पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक दिल्ली में 19 दिनों से सिर्फ नमक पानी पर जीवित हैं। उनकी भूख हड़ताल ने एक बार फिर भारत में भूख हड़ताल की परंपरा को जीवित कर दिया है।
पोट्टी श्रीरामुलु: वह व्यक्ति जिसने भारत का नक्शा बदल दिया
1952 में पोट्टी श्रीरामुलु ने तेलुगु भाषियों के लिए अलग राज्य की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की। 58 दिनों के बाद उनकी मृत्यु हो गई, जिसके बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और अंततः आंध्र राज्य का निर्माण हुआ। इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने लिखा है कि श्रीरामुलु का योगदान भारत के इतिहास और भूगोल में महत्वपूर्ण था।
गांधी से विरासत: भूख हड़ताल का राजनीतिक उपकरण
महात्मा गांधी ने भूख हड़ताल को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख हथियार बनाया। उन्होंने कम से कम 15 प्रमुख अनशन किए, जिनमें से सबसे लंबा 21 दिनों का था। गांधी का मानना था कि भूख हड़ताल जबरदस्ती नहीं, बल्कि पीड़ा के माध्यम से जागरूकता पैदा करने का एक तरीका है।
आधुनिक भारत में भूख हड़तालें
स्वतंत्र भारत में कई भूख हड़तालें हुई हैं - किसानों के अधिकारों, आरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों के लिए। इरोम शर्मिला ने 16 साल तक भूख हड़ताल की, जबकि अन्ना हजारे की 2011 की अनशन ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को गति दी।
भूख हड़ताल की आलोचना
बी.आर. अंबेडकर ने 1949 में चेतावनी दी थी कि संवैधानिक तरीके उपलब्ध होने के बाद भूख हड़ताल और सविनय अवज्ञा को छोड़ देना चाहिए। राजनीतिक दार्शनिक प्रताप भानु मेहता ने इसे 'गहरा जबरदस्ती' करार दिया।
वांगचुक का अनशन: क्या यह सफल होगा?
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर है। उनके स्वास्थ्य में गिरावट के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने सरकार को उनके स्वास्थ्य की निगरानी का आदेश दिया है। यह देखना बाकी है कि क्या उनका यह बलिदान राजनीतिक बदलाव लाएगा या नहीं।
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