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तमाम अध्ययन इस बात को स्पष्ट कर चुके हैं कि स्क्रीन टाइम यानी मोबाइल-लैपटॉप या टीवी जैसी किसी भी स्क्रीन पर आप जितना ज्यादा समय बिताते हैं, उससे सेहत को उतना ज्यादा खतरा हो सकता है। ये शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तो है ही, साथ ही लंबे समय में इससे मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर हो सकता है। अध्ययनों में लगातार अलर्ट किया जाता रहा है कि स्क्रीन टाइम बच्चों की सेहत और विकास के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
बच्चे के सामने मोबाइल चलाने से बचें माता-पिता नॉर्वे में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि जब माता-पिता फोन में व्यस्त होते हैं तो बच्चे के साथ बातचीत के मौके अपने आप कम हो जाते हैं। बच्चे का स्वभाव जिज्ञासू होता है, पर मम्मी-पापा के मोबाइल में बिजी रहने से बच्चों के सवालों का जवाब छोटा हो जाता है, बच्चा भी किताब पढ़ने की जगह मोबाइल चलाने की आदत बनाने लगता है। इससे दिनभर की छोटी-छोटी बातचीत भी कम हो सकती है। जबकि इन्हीं बातचीत के दौरान बच्चा नए शब्द सुनता है, उनके अर्थ समझता है और भाषा का इस्तेमाल करना सीखता है। अध्ययन में सामने आया कि जिन पांच साल के बच्चों के पास Smartphone या टैबलेट था, उनकी भाषा क्षमता शुरुआत में काफी कम रही। दूसरी ओर, जिन माता-पिता का फोन इस्तेमाल ज्यादा था, उनके बच्चों में शब्दावली के विकास की गति भी काफी धीमी पाई गई। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि Smartphone और टैबलेट ध्यान भटकाने वाले उपकरण हैं। इनका बार-बार इस्तेमाल माता-पिता का ध्यान बच्चों से हटा सकता है। इसका सीधा असर यह हो सकता है कि माता-पिता बच्चों से कम बातचीत करते हैं और जिन शब्दों को बच्चों को समय रहते सीख जाना चाहिए, उसे समझने और बोलने में ज्यादा वक्त लगाते हैं।
फोन डाल सकता है बच्चों के सीखने की क्षमता पर असर स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों के शुरुआती वर्षों में माता-पिता और घर वालों की उनसे बातचीत बेहद महत्वपूर्ण होती है। माता-पिता के साथ बातचीत कम होने से बच्चे नए शब्द सीखने और अपनी भाषा विकसित करने के जरूरी मौकों से वंचित हो सकते हैं।
अध्ययन में क्या पता चला? जामा पिडियाट्रिक में प्रकाशित इस हालिया अध्ययन में नॉर्वे के 747 बच्चों को शामिल किया गया और बच्चों को पांच साल की उम्र से लेकर उनके आठवें जन्मदिन तक फॉलो किया गया। अध्ययन की शुरुआत में माता-पिता से पूछा गया कि उनका बच्चा औसतन रोज कितने घंटे स्क्रीन देखता है, क्या बच्चे के पास अपना टैबलेट या Smartphone है? उनके खुद के सोशल मीडिया इस्तेमाल के बारे में भी सवाल किए गए। माता-पिता को अपने फोन में दर्ज स्क्रीन टाइम की जानकारी शोधकर्ताओं को देने के लिए कहा गया, ताकि उनके फोन इस्तेमाल का वास्तविक समय पता चल सके। इसके आधार पर बच्चों की भाषा क्षमता को भी नियमित रूप से जांचा गया।
क्या कहती हैं विशेषज्ञ? अध्ययन की मुख्य लेखिका डॉ. जुनयी यांग कहती हैं, परिवार में स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल ऐसी महत्वपूर्ण गतिविधियों की जगह ले सकता है, जो बच्चों की भाषा विकसित करने में मदद करती हैं। उदाहरण के लिए, मिलकर किताब पढ़ना, बच्चों को कहानी सुनाना और उनके साथ बातचीत करना बच्चे को नए शब्द सीखने के बेहतर अवसर देते हैं। दो साल की उम्र में सबसे ज्यादा स्क्रीन देखने वाले बच्चे (करीब पांच घंटे रोज) उन बच्चों की तुलना में काफी कम शब्द बोल पाते थे जो दिन में एक घंटे से भी कम समय स्क्रीन देखते थे। परिवार में स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल होने का मतलब यह भी हो सकता है कि घर में माता-पिता और बच्चों के बीच बातचीत का समय कम हो रहा है। औसतन माता-पिता जितना ज्यादा समय फोन पर बिताते थे, बच्चे भी उतना ही ज्यादा स्क्रीन देखते थे। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि छोटे बच्चों में स्क्रीन का इस्तेमाल अब लगभग हर जगह सामान्य हो चुका है। करीब 98 प्रतिशत दो साल के बच्चे रोजाना स्क्रीन देखते हैं। ये बच्चों को बौद्धिक विकास के लिए ठीक नहीं है।
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