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अमेरिका ने ईरान को जिस 'मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स' की धमकी दी, वो कितना ख़तरनाक है?

Ajay Tiwari
19 October 2026 • 0 • 44
अमेरिका ने ईरान को जिस 'मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स' की धमकी दी, वो कितना ख़तरनाक है?

इमेज स्रोत, DoD/Getty Images

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक और हमले की चेतावनी दी है.

ख़बरों के मुताबिक़, अमेरिकी सैन्य योजनाकार ईरान के परमाणु ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर बेहद ताक़तवर बम 'मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स' के इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं.

यह धमकी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका ईरान वॉर में अपने लक्ष्यों को अब तक पूरी तरह से हासिल नहीं कर पाया है और ईरान सार्वजनिक तौर पर पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दे रहा है.

ईरानी मीडिया में इस बात पर बहस जारी है कि क्या इस बम की विनाशकारी ताक़त ईरान के ज़मीन के भीतर सबसे गहराई में बने परमाणु ठिकानों को नष्ट करने के लिए काफ़ी होगी.

ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप की इस धमकी का करारा जवाब दिया है और कहा है कि ईरान पर इसका कुछ असर नहीं होगा.

वहीं, कुछ टिप्पणीकारों ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमलों के आम लोगों के लिए विनाशकारी नतीजे हो सकते हैं और इसके जवाब में ईरान आगे और हमले कर सकता है.

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव नज़दीक हैं. ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह धमकी दोबारा सैन्य कार्रवाई की तैयारी का संकेत है या इसका मक़सद केवल ईरान पर दबाव बनाना और उस पर निर्णायक जीत की तस्वीर पेश करना है, ताकि ट्रंप अपनी रिपब्लिकन पार्टी की जीत सुनिश्चित कर सकें.

इमेज स्रोत, Alex WROBLEWSKI / AFP via Getty Images

15 अक्तूबर को अमेरिकी ब्रॉडकास्टर न्यूज़मैक्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को ईरान के नतांज़ परमाणु परिसर के पास स्थित पिकऐक्स माउंटेन पर हमला करना पड़ सकता है. पिकऐक्स माउंटेन में ज़मीन के भीतर परमाणु गतिविधियों से जुड़ा एक ठिकाना होने का संदेह है.

उन्होंने कहा, "हम इसे जल्दी तबाह कर देंगे." ट्रंप ने ज़मीनी सैनिक भेजने की संभावना से इनकार किया और इस बात पर ज़ोर दिया कि वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे. उन्होंने मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स के बारे में कहा, "यह एक बहुत बड़ा बम है, लेकिन परमाणु बम नहीं है."

ट्रंप का यह बयान सीएनएन की उस रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी सेना ने हमले की नई योजनाएं तैयार की हैं. इनमें ईरान के परमाणु ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे पर मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स के संभावित इस्तेमाल की योजना भी शामिल है.

हालांकि, ट्रंप ने इस बात की पुष्टि नहीं की कि उन्होंने इस बम के इस्तेमाल की मंज़ूरी दे दी है.

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देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.

सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक़, जीबीयू-43/बी मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट (एमओएबी- मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स) बम का वज़न क़रीब 21,000 पाउंड यानी 9.5 टन है. इसमें क़रीब 18,700 पाउंड विस्फोटक होता है.

जीपीएस की मदद से निशाना लगाने वाला यह बम बड़े इलाके में बेहद ताक़तवर धमाके की लहर पैदा करता है. लेकिन इसका बाहरी खोल पतला होता है, क्योंकि इसे ज़मीन के भीतर गहराई तक घुसने के बजाय धमाके का असर ज़्यादा से ज़्यादा फैलाने के लिए बनाया गया है.

इस बम का पहली और अब तक इकलौती बार किसी सैन्य अभियान में इस्तेमाल अप्रैल 2017 में अफ़ग़ानिस्तान में चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के सुरंगों के एक परिसर पर किया गया था.

