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पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट को लेकर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के बीच विवाद गहरा गया है.
कर्नाटक सरकार का दावा है कि राज्य के सात ज़िलों से पेट्रोल के नमूने लेकर मान्यता प्राप्त लैब्स में जांच कराई गई, जिसमें कई जगह इथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 फ़ीसदी से अधिक पाई गई.
कर्नाटक सरकार के मुताबिक़, कुछ नमूनों में यह मात्रा 31.2 फ़ीसदी तक दर्ज की गई है. हालांकि, प्रमुख तेल कंपनियों ने इन आरोपों को ख़ारिज किया है.
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी इस विवाद पर बयान जारी कर कहा कि देशभर में किए गए परीक्षणों में पेट्रोल के सभी सैंपल निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए हैं.
वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मामले पर केंद्र सरकार को घेरा है. उन्होंने सवाल किया कि अगर पेट्रोल में 20 फ़ीसदी से ज़्यादा इथेनॉल मिलाया जा रहा है, तो संबंधित तेल कंपनियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कब होगी?
दरअसल, कर्नाटक के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिज़वान अरशद ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की थी.
इसमें उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग ने सात ज़िलों के 63 स्थानों से पेट्रोल के नमूने इकट्ठे किए थे.
इनमें बेंगलुरु, चिक्काबल्लापुर, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु समेत अन्य ज़िले शामिल हैं.
अरशद ने कहा, "प्रमुख तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों से लिए गए सैंपल्स में इथेनॉल की मात्रा 20 फ़ीसदी से अधिक मिली. दो कंपनियों के सैंपल में यह मात्रा 31.2 फ़ीसदी और 30.6 फ़ीसदी दर्ज की गई. कुल 14 स्थानों के आंकड़ों में केवल तीन जगह इथेनॉल की मात्रा 20 फ़ीसदी से कम पाई गई."
"शुरुआत में नमूनों को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की आंतरिक प्रयोगशालाओं में भेजा गया था. हालांकि, इन प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट में इथेनॉल की वास्तविक मात्रा का उल्लेख नहीं किया गया. इसके बाद नमूनों की जांच मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कराई गई."
रिज़वान अरशद ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इथेनॉल ब्लेंडिंग के ख़िलाफ़ नहीं है, लेकिन निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल मिलाए जाने से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है.
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रिज़वान अरशद का कहना है कि भारतीय बाज़ार में उपलब्ध वाहनों को इस तरह के अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के इस्तेमाल के हिसाब से डिज़ाइन नहीं किया गया है.
उन्होंने कहा, "कई कार कंपनियों ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर बताया था कि उनकी गाड़ियां 10 प्रतिशत इथेनॉल मिले पेट्रोल के लिए तैयार हैं. अप्रैल 2023 के बाद बेची गई गाड़ियों को भी केवल ई20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिले पेट्रोल के इस्तेमाल के लिए ही मंज़ूरी मिली है."
"इथेनॉल की ज़्यादा मात्रा से गाड़ियों के फ़िल्टर, फ्यूल पंप, इंजेक्टर, पाइप और सील ख़राब हो सकते हैं. इससे गाड़ियों की मरम्मत पर उपभोक्ताओं को 39,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ख़र्च उठाना पड़ता है."
उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिश्रण के कारण माइलेज में क़रीब 10 फ़ीसदी की कमी आती है.
पेट्रोल की क़ीमत 100 रुपये प्रति लीटर मानते हुए उन्होंने दावा किया कि इससे उपभोक्ताओं को सालाना क़रीब 62 हज़ार करोड़ रुपये का नुक़सान होता है.
अरशद के मुताबिक़, दोनों तरह के नुक़सान को मिलाकर उपभोक्ताओं पर सालाना क़रीब 1.01 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.
