टाटा ट्रस्ट्स को 1989 में हुए एक शेयर ट्रांसफर से जुड़े मामले में बड़ी राहत मिली है।
गुरुवार को जारी एक बयान में टाटा ट्रस्ट्स ने बताया कि महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से 2 सितंबर 2026 का एक आदेश मिला। इस आदेश में 1989 में हुए शेयर ट्रांसफर से जुड़ी एक शिकायत को बंद कर दिया गया है।
इससे टाटा ट्रस्ट्स का दावा सही साबित हुआ कि शेयर ट्रांसफर से जुड़े आरोप बेबुनियाद, बिना किसी सबूत के और गलत इरादे से लगाए गए थे। बयान में कहा गया कि इन आरोपों का एकमात्र मकसद टाटा ट्रस्ट्स की साख को नुकसान पहुँचाना था।
यह राहत ऐसे समय में मिली है जब टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन पद से नटराजन चंद्रशेखरन के अचानक हटने के फैसले के कारण नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता का माहौल है।
सर रतन टाटा ट्रस्ट, रेगुलेटरी पाबंदियों का सामना कर रहा है। इन पाबंदियों की वजह से वह चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी को चुनने के लिए बनी संयुक्त सर्च पैनल में किसी सदस्य को नॉमिनेट नहीं कर पा रहा है।
टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड में 66% हिस्सेदारी है, जो ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों को कंट्रोल करती है। होल्डिंग कंपनी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आदेश के बावजूद पब्लिक लिस्टिंग का विरोध करती रही है।
10 जून 2026 को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर को लिखे एक पत्र में टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट से दिवंगत उद्योगपति नवल टाटा को टाटा संस के शेयर ट्रांसफर किए जाने की स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
उन्होंने इस मामले को ट्रस्ट्स द्वारा संभालने में हितों के टकराव की आशंका जताई थी क्योंकि चेयरमैन नोएल टाटा, नवल टाटा के उत्तराधिकारी के तौर पर शेयर ट्रांसफर से सीधे तौर पर लाभ पाने वाले व्यक्ति हैं।
2 सितंबर को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने सिंह की शिकायत को खारिज कर दिया।
यह विवाद उन शेयर से जुड़ा है, जो 1974 में स्थापित नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट के पास थे। इस साल की शुरुआत में सामने आए एक कानूनी नोटिस में दी गई जानकारी के अनुसार, सर रतन टाटा ट्रस्ट ने दिसंबर 1974 में 625 टाटा संस इक्विटी शेयर और 34 वरीयता शेयर कोष में दान के रूप में एनआरटीटी को हस्तांतरित किए थे।
1979 में बोनस शेयर जारी होने के बाद एनआरटीटी की इक्विटी हिस्सेदारी बढ़कर 833 शेयर हो गई।
कानूनी नोटिस में आरोप लगाया गया था कि उस समय एनआरटीटी के न्यासी रहे नवल टाटा ने जनवरी 1989 में ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था और इसके कुछ समय बाद 833 शेयर व्यक्तिगत रूप से उन्हें हस्तांतरित कर दिए गए।
इसमें हस्तांतरण के लिए दिए गए प्रतिफल तथा उससे जुड़े दस्तावेजों और मंजूरियों पर सवाल उठाए गए थे।
ये आरोप चैरिटी आयुक्त के निष्कर्ष नहीं थे।
टाटा ट्रस्ट्स की शुरुआत जमशेदजी टाटा की परोपकारी पहलों से हुई थी। इसकी शुरुआत 1892 में जे.एन टाटा एंडोमेंट से हुई। बाद में इस नेटवर्क में सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट जैसे प्रमुख ट्रस्ट शामिल हुए, जो आज टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी से प्राप्त आय को परोपकारी गतिविधियों में लगाते हैं।
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