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गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए भोजपुर जिला प्रशासन ने छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला लिया है। जिले के पांच सरकारी विद्यालयों में 24 अगस्त से 29 अगस्त तक पठन-पाठन स्थगित कर दिया गया है। इस दौरान इन स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां बंद रहेंगी। हालांकि, विद्यालयों में पदस्थापित शिक्षक-शिक्षिकाओं की छुट्टी रद्द रहेगी और उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था के तहत शिक्षण कार्य करना होगा।
बाढ़ प्रभावित स्कूलों के शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में भेजा जाएगा
जिला शिक्षा पदाधिकारी डॉ. मानवेंद्र कुमार राय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, बाढ़ प्रभावित विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं को उसी प्रखंड के बाढ़ से सुरक्षित और संचालित नजदीकी विद्यालयों में शिक्षण कार्य के लिए संबद्ध किया जाएगा। इसका उद्देश्य शिक्षकों की सेवाओं का उपयोग जारी रखना और विद्यार्थियों की पढ़ाई को कम से कम प्रभावित होने देना है। इस व्यवस्था के तहत बाढ़ प्रभावित स्कूलों में पढ़ाई भले ही बंद रहेगी, लेकिन वहां तैनात शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं किया गया है। उन्हें प्रशासन की ओर से निर्धारित वैकल्पिक विद्यालयों में जाकर शिक्षण कार्य करना होगा।
अन्य स्कूलों पर भी प्रशासन की नजर
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने अधिकारियों से कहा है कि यदि कोई अन्य विद्यालय भी बाढ़ की चपेट में आता है तो उसकी प्रमाणित सूची जिला शिक्षा कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। इस सूची के आधार पर जरूरत के अनुसार संबंधित विद्यालय में पठन-पाठन बंद करने या विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का फैसला लिया जाएगा।
इन पांच विद्यालयों में 29 अगस्त तक बंद रहेगी पढ़ाई
बाढ़ प्रभावित विद्यालयों की सूची में बड़हरा अंचल के तीन स्कूल शामिल हैं। इनमें प्राथमिक विद्यालय शिवपुर, उत्क्रमित मध्य विद्यालय नेकनाम टोला और प्राथमिक विद्यालय जीवा राय का टोला शामिल हैं। इसके अलावा कोइलवर अंचल के मध्य विद्यालय ज्ञानपुर और शाहपुर अंचल के ई.आ.प्रा.वि. बरिसवन में भी 24 अगस्त से 29 अगस्त तक पठन-पाठन स्थगित रहेगा।
विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए लिया गया फैसला
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में पढ़ाई बंद करने का फैसला केवल छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। बाढ़ की स्थिति सामान्य होने के बाद आगे की व्यवस्था के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक और शिक्षक-शिक्षिकाओं को निर्देश दिया गया है कि वे प्रशासन की ओर से तय वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहें। इस कदम से एक ओर बाढ़ प्रभावित इलाकों के विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की सेवाओं का उपयोग भी जारी रखा जाएगा।
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