माना जाता है कि मध्य ईरान में स्थित पिकऐक्स माउंटेन का ठिकाना ज़मीन से कम से कम 100 मीटर नीचे तक फैला हुआ है. ऐसे में मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स इसके ख़िलाफ़ कितना असरदार होगा, यह साफ़ नहीं है. इसकी एक वजह यह भी है कि इस ठिकाने का असली मक़सद, अंदरूनी बनावट और मौजूदा स्थिति अब भी काफ़ी हद तक गोपनीय है.

मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स के धमाके से प्रवेश द्वारों या हवा आने-जाने के रास्तों के ज़रिए ज़मीन के भीतर मौजूद ढांचे को नुक़सान पहुंच सकता है. लेकिन इस बम को चट्टानों को भेदकर ज़मीन के भीतर जाने के लिए नहीं बनाया गया है.

अमेरिका के पास ज़मीन के भीतर बने बेहद मज़बूत ठिकानों को निशाना बनाने के लिए एक ख़ास हथियार भी है. यह 30,000 पाउंड वज़नी जीबीयू-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर है, जिसे आम तौर पर 'बंकर-बस्टर' कहा जाता है. इसे धमाका होने से पहले ज़मीन के भीतर गहराई तक घुसने के लिए बनाया गया है.

सेंटर फ़ॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ (सीएसआईएस) के हालिया विश्लेषण के मुताबिक़, अमेरिका के पास क़रीब 10 एमओएबी बम बचे हैं. विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि जून 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों के ख़िलाफ़ 14 जीबीयू-57 बम इस्तेमाल किए गए थे. इसके बाद अमेरिका के पास ऐसे बमों की संख्या घटकर पांच से भी कम रह गई है.

ट्रंप के बयान और हमले की कथित योजनाओं से यह सवाल उठता है कि अमेरिका आख़िर हासिल क्या करना चाहता है. एक संभावना यह है कि इस हथियार की अहमियत कुछ हद तक इसके मनोवैज्ञानिक असर में है. एक बड़ा हमला अमेरिकी सैन्य ताक़त दिखा सकता है और यह संदेश दे सकता है कि अमेरिका के पास अब भी कई विकल्प मौजूद हैं. इससे ट्रंप संभावित हमले को निर्णायक आख़िरी वार के तौर पर पेश करके युद्ध ख़त्म करने का एलान भी कर सकते हैं.

लेकिन ज़मीन के ऊपर किसी ठिकाने को तबाह करना और ज़मीन के भीतर मौजूद क्षमताओं को पूरी तरह ख़त्म करना अलग-अलग बात है.

किसी परमाणु ठिकाने को बड़े पैमाने पर नुक़सान पहुंचने के बावजूद ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी, उपकरण या सामग्री अपने आप ख़त्म नहीं हो जाएगी.

इस धमकी का समय भी अहम है. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिकी सैन्य योजनाकारों ने नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले या बाद में दोबारा हमले के विकल्पों पर विचार किया है. वहीं, ट्रंप सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि वह चुनाव से पहले कोई और हमला नहीं करेंगे.

इसलिए इस धमकी के एक साथ कई मक़सद हो सकते हैं. ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखना, अमेरिका के लोगों को यह संदेश देना कि सरकार अपने रुख़ पर मज़बूती से कायम है और किसी हमले का फ़ैसला किए बिना आगे की सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखना.

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ईरान का सैन्य नेतृत्व बार-बार कहता रहा है कि वह दोबारा संघर्ष की स्थिति के लिए तैयार है. इस्लामिक रिवॉल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के डिप्टी कमांडर मेजर जनरल मुस्तफ़ा इज़ादी ने 15 अक्तूबर को कहा कि ईरान की सेना ज़मीन, समुद्र और हवा में किसी भी दुश्मन का मुक़ाबला करने के लिए तैयार है.

