बांका में इस साल के श्रावणी मेले के मुख्य आकर्षणों में से एक था कांवरिया पथ पर स्थापित विशेष प्रदर्शनी, जहाँ बिहार सरकार की प्रमुख योजनाओं और पहलों को बड़े पैमाने पर प्रस्तुत किया गया। इस आयोजन का संचालन राज्य के जनसंपर्क विभाग ने किया, जिसका उद्देश्य मेले में आए लोगों को सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी देना और उन्हें लाभ उठाने के लिए प्रेरित करना था।
प्रदर्शनी में कुल २५० से अधिक स्टॉल लगे थे, जिनमें से अधिकांश में योजना‑विशिष्ट ब्रोशर, डिजिटल टच‑स्क्रीन कियोस्क और AI‑संचालित चैटबॉट्स लगे थे। ये चैटबॉट्स ग्रामीण एवं शहरी दोनों वर्गों के सवालों के तुरंत जवाब देने में सक्षम थे, जिससे नागरिकों को योजना के पात्रता मानदंड, आवेदन प्रक्रिया और लाभों की स्पष्ट समझ मिली।
मुख्य रूप से प्रस्तुत की गई योजनाओं में शामिल थे: PM‑Kisan के तहत किसानों को सब्सिडी, PMAY (ग्रामीण) के माध्यम से घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता, बिहार कौशल विकास मिशन के तहत रोजगार‑उन्मुख प्रशिक्षण, तथा बिहार EV (इलेक्ट्रिक वाहन) पहल जिसमें इलेक्ट्रिक स्कूटर और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए प्रोत्साहन शामिल है। इसके अलावा, राज्य के PSU कंपनियों में निवेश के अवसर और आगामी IPO की जानकारी भी दी गई।
प्रदर्शनी में विशेष रूप से डिजिटल बिहार पोर्टल को उजागर किया गया, जहाँ नागरिक अपने ग्रिवांस दर्ज कर सकते हैं, दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं और योजना की स्थिति रियल‑टाइम में ट्रैक कर सकते हैं। इस पोर्टल में RBI द्वारा मान्यता प्राप्त डिजिटल भुगतान गेटवे भी एकीकृत हैं, जिससे सब्सिडी का सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर संभव हो रहा है।
बिहार सरकार के सचिव (जनसंपर्क) श्री अजय सिंह ने उद्घाटन समारोह में कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों को योजना का लाभ उठाने के लिए सशक्त बनाना है। इस तरह के इंटरैक्टिव प्लेटफ़ॉर्म से हम ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा दे सकते हैं।”
स्थानीय व्यापारियों और छोटे उद्योगपतियों ने भी इस प्रदर्शनी को सराहा, क्योंकि इसमें उन्हें बिजनेस सॉल्यूशन सेंटर के तहत MSME‑सहायता, ऋण सुविधाएँ और बाजार पहुंच के बारे में जानकारी मिली। कई युवा उद्यमियों ने राज्य के स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम को समर्थन देने वाले फंड और इन्क्यूबेशन कार्यक्रमों में भाग लेने की इच्छा जताई।
जिन नागरिकों ने इस प्रदर्शनी का दौरा किया, उन्होंने बताया कि डिजिटल कियोस्क और AI‑सहायता ने योजना समझने में समय बचाया और भ्रम को कम किया। एक किसान ने कहा, “पहले योजना की शर्तें समझना मुश्किल होता था, अब यहाँ सब कुछ स्पष्ट रूप से दिखाया गया है, इसलिए मैं तुरंत आवेदन करूँगा।”
कुल मिलाकर, कांवरिया पथ पर आयोजित इस प्रदर्शनी ने मेले को सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंच नहीं बना दिया, बल्कि इसे सामाजिक जागरूकता और विकास का भी केंद्र बना दिया। जनसंपर्क विभाग ने इस सफलता को देखते हुए भविष्य में ऐसे इंटरैक्टिव प्रदर्शनी मॉडल को अन्य जिलों में भी दोहराने की योजना बनाई है।
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