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दक्षिण-पश्चिम मानसून पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में कहर बनकर टूट रहा है। बुधवार को जम्मू-कश्मीर से लेकर हिमाचल और उत्तराखंड में ज्यादातर जगहों पर गरज और चमक के साथ मूसलाधार बारिश हुई। जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में भारी बारिश के बीच बादल फटा। भारी बारिश से पहाड़ी राज्यों में जगह-जगह भूस्खलन होने से कई मार्गों पर यातायात बाधित हो गया। उत्तराखंड के पिथौरागड़ में बेली ब्रिज टूटने से सीमावर्ती क्षेत्रों से संपर्क टूट गया। पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ समेत उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने कई क्षेत्रों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
विदर्भ और छत्तीसगढ़ को लेकर क्या अनुमान मध्य भारत में बारिश का असर अधिक व्यापक रहेगा। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 20-23 अगस्त के दौरान बारिश और 20-21 अगस्त तथा 23-24 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 20-25 अगस्त तक बारिश का अनुमान है, जबकि 20-22 अगस्त के दौरान कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश जारी रह सकती है। विदर्भ में 20-22 अगस्त तथा 24-25 अगस्त को बारिश की संभावना है। छत्तीसगढ़ में 21-22 अगस्त को बारिश और 21 अगस्त तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। बाढ़ की मार झेल रहे ओडिशा में भी बारिश पूर्वी भारत में झारखंड में 20-21 अगस्त को छिटपुट बारिश, जबकि 22-25 अगस्त के दौरान बारिश के आसार हैं। बिहार में 21-23 अगस्त के बीच भारी बारिश हो सकती है और 22 अगस्त को गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। ओडिशा में 21-25 अगस्त के बीच बारिश और कई स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है। कर्नाटक कोंकण गोवा से पूर्वोत्तर तक कैसा रहेगा मौसम? पूर्वोत्तर में अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में 20-22 अगस्त तक बारिश तथा कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा जारी रह सकती है। पश्चिम भारत में कोंकण-गोवा में 20-25 अगस्त तक बारिश का दौर रहेगा। दक्षिण भारत में तटीय कर्नाटक में 20-25 अगस्त तक भारी बारिश, जबकि कई अन्य राज्यों में छिटपुट वर्षा की संभावना है।
चीन की सीमा से लगे क्षेत्रों से संपर्क कटा उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में बुधवार तड़के हुई भारी बारिश के बाद धारचूला-तवाघाट हाईवे पर कुलागाड़ के पास पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर गिरने से करीब 70 मीटर स्पान का वैली ब्रिज टूटकर गधेरे में समा गया। पुल टूटने से चीन सीमा से लगे दारमा, व्यास और चौंदास घाटियों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। तीनों घाटियों के 12 से अधिक गांव अलग-थलग पड़ गए हैं। मानसरोवर यात्रा के नौवें दल के यात्रियों की वापसी भी मुश्किल हो गई है। वर्ष 2024 में भी वैली ब्रिज टूट गया था।
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