हर महीने 2.20 लाख रुपये की सैलरी… सुनने में तो लगता है कि जिंदगी आराम से चल रही होगी। महंगा घर, अच्छी कार, बाहर खाना-पीना और घूमने-फिरने के लिए भी खूब पैसा बचता होगा। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। सोशल मीडिया पर वायरल एक लिंक्डिन पोस्ट ने ऐसे ही एक प्रोफेशनल की कहानी सामने रखी है। 32 साल का यह IT प्रोफेशनल मुंबई में काम करता है और हर महीने करीब 2.20 रुपये लाख कमाता है। लेकिन इतनी मोटी सैलरी के बावजूद महीने के आखिर में उसके पास बहुत कम बचता है।
इस व्यक्ति की सबसे बड़ी परेशानी उसकी होम लोन ईएमआई है। हर महीने 1.12 रुपये लाख सिर्फ घर की ईएमआई में चले जाते हैं। इसके बाद करीब 50 हजार रुपये रोजमर्रा के खर्चों में निकल जाते हैं। ऊपर से कार लोन की ईएमआईभी है। यानी सैलरी आने के बाद पैसे कई हिस्सों में बंट जाते हैं। निवेश की बात करें तो वह तभी 30-40 हजार रुपयेे तक निवेश कर पाता है, जब महीना थोड़ा बेहतर निकल जाए। यानी कमाई लाखों में है, लेकिन हाथ में मौजूद पैसा उतना नहीं है। घर तो करोड़ों का हो सकता है, लेकिन अचानक जरूरत पड़ने पर अकाउंट में पैसा नहीं होता है।
दरअसल, दिक्कत सिर्फ ईएमआई नहीं है। जैसे-जैसे सैलरी बढ़ती है, वैसे-वैसे हमारी जरूरतें भी बढ़ने लगती हैं। पहले छोटा किराए का घर ठीक लगता है, फिर बड़ा घर चाहिए। फिर कार अपग्रेड होती है। इसके बाद महंगे रेस्टोरेंट, छुट्टियां, बेहतर स्कूल और दूसरी सुविधाएं लाइफस्टाइल का हिस्सा बन जाती हैं। इसे ही लाइफस्टाइल इंफ्लेशन कहा जाता है। कमाई बढ़ती है तो लगता है कि अब खर्च करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन धीरे-धीरे पूरी सैलरी एक ऐसी जिंदगी चलाने में लगने लगती है, जिसे बनाए रखने के लिए हर महीने वही सैलरी आना जरूरी हो जाता है।
लिंक्डिन पोस्ट में एक सर्वे का हवाला देते हुए दावा किया गया कि 20 लाख रुपये सालाना से ज्यादा कमाने वाले भारतीयों में 43% लोग अपनी कमाई का 20% से भी कम बचा पाते हैं। यानी समस्या सिर्फ कम कमाने वालों की नहीं है। अच्छी सैलरी पाने वाले लोग भी अगर खर्च और ईएमआई को कंट्रोल नहीं करते, तो आर्थिक रूप से कमजोर हो सकते हैं। सोचिए अगर अचानक नौकरी चली जाए या कोई बड़ा खर्च सामने आ जाए तो क्या होगा? EMI तो हर महीने देनी ही होगी। घर का खर्च भी चलेगा और कार की किस्त भी जाएगी।
2.20 लाख रुपयेे महीने कमाना अच्छी बात है, लेकिन अगर उसमें से ज्यादातर पैसा ईएमआई और खर्चों में चला जाए तो आपकी आर्थिक आजादी कमजोर हो सकती है। असली दौलत वह है जो आपकी सैलरी रुकने के बाद भी आपके काम आए। इसलिए अगली बार सैलरी बढ़े तो सिर्फ यह मत सोचिए कि अब बड़ा घर या बड़ी कार लेनी है। यह भी सोचिए कि हर महीने कितना पैसा ऐसा बच रहा है, जो आपके लिए आगे पैसा बनाएगा। क्योंकि आखिर में सवाल यह नहीं है कि आप कितना कमाते हैं। सवाल यह है कि आपकी कमाई में से आपके पास असल में कितना बचता है।
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