सोशल साइट और डेटिंग एप के जरिए युवाओं को एचआईवी संक्रमण के जाल में फंसाने के आरोपों ने प्रयागराज में चिंता बढ़ा दी है। एसआरएन अस्पताल में काउंसलिंग के दौरान सामने आए मामलों में पीड़ितों ने बताया कि ऑनलाइन संपर्क के बाद आर्थिक मदद और भरोसे का लालच देकर उन्हें असुरक्षित यौन संबंध के लिए तैयार किया गया। चिकित्सकों के अनुसार, बीते छह माह में ऐसे 12 मामले सामने आए हैं।
सोशल साइट को हथियार बनाकर युवाओं को संगठित तरीके से एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस) संक्रमित बनाया जा रहा है। साइट्स पर पहले से सक्रिय प्रशिक्षित एचआईवी रोगियों के रडार पर ऐसे युवा हैं जो ऐसी सामग्री तलाशते हैं जो समाज में अच्छी नहीं मानी जाती। एक बार गिरफ्त में आए युवाओं को असुरक्षित यौन संबंध बनाने के लिए तैयार किया जाता है। फिर पॉजिटिव होने पर उनका भी इस्तेमाल नए शिकार को तलाशने के लिए किया जाता है।
जबरन बनाया संबंध, फिर फोन बंद
केस-1 अस्पताल पहुंचे प्रतापगढ़ निवासी 22 वर्षीय युवक ने बताया कि डेटिंग एप की जानकारी उसे सोशल साइट से हुई। एप डाउनलोड करने के बाद उसे कई विकल्प मिले। इनमें डेटिंग का भी विकल्प था, जिसे चुनने के बाद उसे दो प्रोफेशनल लोग मिले। वापस सामान्य जिंदगी में लौटने का मन किया तो उसके साथ जबरन संबंध बनाया गया। उसने जांच कराई तो एचआईवी पॉजिटिव निकला। उन नंबरों पर फोन मिलाया तो बंद मिले। केस-2 सोहबतियाबाग के 25 वर्षीय युवक ने बताया कि एप में लोग हर प्रकार की सहायता करते हैं। इनमें आर्थिक सहयोग भी शामिल है। उनकी बस एक शर्त होती है बिना सुरक्षा के संबंध बनाने की। वह गरीब का लड़का है, जिसे रुपये देकर राजी किया गया और खतरनाक बीमारी दे दी गई।
लक्षण दिखने पर होती है जानकारी
जब युवाओं में लक्षण सामने आते हैं, तब उन्हें एचआईवी की जानकारी होती है। ऐसे में कई युवाओं ने पॉजिटिव होने के बाद एप पर कार्रवाई करने का मन बनाया, लेकिन किसी से संपर्क नहीं हो सका। इसके अलावा शर्म के मारे युवा परिजनों से इसकी शिकायत नहीं कर पाते हैं।
साल दर साल बढ़े मामले
वर्ष 2023-24 में आठ मामले
वर्ष 2024-25 में 10 मामले
वर्ष 2025-26 में 12 मामले
अप्रैल 2026 से जुलाई तक 10 मामले
एचआईवी के लक्षण
बुखार और ठंड लगना, अत्यधिक थकान और कमजोरी, गले में खराश, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते, गर्दन या अन्य जगह सूजी हुई, लिम्फ नोड्स (गांठें), मुंह में छाले
एप को हथियार बनाकर एचआईवी पॉजिटिव करने के मामले सामने आए हैं। मरीजों की काउंसलिंग में इस बात की पुष्टि हुई है। अधिकतर संक्रमित समलैंगिक डेटिंग और फ्रेंडशिप एप्स से जुड़े हैं। - डॉ. अमृता चौरसिया, विभागाध्यक्ष, स्त्री रोग विभाग, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।
समलैंगिक समाज से जुड़े लोगों में शर्म व संकोच अधिक होता है। वह इस प्रकार की साइट के जाल में फंस जाते हैं। इन्हें झूठी हमदर्दी दिखाकर असुरक्षित यौन संबंध के लिए तैयार किया जाता है। -डॉ. राकेश पासवान, मनोचिकित्सक परामर्शदाता, कॉल्विन अस्पताल।
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