अमेरिका के साथ जारी लड़ाई और प्रतिबंधों के चलते ईरान की अर्थव्यवस्था लगातार खराब होती जा रही है. ईरानी करेंसी रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है. यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वॉशिंगटन नई पाबंदियों की घोषणा करने की तैयारी कर रहा है. अमेरिका ने कहा है कि नई पाबंदियां 'इकोनॉमिक डी-डे' होंगी और पहले से लागू प्रतिबंधों और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी से बुरी तरह प्रभावित अर्थव्यवस्था पर और दबाव डालेंगी.
इनफॉर्मल मनी मार्केट में कारोबार शुरू होते ही रियाल गिरकर 1 अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20.2 लाख रियाल पर पहुंच गया. ईरान के केंद्रीय बैंक की आधिकारिक दर करीब 15 लाख रियाल प्रति डॉलर है, लेकिन ज्यादातर ईरानी लोग इनफॉर्मल बाजार की दर पर ही भुगतान करते हैं.
ईरान की मुद्रा पर पहले से ही दबाव बना हुआ था. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमला करने से पहले ही देश दोहरे अंकों वाली महंगाई और नकारात्मक आर्थिक वृद्धि का सामना कर रहा था. हालांकि, करीब छह महीने से जारी युद्ध ने अर्थव्यवस्था पर और बड़ा असर डाला है और रियाल लगातार नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच रहा है.
होर्मुज पर ईरान की पकड़
इसके बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से रियायतें हासिल नहीं कर पाए हैं. ईरान अब भी होर्मुज स्ट्रेट से होने वाले समुद्री परिवहन पर मजबूत पकड़ बनाए हुए है. यह एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जहां युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के कारोबार किए जाने वाले तेल का पांचवां हिस्सा स्वतंत्र रूप से गुजरता था. युद्ध के दौरान ईरानी हमलों और धमकियों ने इस मार्ग से होने वाले यातायात को गंभीर रूप से प्रभावित किया है.
ईरान और होर्मुज के दूसरी तरफ स्थित ओमान कथित तौर पर जलमार्ग के संयुक्त प्रबंधन की योजना पर अंतिम चरण में बातचीत कर रहे हैं. क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, इस योजना में जहाजों के लिए फारस की खाड़ी में ईरान के नियंत्रण वाले मार्ग से प्रवेश करने और ओमान के नियंत्रण वाले मार्ग से बाहर निकलने की व्यवस्था शामिल होगी.
ओमान को भी धमकी
ट्रंप ने अमेरिका के सहयोगी ओमान की कड़ी आलोचना की है और धमकी दी है कि अगर ओमान 'रास्ते में आता है' तो वह देश पर बमबारी करेंगे. ओमान के विदेश मंत्री मंगलवार को नई बातचीत के लिए ईरान का दौरा करने वाले थे. ईरान के साथ गतिरोध खत्म करने की कोशिश में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को पहले से लागू प्रतिबंधों से भी कड़े प्रतिबंधों की घोषणा का वादा किया था. इनमें उन देशों पर सेकेंडरी प्रतिबंध भी शामिल होंगे, जो ईरान के साथ कारोबार जारी रखते हैं.
बेसेंट ने रविवार को फाइनेंशियल टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में लिखा, 'राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की अर्थव्यवस्था को उस स्तर तक तबाह कर दिया है, जहां रियाल कभी इतना कमजोर नहीं रहा और महंगाई शायद ही कभी इतनी अधिक रही हो.' उन्होंने आगे कहा, 'अब शासन का अंतिम सहारा उन भयभीत देशों का आत्म-छल है, जो अब भी मानते हैं कि आक्रामकता को स्वीकार करने से स्थायी शांति सुनिश्चित की जा सकती है.'
युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा
पिछले सप्ताह संयुक्त अरब अमीरात ने घोषणा की थी कि वह ईरान के साथ सभी व्यापार को निलंबित कर रहा है. यह घोषणा ट्रंप द्वारा यूएई के नेता शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को फोन करने के एक दिन बाद की गई थी. यूएई लंबे समय से ईरान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल रहा है. यह ईरान के लिए आयात का सबसे बड़ा सोर्स होने के साथ-साथ ईरानी कारोबारों के लिए एक प्रमुख पुनः निर्यात और वित्तीय केंद्र भी है. बेसेंट की टिप्पणियों के बाद ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के कट्टरपंथी नेता मोहसेन रेजाई ने X पर एक पोस्ट में कहा कि नई अमेरिकी आर्थिक पाबंदियों का समर्थन करने वाले किसी भी देश की कार्रवाई को 'युद्ध की कार्रवाई' माना जाएगा.
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