इस तरह के बयान दिखाते हैं कि ईरान सार्वजनिक तौर पर दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है. हालांकि, इनसे यह साफ़ नहीं होता कि एमओएबी से हमला होने पर ईरान किस तरह जवाब देगा.

ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे या किसी संवेदनशील परमाणु ठिकाने पर हमला जवाबी कार्रवाई का ख़तरा बढ़ा सकता है. इससे जहाज़ों की आवाजाही को ख़तरा पैदा होने और पूरे क्षेत्र में हालात और बिगड़ने की आशंका भी है.

ट्रंप की मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स (एमओएबी) से हमले की धमकी पर ईरान के अधिकारियों और टिप्पणीकारों ने अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया दी है. कुछ ने कड़ा रुख़ दिखाया है, कुछ ने इसका मज़ाक उड़ाया है, जबकि कुछ ने नए अमेरिकी हमले के नतीजों को लेकर चेतावनी दी है.

कट्टरपंथी सांसद और संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अज़ीज़ी ने इस बात को ख़ारिज किया कि इस हथियार से ईरान को डराया जा सकता है.

उन्होंने 16 अक्तूबर को संसद की समाचार एजेंसी आईसीएएनए को दिए इंटरव्यू में कहा, "आज तक ऐसा कोई पैदा नहीं हुआ, जो सभ्यता, इतिहास और प्राचीन विरासत वाले एक महान देश को 'मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स' नाम के बम से धमका सके."

ईरान के सरकारी टेलीविज़न पर आने वाले कट्टरपंथी विश्लेषक हसन खोशचश्म ने ट्रंप की नई चेतावनी से पहले एक टॉक शो में इससे भी तीखी बात कही थी. उन्होंने कहा, "अगर अमेरिका के पास मदर ऑफ़ बॉम्ब्स है, तो हमारे पास फ़ादर ऑफ़ बॉम्ब्स है." हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ईरान के पास मौजूद जिन हथियारों की वह बात कर रहे थे, वे कौन से हैं.

इसी तरह आईआरजीसी समर्थक टेलीग्राम चैनल नेज़ामितरीन ने भी एमओएबी की धमकी को कम करके पेश किया. चैनल ने अपने दर्शकों को याद दिलाया कि जून 2025 में ईरान के फ़ोर्दो परमाणु ठिकाने पर हमले के दौरान अमेरिका इससे भी ज़्यादा शक्तिशाली बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल कर चुका है.

पोस्ट में कहा गया, "इसमें कुछ नया नहीं है, लेकिन इस बार हमारा जवाब अलग होगा."

कट्टरपंथी पत्रकार अब्दुल्लाह गंजी ने एक्स पर लिखा, "अमेरिका लोगों की जान को निशाना बनाने के अलावा कुछ नहीं कर सकता. ऐसी कार्रवाई से उसे कोई जीत हासिल नहीं होगी और दुनिया की नज़र में यह नैतिक रूप से निंदनीय होगा."

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने अपने परमाणु और मिसाइल ठिकानों को इस तरह के हमलों के लिए तैयार कर रखा है.

इन बयानों से सत्ता समर्थक आवाज़ों की यह कोशिश दिखाई देती है कि इस धमकी को मनोवैज्ञानिक दबाव के तौर पर पेश किया जाए.

साथ ही वे यह भरोसा भी जता रहे हैं कि ईरान एमओएबी के हमले का सामना कर सकता है और इस तरह के हमले से कोई निर्णायक नतीजा हासिल नहीं होगा.

हालांकि, कुछ लोगों ने इस हथियार की विनाशकारी ताक़त को लेकर भी चेतावनी दी है.

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची से अपील की कि किसी हमले से मानवीय तबाही की स्थिति पैदा होने से पहले तुरंत कूटनीतिक पहल की जाए.

