एनएसई का आईपीओ 10 वर्षों से क्यों टला, इसके पीछे के कारण और अब इसे कैसे कार्यान्वित किया जाएगा, इस पर चर्चा।
एनएसई, भारत का सबसे बड़ा शेयर बाज़ार, पहली बार अपने ही प्लेटफ़ॉर्म पर आईपीओ लाने जा रहा है, जिससे यह स्वयं का शेयरधारक बन जाएगा। आईपीओ का आरम्भ 17 सितंबर से हुआ और 21 सितंबर तक जारी रहेगा, जबकि 24 सितंबर को लिस्टिंग होगी।
शेयर का मूल्य 1,700 से 1,785 रुपये के बीच तय किया गया है, जिससे एक लॉट (आठ शेयर) की लागत 14,280 रुपये होगी। कुल इश्यू साइज़ 22,562 करोड़ रुपये है।
एनएसई की स्थापना 1992 में हुई थी, जब भारत के शेयर बाज़ार में सुधार के लिए वित्त मंत्रालय ने एक समिति बनाई। उस समय बीएसई के साथ जुड़ी गड़बड़ियों के बाद, एनएसई ने इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग को अपनाया और देश का पहला इलेक्ट्रॉनिक शेयर बाज़ार बना।
1990 के दशक में हुई शेयर बाज़ार घोटालों ने बाज़ार की निगरानी और नियामक ढाँचे को सुदृढ़ किया। 1993 में सेबी ने एनएसई को मान्यता दी और 1994 में थोक डेब्ट मार्केट तथा कैश मार्केट की शुरुआत हुई।
एनएसई ने सैटेलाइट तकनीक का प्रयोग करके पूरे देश में ट्रेडिंग को जोड़ दिया, जिससे किसी भी स्थान से शेयर खरीदना संभव हो गया। आज यह प्लेटफ़ॉर्म शेयर, डेरिवेटिव्स, फिक्स्ड इनकम और डेब्ट प्रॉडक्ट्स पर ट्रेडिंग करता है।
बीएसई में 5,700 से अधिक कंपनियाँ लिस्टेड हैं, जबकि मार्च 2025 तक एनएसई में 2,700 से अधिक। बाज़ार सोमवार से शुक्रवार सुबह 9:15 से दोपहर 3:30 तक खुला रहता है, और पूर्व‑ट्रेडिंग 15 मिनट पहले शुरू होती है।
एनएसई ने बैंक निफ़्टी, निफ़्टी वीकली, निफ़्टी मंथली, फ़िन निफ़्टी, मिडकैप इंडेक्स, करेंसी, एक्सचेंज ट्रेडेड फ़ंड्स, म्यूचुअल फ़ंड्स और कॉर्पोरेट बॉन्ड जैसी नई सूचकांकों के साथ अपने ट्रेडिंग विकल्पों को विस्तारित किया है।
23 जुलाई 2024 को एनएसई ने लगभग 2,000 करोड़ ऑर्डर संभाले, जबकि 5 जून 2024 को 1,971 करोड़ ऑर्डर और 28.55 करोड़ ट्रेड्स के साथ विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। औसतन, एनएसई रोज़ 500 करोड़ रुपये से अधिक के लेन‑देन संभालता है, जबकि बीएसई का कारोबार इससे कहीं कम है।
दस वर्ष के प्रयासों के बाद एनएसई ने आईपीओ के लिए सेबी से अनुमोदन प्राप्त किया। 2016 से कंपनी को कानूनी और नियामक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, विशेषकर को‑लोकेशन और डार्क फ़ाइबर मामलों में।
को‑लोकेशन के दौरान एनएसई पर आरोप था कि उसने कुछ बड़े कारोबारियों को तेज़ ट्रेडिंग के लिए प्राथमिकता दी। इस पर व्हिसलब्लोअर ने शिकायत की, जिसके बाद एनएसई ने 1,491.2 करोड़ रुपये देकर मामला सुलझाया और सेबी से मंज़ूरी ली।
आईपीओ के लिए आवेदन करने हेतु निवेशकों के पास डिमैट अकाउंट होना अनिवार्य है। आवेदन नेट बैंकिंग या ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से किया जा सकता है, और शेयर आवंटन लॉटरी के आधार पर होता है। यदि शेयर नहीं मिलते, तो राशि वापस लौटाई जाती है।
यदि शेयर जारी करने में त्रुटि हो या धनवापसी में समस्या हो, तो पहले कंपनी के शिकायत विभाग से संपर्क करें; यदि समाधान नहीं मिलता, तो सेबी के निवेशक सहायता और शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज करें।
एनएसई अपने आईपीओ के बाद भी अपने प्लेटफ़ॉर्म पर ट्रेडिंग नहीं करेगा; शेयर बीएसई पर लिस्ट होंगे और वहीं ट्रेडिंग होगी। यह सुनिश्चित करता है कि एनएसई स्वयं को केवल मार्केट मेकिंग संस्था के रूप में रखे और नियमों का पालन करे।
समग्र रूप से, एनएसई का आईपीओ 10 वर्षों के बाद नई दिशा लेकर आया है, जिससे निवेशकों को अधिक विकल्प और पारदर्शिता मिलेगी।
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