सितंबर महीने की शुरुआत हो चुकी है। यह महीना टैक्सपेयर्स, कारोबारियों और कंपनियों के लिए काफी अहम है क्योंकि इनकम टैक्स से जुड़े कई अहम डेडलाइन आने वाले हैं। इनमें TDS-TCS जमा करने, TDS सर्टिफिकेट जारी करने, एडवांस टैक्स की दूसरी किस्त भरने और टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने जैसे काम शामिल हैं। आइए कुछ जरूरी डेडलाइन जान लेते हैं।
7 सितंबर: ये TDS और TCS पेमेंट की डेडलाइन है। अगस्त 2026 के दौरान काटे या इकट्ठा किए गए टैक्स को 7 सितंबर तक सरकार के पास जमा करना जरूरी है।
वे व्यक्ति या संस्थाएं जो सोर्स पर टैक्स काटने (TDS) या सोर्स पर टैक्स इकट्ठा करने (TCS) के लिए जिम्मेदार हैं। ये उन्हीं के लिए है। अगर किसी सरकारी दफ्तर द्वारा टैक्स काटा या इकट्ठा किया जाता है, तो इनकम टैक्स चालान दिखाए बिना पेमेंट करने पर उसे उसी दिन केंद्र सरकार के खाते में जमा करना होगा।
14 सितंबर: इस तारीख तक जुलाई 2026 में कुछ खास भुगतानों पर काटे गए TDS से संबंधित फॉर्म 132 जारी करना होगा। इसमें किराए, अचल संपत्ति के ट्रांसफर, कमीशन, ब्रोकरेज और वर्चुअल डिजिटल एसेट यानी VDA के ट्रांसफर से जुड़े भुगतान शामिल हैं। जिन टैक्सपेयर्स पर टैक्सईयर 2026-27 के लिए एडवांस टैक्स देना लागू है, उनके लिए 15 सितंबर अहम तारीख है। एडवांस टैक्स के जरिए बड़ी टैक्स देनदारी को साल के दौरान किस्तों में चुकाया जाता है ताकि रिटर्न दाखिल करते समय एक साथ बड़ा भुगतान न करना पड़े।
यह ऑडिट और रिपोर्टिंग की मुख्य डेडलाइन है। इस दिन कई तरह की टैक्स ऑडिट रिपोर्ट और दूसरी रिपोर्ट दाखिल करनी हैं। इसमें इनकम टैक्स एक्ट की धारा 44AB के तहत टैक्स ऑडिट रिपोर्ट भी शामिल है। ऐसे कारोबारी और अन्य टैक्सपेयर्स जिनकी ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है और जो टैक्स ऑडिट के दायरे में आते हैं, उन्हें निर्धारित समय पर ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
बता दें कि देश में इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 31 अगस्त तक 7.8 करोड़ से अधिक इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किए जा चुके हैं। पिछले आकलन वर्ष 2025-26 के लिए गैर-ऑडिट मामलों में रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर 2025 तक कुल 7.3 करोड़ से अधिक आईटीआर दाखिल किए गए थे। आयकर विभाग के अनुसार, 31 अगस्त, 2026, आकलन वर्ष 2026-27 के लिए उन करदाताओं के आयकर रिटर्न दाखिल करने की निर्धारित अंतिम तारीख थी, जिनकी कारोबार या पेशे से आय है और जिनके खातों का ऑडिट नहीं होता है। यदि कोई करदाता गैर-ऑडिट श्रेणी में आता है, तो वह लागू आयकर रिटर्न (आईटीआर-3, आईटीआर-4, आईटीआर-5 या आईटीआर-7) दाखिल कर सकता है।
आईटीआर-3 का उपयोग ऐसे व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों द्वारा किया जाता है, जिनकी आय किसी स्वामित्व वाले कारोबार या पेशे से होती है। आईटीआर-4 अपेक्षाकृत सरल रिटर्न फॉर्म है। यह छोटे एवं मध्यम करदाताओं के लिए उपयोग किया जाता है। आईटीआर-5 कंपनियों, सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी) और सहकारी समितियों जैसी संस्थाओं के लिए है। वहीं, आईटीआर-6 का उपयोग कंपनी कानून के तहत पंजीकृत कंपनियां करती हैं, जबकि आईटीआर-7 न्यास, परमार्थ एवं धार्मिक संस्थान दाखिल करते हैं।
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