा हो गया।
नशरा AMU के फ़ैकल्टी ऑफ़ लॉ में BA‑LLB की छात्रा हैं। उनका पिता भी AMU के पूर्व छात्र हैं और आईटी सेक्टर में व्यवसाय करते हैं, जबकि उनकी माँ घर संभालती हैं। नशरा ने AMU के वीमेंस कॉलेज से हाईर सेकेंडरी की पढ़ाई की है, इसलिए विश्वविद्यालय से उनका रिश्ता बचपन से ही बना हुआ है।
छात्र राजनीति में उनका सफर केवल वोट जीतने तक सीमित नहीं रहा। वे फ्रैटरनिटी मूवमेंट की नेशनल एग्जीक्यूटिव कमेटी की सदस्य हैं और छात्रसंघ की बहाली के लिए चल रहे आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा चुकी हैं।
इंटरव्यू में नशरा ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने की सोच रखी थी, लेकिन पिता की सलाह पर उन्होंने उपाध्यक्ष पद से ही चुनाव लड़ने का फैसला किया। पूरे चुनाव में उनका परिवार उनका साथ देता रहा।
वोटिंग प्रक्रिया में कुल सात उम्मीदवारों ने उपाध्यक्ष पद के लिए प्रतिस्पर्धा की। नशरा ने 7,091 वोट और साकिब अली खान ने 5,818 वोट हासिल किए। अध्यक्ष पद पर मोहम्मद नोमान अशरफ़ ने 7,797 वोटों से जीत दर्ज की, जबकि मानद सचिव के रूप में मोहम्मद हमदान को 8,385 वोट मिले।
नशरा ने अपनी जीत का श्रेय अपनी छोटी लेकिन समर्पित टीम को दिया। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और कम समय के बावजूद टीम के साहस, ईमानदारी और समर्पण ने इस जीत को संभव बनाया।
कोरोना महामारी के बाद युवाओं में सामुदायिक भावना के कमजोर होने पर नशरा ने चिंता जताई। उनका मानना है कि छात्र राजनीति को केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि युवाओं को अपने अधिकारों और प्रशासनिक निर्णयों को समझने का मंच बनाना चाहिए।
AMU में छात्रसंघ चुनाव 2018‑19 के बाद आठ साल के अंतराल के बाद फिर से आयोजित किए गए। 2019 से विश्वविद्यालय ने छात्रसंघ की गतिविधियों को निलंबित कर रखा था, लेकिन लगातार छात्र आंदोलनों, भूख हड़ताल और प्रशासन के साथ संवाद के बाद चुनावों की बहाली हुई। नशरा इस आंदोलन की प्रमुख आवाज़ों में से एक थीं।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना 1920 में हुई थी, जबकि छात्रसंघ की जड़ें 1884 के Siddons Union Club तक जाती हैं। अब नशरा नईम की जीत इस लंबी परंपरा में एक नया मोड़ लेकर आई है, जिससे भविष्य में अधिक महिलाओं को छात्र राजनीति में नेतृत्व करने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
अब नशरा के सामने अपने चुनावी वादों को पूरा करना, छात्रों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुँचाना और महिला प्रतिनिधित्व को और मजबूत बनाना है। उनका यह कदम AMU की छात्र राजनीति में महिला नेतृत्व के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग खोल रहा है।
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