वर्चुअल मैग्नेट: क्या है यह नई तकनीक?
हाल ही में बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी विमैग लैब्स ने दावा किया है कि उसने मोटरों में दुर्लभ-पृथ्वी मैग्नेट की जगह 'वर्चुअल मैग्नेट' का इस्तेमाल किया है। कंपनी के सीईओ मनीष सेठ के अनुसार, वे स्थायी मैग्नेट हटाकर तांबे की कॉइल लगाते हैं और सॉफ्टवेयर के जरिए मोटर के अंदर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करते हैं।
मोटर में चुंबकीय क्षेत्र कैसे बनता है?
किसी भी मोटर को चलने के लिए चुंबकीय क्षेत्र की जरूरत होती है। यह क्षेत्र स्थायी मैग्नेट या इलेक्ट्रोमैग्नेट (जिसमें तांबे की कॉइल में करंट प्रवाहित करके चुंबक बनाया जाता है) से बनाया जा सकता है। विमैग लैब्स ने स्थायी मैग्नेट की जगह इलेक्ट्रोमैग्नेट का इस्तेमाल किया है।
क्या यह तकनीक नई है?
दरअसल, बिजली संयंत्रों में जनरेटर दशकों से इलेक्ट्रोमैग्नेट का उपयोग कर रहे हैं। इसमें रोटर पर तांबे की कॉइल लगी होती हैं, जिनमें डायरेक्ट करंट (DC) प्रवाहित करके चुंबकीय क्षेत्र बनाया जाता है। सॉफ्टवेयर सिर्फ करंट को नियंत्रित करता है, चुंबकत्व खुद नहीं बनाता। इसलिए यह कोई नई खोज नहीं है।
इलेक्ट्रोमैग्नेट बनाम स्थायी मैग्नेट: दक्षता की लड़ाई
स्थायी मैग्नेट वाली मोटरों में चुंबकीय क्षेत्र बनाने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत नहीं होती, जबकि इलेक्ट्रोमैग्नेट में करंट प्रवाहित करने से ऊर्जा हानि होती है। इसलिए स्थायी मैग्नेट मोटरें अधिक दक्ष होती हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में हर 0.1% दक्षता बढ़ने से रेंज में काफी सुधार होता है, इसलिए वर्तमान में EV बाजार में स्थायी मैग्नेट सिंक्रोनस मोटरों का दबदबा है।
अन्य विकल्प और चुनौतियां
स्थायी मैग्नेट के विकल्प के रूप में स्विच्ड रिलक्टेंस मोटर (SRM) और सिंक्रोनस रिलक्टेंस मोटर पर भी काम हो रहा है, लेकिन दक्षता, टॉर्क और अधिकतम गति जैसी बाधाओं के कारण ये अभी EV के लिए उपयुक्त नहीं हैं। होंडा और हिताची एस्टेमो जैसी कंपनियां इस दिशा में प्रयास कर रही हैं।
यह देखना बाकी है कि बेंगलुरु की यह स्टार्टअप चार-पहिया EV बाजार में कितनी सफल होती है।
Comments ()
No comments yet. Be the first to share your thoughts!