भारत में चीनी की बढ़ती कीमतों और किल्लत को कंट्रोल करने के लिए मोदी सरकार एक्शन मोड में है। जानकारी के मुताबिक भारतीय रिफाइनर विदेश भेजे जाने वाली 3,50,000 टन चीनी को घरेलू बाजार में भेजेंगे। सरकार की मंजूरी के बाद यह चीनी एक सप्ताह के भीतर घरेलू खरीदारों के लिए उपलब्ध हो सकती है। इससे देश में तत्काल आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ब्लूमबर्ग की एक खबर के मुताबिक 3,50,000 टन चीनी भारत में लगभग 5 दिनों की कुल मांग को पूरा करने के लिए काफी है और इससे पिछले हफ्ते रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची कीमतों को काबू करने में मदद मिलेगी। माना जा रहा है कि निर्यात के लिए तैयार स्टॉक को घरेलू बाजार में जारी करने से आयात पर तत्काल निर्भरता कुछ कम होगी और बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनावरे ने कहा कि सरकार के समय पर किए गए प्रभावी हस्तक्षेप से कीमतों में और नरमी आ सकती है और त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
त्योहारी मौसम की मांग बढ़ने के कारण बुधवार को लगातार दूसरे दिन खुदरा बाजार में चीनी की कीमतें एक रुपये प्रति किलो से ज्यादा बढ़ गईं। उपभोक्ता मामलों के विभाग (मूल्य निगरानी प्रभाग) द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त को चीनी की अखिल भारतीय औसत दर 65.05 रुपये प्रति किलोग्राम है जबकि मंगलवार को यह 63.97 रुपये प्रति किलोग्राम थी। चीनी की मौजूदा औसत कीमत एक महीने पहले के 48.68 रुपये प्रति किलो से 34 प्रतिशत अधिक है जबकि यह दर एक साल पहले के स्तर से 41 प्रतिशत अधिक है, जब चीनी 46.27 रुपये प्रति किलो पर उपलब्ध थी। आंकड़ों से पता चलता है कि बुधवार को अधिकतम बिक्री मूल्य 76 रुपये प्रति किलो था जबकि 'मॉडल दर' 65 रुपये प्रति किलो थी। सरकार और चीनी उद्योग निकायों ने कहा है कि पिछले कुछ दिनों में मिल पर कीमतों में गिरावट आई है। हालांकि, खुदरा स्तर पर इसका असर अभी दिखना बाकी है।
आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को चीनी की थोक कीमत भी मामूली रूप से बढ़कर 60.36 रुपये प्रति किलो हो गई। एक महीने पहले औसत थोक दर 45.34 रुपये प्रति किलो और एक साल पहले 43.02 रुपये प्रति किलो थी। इस सप्ताह की शुरुआत में, खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा था कि आयात की अनुमति देने और चीनी की सट्टेबाजी व जमाखोरी पर रोक लगाने के सरकार के फैसले के बाद से चीनी की मिल पर कीमत 18 प्रतिशत घटकर 55 रुपये प्रति किलो रह गई है।
पिछले सप्ताह चीनी की मिल पर कीमतें रिकॉर्ड 67 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थीं। चोपड़ा ने इस बढ़ोतरी का कारण मिलों द्वारा कीमतें बढ़ाना बताया था। कीमतों को काबू में रखने के लिए, केंद्र सरकार ने हाल ही में 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है।
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