अगर आपसे पूछा जाए कि दुनिया में सबसे ज्यादा किस देश को लोग नापसंद यानी (Dislike) करते हैं, तो शायद आपके मन इस देश का नाम पहले नंबर पर नहीं आएगा, दूसरे नंबर पर जो नाम है, वो भी आपको हैरान कर देगा.
दरअसल, देशों की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी नीतियों, सैन्य हस्तक्षेप, राजनीतिक फैसलों और मानवाधिकार रिकॉर्ड से तय होती है. 'वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू' और वैश्विक जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक सबसे नापसंद देशों की सूची में पहले नंबर पर चीन है, दूसरे नंबर पर विश्व का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका है. यह सूची किसी देश के आम नागरिकों की नहीं, बल्कि उनकी सरकारों और वैश्विक प्रभाव के प्रति दुनिया के नजरिये को दर्शाती है.
महाशक्तियों की आक्रामक विदेश नीति से लेकर आंतरिक संघर्ष, तानाशाही और सीमा विवादों तक, कई ऐसे भू-राजनीतिक कारण हैं, जो किसी राष्ट्र के प्रति नकारात्मक धारणा बनाते हैं. यह सूची दिखाती है कि वैश्विक मंच पर सत्ता संतुलन और कूटनीति किस तरह जनमत को प्रभावित करती है.
बता दें, वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू ने दुनिया में नापसंद किए जाने वाले टॉप-20 देशों की एक लिस्ट जारी की है. जिसमें अधिकतर वैश्विक महाशक्तियां हैं. चीन, अमेरिका और रूस टॉप-3 देशों में हैं.
चीन (रैंक- 1): सख्त सरकारी नियंत्रण, मानवाधिकारों के हनन, ताइवान व दक्षिण चीन सागर में आक्रामक रुख और 'डेट-ट्रैप डिप्लोमेसी' के कारण आलोचना झेलता है, और दुनिया में सबसे ज्यादा नापसंद किए जाने वाले देशों में नंबर-1 पर है.
अमेरिका (रैंक- 2): वैश्विक मामलों में सैन्य हस्तक्षेप, एकतरफा प्रतिबंधों की नीति और आंतरिक राजनीतिक ध्रुवीकरण इसके प्रति नाराजगी के मुख्य कारण माने जाते हैं.
रूस (रैंक- 3): यूक्रेन युद्ध, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध और पश्चिमी देशों के साथ जारी तनाव ने इसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को काफी नुकसान पहुंचाया है.
इस लिस्ट उत्तर कोरिया, इजराइल, ईरान, सीरिया और इराक का नाम है. ये देश सबसे ज्यादा तानाशाही और आपसी संघर्ष के लिए जाना जाता है.
उत्तर कोरिया और ईरान: अपने परमाणु कार्यक्रमों, आंतरिक दमन और वैश्विक अलगाववाद के कारण इस सूची में हैं. इज़राइल और सीरिया: मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी सैन्य संघर्ष, मानवीय संकट और युद्ध से जुड़े विनाशकारी प्रभावों के कारण वैश्विक स्तर पर आलोचना का सामना करते हैं.
इस लिस्ट में पाकिस्तान छठे पायदान पर है. पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता, चरमपंथ के मुद्दे और पड़ोसी देशों के साथ सीमा तनाव मुख्यतौर पर नापसंद करने का कारण है.
भारत (रैंक- 10): तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और विशाल लोकतंत्र होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सवाल, राजनीतिक ध्रुवीकरण और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चाएं इसकी वैश्विक रेटिंग को प्रभावित करती हैं.
आर्थिक तौर पर संपन्न देश UK, जापान, जर्मनी, इटली और दक्षिण कोरिया भी टॉप-20 नापसंद देशों में शामिल हैं. इन विकसित देशों का सूची में आना मुख्य रूप से ऐतिहासिक औपनिवेशिक प्रभाव, कठोर फैसले क्षेत्रीय और पड़ोसियों से तनाव कारण है.
यह रैंकिंग किसी देश के नागरिकों के स्वभाव का मूल्यांकन नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी सरकारों के फैसलों, नीतियों और मीडिया नैरेटिव का प्रतिबिंब है. समय और वैश्विक घटनाओं के अनुसार इन धारणाओं में लगातार बदलाव आता रहता है.
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