हाल ही में बेंगलुरु के एक स्टार्टअप विमैग लैब्स ने मोटरों में दुर्लभ-पृथ्वी मैग्नेट को तथाकथित 'वर्चुअल' मैग्नेट से बदलने की खबरें आई हैं।
एक रिपोर्ट में स्टार्टअप के सीईओ मनीष सेठ ने कहा, 'हम स्थायी मैग्नेट हटाकर तांबे की कॉइल लगाते हैं और फिर सॉफ्टवेयर के जरिए मोटर के अंदर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करते हैं।'
चुंबकीय क्षेत्र कैसे बनता है?
मोटर को संचालित करने के लिए चुंबकीय क्षेत्र की आवश्यकता होती है। इसे स्थायी मैग्नेट या तांबे की कॉइल से बने इलेक्ट्रोमैग्नेट से बनाया जा सकता है। स्टार्टअप ने स्थायी मैग्नेट के बजाय इलेक्ट्रोमैग्नेट का उपयोग किया है।
जब कोई विद्युत मशीन बिजली को यांत्रिक गति में बदलती है, तो उसे मोटर कहते हैं। इसके विपरीत, यांत्रिक गति को बिजली में बदलने वाली मशीन जनरेटर है। दोनों में चुंबकीय क्षेत्र के माध्यम से रूपांतरण होता है।
इलेक्ट्रोमैग्नेट का उपयोग
बड़े पैमाने पर जनरेटर में लंबे समय से इलेक्ट्रोमैग्नेट का उपयोग हो रहा है। रोटर पर तांबे की कॉइल लपेटी जाती हैं, जिनमें डायरेक्ट करंट (DC) प्रवाहित करने पर चुंबकीय क्षेत्र बनता है। यह तकनीक 135 साल पुरानी है।
स्टार्टअप के 'वर्चुअल' मैग्नेट में सॉफ्टवेयर इलेक्ट्रोमैग्नेट में करंट को नियंत्रित करता है। इसमें कोई नई बात नहीं है।
दक्षता की समस्या
स्थायी मैग्नेट की तुलना में इलेक्ट्रोमैग्नेट में अतिरिक्त ऊर्जा खपत होती है, जैसे कोर लॉस, तांबे में प्रतिरोध लॉस, और स्विचिंग लॉस। इसलिए इलेक्ट्रोमैग्नेट मोटर की दक्षता कम होने की संभावना है।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में मोटर की दक्षता में हर 0.1% सुधार से रेंज में बड़ा अंतर आता है। वर्तमान में पर्मानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर (PMSM) सबसे कुशल हैं।
अन्य विकल्प
स्विच्ड रिलक्टेंस मोटर (SRM) और सिंक्रोनस रिलक्टेंस मोटर भी विकल्प हैं, लेकिन इनमें शोर, कम दक्षता या टॉर्क की समस्या है। होंडा और हिताची एस्टेमो इन पर काम कर रहे हैं।
अब देखना होगा कि बेंगलुरु का स्टार्टअप चार-पहिया EV बाजार में कितना सफल होता है।
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