पूर्व सांसद हेशमतुल्लाह फ़लाहतपिशेह ने ख़ास तौर पर इससे लोगों और अर्थव्यवस्था को होने वाले संभावित नुक़सान पर ध्यान दिलाया है. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में ज़मीन के भीतर बने ठिकानों पर शक्तिशाली हमले के नतीजों को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि इससे होने वाली तबाही सिर्फ़ ज़मीन के नीचे तक सीमित नहीं रहेगी.

फ़लाहतपिशेह ने चेतावनी दी कि ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को नुक़सान और आम लोगों की मौत के ऐसे नतीजे हो सकते हैं, जिन्हें नियंत्रित करना मुश्किल होगा. उन्होंने ईरान के प्रतिनिधियों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग करने और जिनेवा कन्वेंशन लागू करने की अपील करने को कहा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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• बॉलीवुड पर अंडरवर्ल्ड का दखल: टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग सहित कई हाई‑प्रोफ़ाइल हमले • शुक्लागंज में दुर्गा मूर्ति विसर्जन के दौरान गंगा में पलटी नाव, सात सवार बचे • युवा कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के चेहरे वाला रावण पुतला जलाया, इस्तीफे की मांग • नौ दिन व्रत के बाद तनु ने चाऊमीन‑आइसक्रीम से व्रत खोला, उल्टी से बेहोशी और मृत्यु • सिट ने रेखा आर्या के बयान दर्ज किए, बरेली से ऑडियो भी कब्जे में • ‘हमारे संघर्ष को अपमानित किया’: देवेंद्र प्रताप के पत्र से गरमाई एमएलसी चुनाव की सियासत, सपा क्यों हो रही गदगद • सोने का भाव 1.5 लाख रुपये/10ग्राम पार, त्योहारी मांग से मिली बढ़ोतरी • सीवान के मार्केट में भीषण आग: एसी दुकान में धमाकों से मची अफरा-तफरी, दमकल का पानी खत्म होने से बढ़ी परेशानी • आर्मी अफसर की पानी में डूबी कार पर फिर से खराबी: उपभोक्ता कोर्ट ने मुफ्त मरम्मत और मुआवजा दिया • फीफा के शांति पुरस्कार की समीक्षा: ट्रम्प को मिला पहला सम्मान, अब क्या होगा? • यूपीएससी सीडीएस 2 2026: लिखित परीक्षा का परिणाम जारी, साक्षात्कार के लिए 8956 का हुआ चयन, आगे क्या करना होगा? • मां विंध्यवासिनी के दर्शन की आस में निकले श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत, ट्रक की टक्कर से दो की गई जान • सऊदी में दो बांग्लादेशी नागरिकों पर मौत की सजा, बांग्लादेश ने कूटनीतिक संकट जताया • BJP के बागी MLC देवेंद्र प्रताप ने SP के उम्मीदवार संजयन त्रिपाठी को समर्थन दिया • मणिपुर में तीन घटनाओं में 7 लोगों की मौत, सीआरपीएफ के तीन जवान घायल • इन 5 खुशबूदार बेलों से बनाएं अपनी बालकनी को महकदार गार्डन • दशहरे के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी: कई जगह रूट डायवर्ट तो कहीं कड़ी पाबंदी; पूर्वी दिल्ली वाले अपडेट होकर निकलें • रेलवे ने ट्रेनों में मोबाइल पर तेज आवाज के लिए जुर्माना व जेल का प्रावधान किया • भोपाल में 8 लोगों का अपहरण, दो युवतियों समेत • दिल्ली के दशहरे में रावण दहन के साथ सामाजिक‑पर्यावरणीय संदेशों का नया रूप • रसड़ा में विकास की उपलब्धियाँ • आजम खां से रामपुर जेल मिलने जाएंगे अखिलेश