रिज़वान अरशद ने केंद्र सरकार से पेट्रोल में मिलाए जा रहे इथेनॉल की वास्तविक मात्रा स्पष्ट करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि 20 फ़ीसदी से अधिक इथेनॉल मिलाने वाली तेल कंपनियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए.
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दूसरी तरफ़, इस मामले पर इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की प्रतिक्रिया भी आई है.
इन तेल कंपनियों ने कहा कि कर्नाटक समेत देशभर में सप्लाई किया जा रहा ई20 (बीआईएस) के तय मानक आईएस 17021 के मुताबिक़ है.
यह मानक इथेनॉल मिले पेट्रोल के लिए तय किया गया है.
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर बयान जारी कर कर्नाटक सरकार के दावे ग़लत बताए हैं.
कंपनी ने कहा कि कुछ पेट्रोल पंपों पर निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल मिलाए जाने के हालिया दावे तय जांच प्रक्रियाओं के तहत किए गए परीक्षणों से मेल नहीं खाते.
कंपनी के मुताबिक़, देश के 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 893 सैंपल्स की जांच की गई.
इनमें कर्नाटक के 56 सैंपल भी शामिल थे. कंपनी का दावा है कि सभी सैंपल्स में इथेनॉल की मात्रा निर्धारित 19 से 21 फ़ीसदी की सीमा के भीतर पाई गई.
आधिकारिक बयान में कहा गया, "इंडियन ऑयल ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ मिलकर कर्नाटक सरकार को संयुक्त और पारदर्शी जांच कराने का प्रस्ताव दिया है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके."
कंपनी ने उपभोक्ताओं से आधिकारिक स्रोतों से मिली सत्यापित जानकारी पर भरोसा करने की अपील भी की.
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इस विवाद के बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी आधिकारिक बयान जारी किया है. मंत्रालय ने कहा कि सरकारी तेल कंपनियों की ओर से बेचा जा रहा ई20 पेट्रोल निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतर रहा है.
मंत्रालय ने कहा, "सरकारी तेल कंपनियों की ओर से बेचा जा रहा ई20 पेट्रोल तय गुणवत्ता मानकों पर खरा उतर रहा है. 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लिए गए 893 नमूनों की जांच में सभी तय मानकों के अनुसार पाए गए हैं."
"कर्नाटक में जांचे गए सभी 56 नमूने भी आईएस 17021 मानकों के अनुसार सही पाए गए हैं. इनमें एथेनॉल की मात्रा 19 से 20 प्रतिशत के बीच मिली है."
मंत्रालय ने बताया कि उसके तहत आने वाला सेंटर फ़ॉर हाई टेक्नोलॉजी (सीएचटी) तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल ब्लेंडिंग और पेट्रोल की गुणवत्ता की लगातार निगरानी करता है.
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इस विवाद में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की प्रतिक्रिया भी आई है. राहुल ने भी दावा किया कि कर्नाटक के कई ज़िलों में पेट्रोल की जांच कराने पर ई20 पेट्रोल में 20 फ़ीसदी से ज़्यादा इथेनॉल मिला है.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "मोदी सरकार कहती है कि पेट्रोल में 20 फ़ीसदी इथेनॉल है. कर्नाटक सरकार ने सात ज़िलों से पेट्रोल के सैंपल लेकर मान्यता प्राप्त लैब में जांच करवाई."
राहुल गांधी ने दावा किया कि 14 में से 11 सैंपल में 20 फ़ीसदी से ज़्यादा इथेनॉल पाया गया. इनमें आईओसीएल के एक सैंपल में 31.2 फ़ीसदी और एचपीसीएल के एक सैंपल में 30.5 फ़ीसदी इथेनॉल मिला.
राहुल गांधी ने कहा, "आप पैसे महंगे पेट्रोल के दे रहे हैं और टंकी में इथेनॉल भरा जा रहा है. इसमें नुक़सान आपका है."
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि 20 फ़ीसदी से ज़्यादा इथेनॉल मिलाने वाली कंपनियों पर कार्रवाई कब होगी?
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