पेट्रोल में एथनॉल मिलाए जाने को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। इस माहौल के बीच आने वाले वक्त में आम जनता को पेट्रोल और डीजल के दाम पर झटका लग सकता है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रहता है तो भारत में पेट्र्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए जा सकते हैं। मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़कर 95-100 डॉलर प्रति बैरल या इससे ऊपर बनी रहती हैं तो तेल कंपनियों और सरकार को पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम है।
मनीकंट्रोल की एक खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सरकारी तेल कंपनियां यानी इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम करीब 85-90 डॉलर प्रति बैरल के कच्चे तेल भाव पर लगभग ब्रेक-ईवन स्थिति में काम कर सकती हैं। ऐसे में मौजूदा स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की जरूरत नहीं दिख रही है। बता दें कि 2 सितंबर की कच्चे तेल की कीमत लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी, जो पिछले दो दिनों में 4 डॉलर से अधिक बढ़ी है।
मई के महीने में भी ऐसे हालात बने थे तो तेल कंपनियों ने चार साल बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। यह बढ़ोतरी लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर की की गई थी। तब अमेरिका ईरान युद्ध के कारण कीमतों में 100 डॉलर से ऊपर पहुंचने पर भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 106.23 डॉलर प्रति बैरल थी।
ICRA के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और को-ग्रुप हेड प्रशांत वशिष्ठ के मुताबिक, अपनी रिफाइनरियों में तैयार किए गए डीजल के मामले में तेल कंपनियां 85-90 डॉलर प्रति बैरल के कच्चे तेल भाव पर ब्रेक-ईवन हासिल कर सकती हैं। हालांकि, स्वतंत्र रिफाइनरियों से डीजल खरीदने पर कुछ नुकसान हो सकता है। वर्तमान में ICRA की गणना के अनुसार, पेट्रोल की बिक्री पर तेल कंपनियों का मार्केटिंग मार्जिन 5 रुपये प्रति लीटर है जबकि डीजल पर 15 रुपये लीटर का निगेटिव मार्केटिंग मार्जिन है।
एक्सपर्ट का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो तेल कंपनियों को खुदरा ईंधन की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। ये इसलिए भी क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें कंपनियों के नुकसान को काफी बढ़ा सकती हैं।
पेट्रोल में एथनॉल मिलाए जाने को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। इस माहौल के बीच आने वाले वक्त में आम जनता को पेट्रोल और डीजल के दाम पर झटका लग सकता है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रहता है तो भारत में पेट्र्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए जा सकते हैं। मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़कर 95-100 डॉलर प्रति बैरल या इससे ऊपर बनी रहती हैं तो तेल कंपनियों और सरकार को पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम है।
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