नेपाल में बाढ़ की तबाही अभी थमी नहीं है. मरने वालों की संख्या बढ़कर 734 हो गई है, जबकि करीब 3,000 लोग अब भी लापता हैं. इसी बीच सुनकोशी और भोटेकोशी नदियों का जलस्तर बढ़ने से चिंता फिर बढ़ गई है. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल नीचे के इलाकों में बड़ी बाढ़ का खतरा नहीं है.
भारी बारिश, घने कोहरे और रास्तों पर पसरे मलबे के बीच राहत-बचाव का काम आज पांचवें दिन भी जारी है. रसुवा, नुवाकोट, धादिंग तथा चितवन में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं. जगह-जगह सड़कें बह गई हैं, पुल टूट चुके हैं. ऐसे में जमीनी रास्ते से मदद पहुंचाना बेहद मुश्किल हो रहा है. कटे हुए इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलिकॉप्टर की मदद ली जा रही है.
सुनकोशी-भोटेकोशी का बढ़ा पानी
रविवार सुबह सुनकोशी नदी का पानी सिंधुली में चेतावनी स्तर से ऊपर पहुंच गया. वहीं, रसुवा में भोटेकोशी का बहाव रात करीब 3 बजे के बाद अचानक बढ़ा, हालांकि बाद में इसकी रफ्तार कम होने लगी. लोगों से नदी किनारे वाले इलाकों में सावधानी बरतने को कहा गया है.
रसुवा के प्रमुख जिला अधिकारी नरेंद्र परियार ने बताया कि बहाव अचानक बढ़ा था. इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क किया. बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा ने कहा कि फिलहाल नदी के निचले इलाकों में बड़ी बाढ़ का खतरा नहीं है.
3000 लोग अब भी लापता
नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक 30 अगस्त सुबह 9 बजे तक 734 शव बरामद किए जा चुके हैं. इनमें चितवन में 259, नवलपरासी ईस्ट में 184, नवलपरासी वेस्ट में 82, गोरखा में 58, नुवाकोट में 52, धादिंग में 50, तनहूं में 36 तथा रसुवा में 13 शव शामिल हैं. कई जगहों से इंसानी अवशेष भी मिले हैं.
सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है, जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, करीब 3,000 लोग लापता हैं. इनमें 275 से ज्यादा भारतीय भी शामिल हैं. इनमें बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए लोगों की है. अब तक 3,700 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है, जिनमें 108 भारतीय नागरिक शामिल हैं. रसुवा की एक हाइड्रोपावर परियोजना से चार भारतीयों को भी सुरक्षित निकाला गया.
अब तक 8,186 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है. हेलिकॉप्टर से 227 विदेशी नागरिकों को बचाया गया, जबकि हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों से 279 लोगों को हेलिकॉप्टर की मदद से बाहर निकाला गया है.
सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश
रसुवा में हालात बेहद गंभीर हैं, जहां हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में कई लोग फंसे हुए हैं. निर्माणाधीन अपर त्रिशूली-1 प्रोजेक्ट की टनल में ही 100 से ज्यादा लोगों के फंसे होने की आशंका है. इन तक पहुंचने के लिए नेपाल सेना, पुलिस तथा सशस्त्र बल के 82 जवानों की संयुक्त टीम कीचड़ और मलबा साफ कर रही है. टनल के भीतर रास्ता बनाना बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. इस मुश्किल घड़ी में मदद के लिए भारत से 11 डॉक्टर, पैरामेडिक्स और टनल विशेषज्ञों की टीम भी नेपाल पहुंची है. भारतीय टीम ने प्रभावित सुरंगों का मुआयना किया, ताकि अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने का सुरक्षित रास्ता खोजा जा सके.
19 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी मैदान में
राहत और बचाव अभियान में नेपाल के 19,895 सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं. इनमें नेपाल पुलिस के 7,293, नेपाल सेना के 8,399 और सशस्त्र पुलिस बल के 4,203 जवान शामिल हैं. टीमें प्रभावित इलाकों में मलबा हटाने, लोगों को निकालने तथा राहत पहुंचाने का काम कर रही हैं.
सड़क और पुल टूटने के कारण कई जगह वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं. ऐसे इलाकों में हेलिकॉप्टर से लोगों को निकालने के साथ राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है. अब तक सात हेलिकॉप्टर उड़ानों के जरिए राहत सामग्री भेजी जा चुकी है.
राहत के लिए 37 ट्रक खाद्य तथा दूसरी जरूरी चीजें लेकर प्रभावित इलाकों की ओर भेजे गए हैं. सरकार ने रसुवा तथा नुवाकोट को एक-एक करोड़ रुपये, धादिंग को 50 लाख रुपये दिए हैं. 15 स्थानीय निकायों के लिए 6.75 करोड़ रुपये की राहत राशि भी जारी की गई है.
भारत ने भेजी राहत की चौथी खेप
भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री की चौथी खेप भेजी है. शनिवार रात 11 टन सामान लेकर भारतीय वायुसेना का C-130 विमान नेपाल रवाना हुआ. इसमें सुरंग से बचाव के उपकरणों के साथ तकनीकी टीम भी भेजी गई. इसके अलावा, DNA जांच के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञ और जरूरी उपकरण भी खेप में शामिल हैं. कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट जैसी जरूरी चीजें भी भेजी गई हैं.
भारत अब तक 68.5 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचा चुका है. इसमें जरूरी दवाएं, पोर्टेबल जनरेटर, खाने के पैकेट, पानी साफ करने वाली गोलियां और तकनीकी सामान शामिल हैं. इसके साथ ही 230 फुट लंबे स्टील ब्रिज का सामान लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि सात और बेली ब्रिज का सामान भी जल्द भेजा जाएगा.
अस्पतालों के सामने भी मुश्किल
बाढ़ का असर सिर्फ टूटी सड़कों और बहे पुलों तक सीमित नहीं है, बल्कि अस्पतालों में भी हालात बिगड़ चुके हैं. जरूरी दवाओं और ईंधन की भारी किल्लत के साथ साफ-सफाई न होने से मरीजों की जान पर बन आई है. रास्ते बंद होने के कारण राहत सामग्री समय पर नहीं पहुंच पा रही है. वहीं सैलाब ने पीने के पानी की पाइपलाइन भी पूरी तरह तहस-नहस कर दी है. लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिल रहा, जिससे अब प्रभावित इलाकों में गंभीर बीमारियां फैलने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है.
इस बीच सैटेलाइट इंटरनेट सेवा देने वाली स्टारलिंक ने नेपाल सरकार से मंजूरी मिलने पर मुफ्त सेवा देने की पेशकश की है. इससे टूटी मोबाइल नेटवर्क व्यवस्था के बीच बचाव दलों को आपस में संपर्क करने और परिवारों को लापता लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है.
नेपाल में राहत-बचाव का काम लगातार चुनौती के बीच आगे बढ़ रहा है. कई इलाकों में सड़कें, पुल और पानी की व्यवस्था टूटने से लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाना मुश्किल है. ऐसे में भारत की राहत सामग्री, रेस्क्यू टीमों और पुल बनाने के लिए भेजी जा रही मदद से प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने की कोशिश तेज हुई है.
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