यादव, विधानसभा चुनावों को लेकर चर्चा के लग रहे कयास • लकड़ी की प्रतिमा, लेकिन जोड़ का नामोनिशान नहीं, छपरा की काठ वाली देवी की अनोखी मान्यता • बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड की पहली झलक: 1982 में प्रोड्यूसर मुशीर आलम की पठान गैंग द्वारा किडनैपिंग • यमुना एक्सप्रेसवे पर बस का टक्कर, एक महिला की मौत, छह घायल • कॉमन सेंस नाम की चीज नहीं है, बेवकूफ...' भीड़ को रोक रही पुलिस पर क्यों भड़के सीएम सम्राट चौधरी? • राजद विधायक के ममेरे भाई की हत्या का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार • फैजू ने दुल्हन का लहंगा संभालते हुए सुर्ख लाल जोड़े में राजकुमार‑राजकुमारी बनकर छाए • नवरात्र में उमड़ती है भीड़, लेकिन मंदिर परिसर में गड्ढे; आखिर कब बदलेगी तस्वीर? • लॉरेंस बिश्नोई की पूछताछ में कानूनी जटिलताएँ, टाइगर श्रॉफ केस में मुंबई पुलिस की रणनीति • उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सुनी शिकायतें, दी निर्देश • बिग बॉस 20 में स्काउट‑लव गिल की नजदीकियों पर फैंस में उफान, सोशल मीडिया पर सवाल • अमेरिका ने ईरान को जिस 'मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स' की धमकी दी, वो कितना ख़तरनाक है? • कोर्ट ने CJP नेताओं की हिरासत बढ़ाई, बांड उल्लंघन और जमानतदारों पर सवाल • दादा ने 1917 में ब्रिटिश सरकार को 35,000 रुपये का कर्ज दिया, परिवार का दावा जारी • अभिजीत दिपके ने शेयर किया आशु‑सौरव की कहानी: लंदन की हाई‑पेड नौकरी छोड़ देश के लिए संघर्ष • मंडे टेस्ट में पास या फेल 'जेलर 2'? थलाइवा की फिल्म के आगे विजय-रश्मिका की 'रणबाली' ने इतने कमाए • दलित दंपती के शव मिलें, हत्या की आशंका; पुलिस ने जंगली जानवर पर शक जताया • जोर से बात, तो जेल! नया नियम • भारत को अराजकता से बचाएं': 402 भारतीयों का संयुक्त बयान, सांविधानिक संस्थाओं को लेकर क्या चिंता जताई? • बॉलीवुड पर अंडरवर्ल्ड का दखल: टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग सहित कई हाई‑प्रोफ़ाइल हमले • शुक्लागंज में दुर्गा मूर्ति विसर्जन के दौरान गंगा में पलटी नाव, सात सवार बचे • युवा कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के चेहरे वाला रावण पुतला जलाया, इस्तीफे की मांग • नौ दिन व्रत के बाद तनु ने चाऊमीन‑आइसक्रीम से व्रत खोला, उल्टी से बेहोशी और मृत्यु • सिट ने रेखा आर्या के बयान दर्ज किए, बरेली से ऑडियो भी कब्जे में • ‘हमारे संघर्ष को अपमानित किया’: देवेंद्र प्रताप के पत्र से गरमाई एमएलसी चुनाव की सियासत, सपा क्यों हो रही गदगद • सोने का भाव 1.5 लाख रुपये/10ग्राम पार, त्योहारी मांग से मिली बढ़ोतरी • सीवान के मार्केट में भीषण आग: एसी दुकान में धमाकों से मची अफरा-तफरी, दमकल का पानी खत्म होने से बढ़ी परेशानी • आर्मी अफसर की पानी में डूबी कार पर फिर से खराबी: उपभोक्ता कोर्ट ने मुफ्त मरम्मत और मुआवजा दिया • फीफा के शांति पुरस्कार की समीक्षा: ट्रम्प को मिला पहला सम्मान, अब क्या होगा? • यूपीएससी सीडीएस 2 2026: लिखित परीक्षा का परिणाम जारी, साक्षात्कार के लिए 8956 का हुआ चयन, आगे क्या करना होगा? •