दो दोस्त, रोहित और मोहित. दोनों को एकसाथ नौकरी मिली, सैलरी भी शुरुआत में करीब-करीब एक जैसी 40 हजार रुपये. लेकिन रोहित ने किराये पर रहने का फैसला लिया और मोहित ने अपना फ्लैट खरीदने का. लेकिन रोहित ने रेंट पर रहते हुए जितना किराया दे रहे थे, उतने का एसआईपी भी करते रहे. जबकि मोहित की कमाई EMI भरने में जा रही थी. 15 साल के बाद दोनों की आर्थिक स्थिति कैसी होगी? कौन ज्यादा अमीर बन जाएगा?
दरअसल, अधिकतर लोगों के मन में नौकरी शुरू करते ही एक बड़ा सवाल आता है, 'किराया देकर पैसे बचाएं या EMI भरकर अपना घर बनाएं?' मोहित ने शुरुआत में अपनी जेब टाइट करके खुद का घर चुनना बेहतर समझा, वहीं रोहित ने किराये के साथ बचे पैसों को SIP में लगाकर अपना फंड बनाया.
दोनों का 15 साल का गणित रोहित और मोहित का यह फैसला भारत के हर युवा की उलझन है. लेकिन इसे बिल्कुल आसान गणित और व्यावहारिक उदाहरण से समझते हैं कि 15 साल बाद कौन कहां खड़ा होगा? मान लेते हैं कि दोनों की नौकरी 40 हजार रुपये महीने से शुरू हुई और हर साल दोनों की सैलरी में औसतन 8-10% की बढ़ोतरी होती है.
मोहित का फैसला (घर खरीदा) फ्लैट की कीमत: करीब 30 लाख रुपये. डाउन पेमेंट: 6 लाख रुपये. होम लोन: 24 लाख रुपये (8.5% ब्याज दर पर 20 साल के लिए) महीने की EMI (मंथली): करीब 20,800 रुपये.
मोहित की सैलरी का बड़ा हिस्सा करीब 70% शुरुआत में सिर्फ EMI भरने में चला जाता है. उसके पास निवेश के लिए बहुत कम पैसा बचता. अगर प्रॉपर्टी का दाम औसतन 7% सालाना की दर से बढ़ता है, तो 30 लाख रुपये का घर 15 साल के बाद करीब 83 लाख रुपये का हो जाएगा. 15 साल के बाद मोहित का अधिकांश लोन खत्म हो चुका होगा और उसके सिर पर अपनी खुद की छत होगी.
रोहित का फैसला (किराये पर रहते हुए SIP) शुरुआती किराया 8 हजार रुपये मानकर चलते हैं. क्योंकि मोहित ने जो घर 30 लाख रुपये में खरीदा है, उसका मंथली किराया करीब 8 हजार मान सकते हैं. ऐसे में मोहित की EMI 20,800 रुपये थी. रोहित किराये के 8 हजार रुपये देने के बाद बचे हुए करीब 12,800 रुपये को हर महीने म्यूचुअल फंड (SIP) में लगाने लगा. वहीं दूसरी ओर रोहित के किराये में भी सालाना 7% का इजाफा होता रहा.
अब सवाल उठता है कि इन सबके बीच 15 साल के बाद रोहित की स्थिति क्या होगी? अगर म्यूचुअल फंड में रोहित को औसतन 12% से 14% का सालाना रिटर्न मिलता है, तो 15 साल बाद उसके SIP का कुल कॉर्पस लगभग 65 लाख से 75 लाख रुपये के बीच होगा.
15 साल बाद कौन ज्यादा अमीर और कौन फायदे में? कागजी आंकड़ों के लिहाज से दोनों लगभग एक बराबर या थोड़ा-बहुत ऊपर-नीचे खड़े होंगे.
20 साल के बाद क्या स्थिति होगी? अगर प्रॉपर्टी की कीमत हर साल औसतन 7% से बढ़ती है, तो 20 साल के बाद मोहित के 30 लाख का घर लगभग 1.16 करोड़ रुपये का हो जाएगा. 20 साल पूरे होते ही मोहित का पूरा लोन खत्म हो जाएगा. अब वह बिना किसी EMI के अपने खुद के 1.16 करोड़ के घर में सुकून से रहेगा.
रोहित का फैसला (किराया + SIP) शुरुआती 15 सालों में बाजार जितना रिटर्न देता है, अगले 5 सालों में कंपाउंडिंग की वजह से पैसा बहुत तेजी से भागता है. अगर औसतन 12% से 13% का रिटर्न मिले, तो 20 साल बाद के रोहित का SIP कॉर्पस करीब 1.30 करोड़ से 1.50 करोड़ रुपये का बन जाएगा.
20 साल के बाद अमीरी के मामले कौन आगे कौन पीछे? शेयर बाजार का रिटर्न (12-14%) आमतौर पर रियल एस्टेट (6-8%) से ज्यादा होता है. 20 साल जैसे लंबे समय में कंपाउंडिंग रोहित के पैसे को मोहित के घर की कीमत से काफी आगे ले जाएगी. रोहित 20 साल के बाद चाहें तो 1.16 करोड़ रुपये नगद देकर मोहित जैसा घर भी खरीद सकता है, और उसके पास 20-30 लाख कैश भी बच जाएगा. यानी 15 साल की अलग तस्वीर है, और 20 साल की अलग. 20 साल के बाद रोहित SIP की मदद से पैसे के मामलों में मोहित से 20 से 30 लाख रुपये ज्यादा जुटा सकता है.
क्या मोहित ने घर खरीदकर गलती की? खुद के घर से एक भावनात्मक जुड़ाव होता है, जिसे पैसों में नहीं नापा जा सकता है. मोहित की EMI एक तरह की मजबूरन बचत बन गई. अगर वह घर न लेता, तो शायद वह पूरा पैसा बचा भी न पाता.
फिर क्या रोहित ने किराये में पैसा बर्बाद किया? रोहित का फैसला भी गलत नहीं था, उसने किराये के साथ-साथ बचे हुए पैसे को सही जगह पर निवेश किया. 20 साल के बाद मोहित के जैसा घर बिना किसी लोन के एकमुश्त नगद भुगतान कर खरीद सकता है, साथ ही करीब 30 लाख बच भी जाएगा. साथ ही रोहित नौकरी बदलने या दूसरे शहर शिफ्ट होने के लिए हमेशा स्वतंत्र रहा.
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!