इमेज स्रोत, Getty Images
साल 2025 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट आई, जिसमें कहा गया कि साल 2022 में पूरी दुनिया में हर 8 में से 1 व्यक्ति मोटापे से जूझ रहा था.
दुनिया भर में मोटापा एक ऐसी समस्या बन गया है, जो हमारी ज़िंदगी में कई गंभीर बीमारियों को दावत दे रहा है.
ऐसे में मोटापे को जड़ से खत्म करने के लिए क्या किया जाए और आप अपनी ज़िंदगी में ऐसे कौन से बदलाव कर सकते हैं, जिनसे मोटापे जैसी समस्या को शुरू होने से पहले ही रोका जा सके.
मोटापे जैसी गंभीर समस्या से जुड़े अहम सवालों के जवाब जानने के लिए हमने दिल्ली के फ़ोर्टिस अस्पताल में ओबेसिटी विभाग की प्रमुख डॉ. मुग्धा से बातचीत की.
इमेज स्रोत, Getty Images
बच्चों में आज के समय में मोटापे का सबसे बड़ा कारण है स्क्रीन. जब बच्चे घंटों तक मोबाइल, टीवी और लैपटॉप देखते हैं तो उनकी शारीरिक गतिविधि बहुत कम हो जाती है.
बच्चे जब स्क्रीन देखते हैं और कुछ न कुछ खाते रहते हैं, इससे उनके शरीर में ज़रूरत से ज़्यादा कैलोरी जाती है, जो मोटापे का एक मुख्य कारण बनती है.
बच्चों में शारीरिक रूप से दोस्तों से मिलने की जगह ऑनलाइन बात करने का चलन बढ़ रहा है, जो मोटापे जैसी समस्या के कारणों में से एक है. एक तथ्य यह भी है कि यदि बच्चा अपने शुरुआती 5 वर्षों में मोटापे का शिकार हो गया, तो बड़े होकर उसके मोटे होने की 70 से 80 प्रतिशत संभावना है.
माता-पिता बच्चों की आदतों में सुधार कैसे ला सकते हैं, खाने-पीने की चीज़ों में किस तरह के बदलाव कर सकते हैं?
यह बहुत ज़रूरी है कि माता-पिता पहले खुद हेल्दी खाना खाएं. यदि वो हेल्दी खाना खाएंगे तो बच्चे भी उन्हें देखकर उनका अनुसरण करेंगे. बच्चों को अधिक से अधिक बाहर के खाने से दूर रखें. सप्ताह में एक बार से अधिक बाहर का खाना न दें. स्कूलों में भी शिक्षकों की यह ज़िम्मेदारी है कि वे बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करें. स्कूल की कैंटीनों में तले हुए खाद्य पदार्थों की जगह स्वस्थ भोजन मिलना चाहिए और डिब्बाबंद जूस की जगह नींबू पानी मिलना चाहिए. इन सभी बदलावों के साथ बच्चों को मोटापे जैसी समस्या से बचाया जा सकता है.
बच्चों के खाने की प्लेट कैसी होनी चाहिए?
जो बच्चे 5 साल से बड़े हैं, उनकी खाने की प्लेट में सलाद, प्रोटीन (चिकन, पनीर, अंडे), सब्ज़ी और रोटी होनी चाहिए. फल और लस्सी जैसी चीज़ों को बच्चे की डाइट में शामिल करना चाहिए. मैदा और मीठी चीज़ों को बच्चे की डाइट से हटाना चाहिए.
इमेज स्रोत, Getty Images
यदि आपको गंभीर स्तर का मोटापा है, तो आपकी उम्र 10 से 20 साल तक कम हो सकती है. यदि कोई व्यक्ति 5 प्रतिशत तक भी वजन कम करता है, तो भी कई समस्याओं को दूर किया जा सकता है.
मान लीजिए किसी का वजन 100 किलोग्राम है और उसने अपना वजन घटाकर 95 किलोग्राम कर लिया, तो इससे भी उसका ब्लड प्रेशर और शुगर नियंत्रित होंगे. यदि 10 प्रतिशत वजन कम किया, मान लीजिए 100 से 90 किलोग्राम कर लिया, तो सोते समय जो आपको सांस लेने में तकलीफ होती है, वह कम हो जाती है.
यदि आपका वजन 15 से 20 प्रतिशत तक कम हो गया, तो कई बीमारियां ठीक हो सकती हैं. हृदय रोग का जोखिम कम हो सकता है, फैटी लिवर ठीक हो सकता है और आप हार्ट अटैक जैसी बीमारियों से बच सकते हैं.
इमेज स्रोत, Getty Images
मोटापे को लेकर लोगों के बीच सबसे आम धारणा यह है कि मोटापे का संबंध केवल खान-पान और कैलोरी इन तथा कैलोरी आउट से ही है. यह कुछ हद तक सही है, लेकिन पूरी तरह सच नहीं है. जेनेटिक्स की भी इसमें बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है. हार्मोन्स का भी इससे एक अहम संबंध है.
जेनेटिक्स भी मोटापे के लिए कैसे ज़िम्मेदार हैं?
यदि आपके माता-पिता दोनों मोटापे से जूझ रहे हैं, तो आपके मोटापे का शिकार होने की संभावना 70 से 80 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. यदि आपके माता और पिता दोनों में से कोई एक मोटापे से जूझ रहा है, तो आपके मोटापे का शिकार होने की 50 प्रतिशत संभावना होती है.
लेकिन यह आपके हाथ में भी होता है. यदि आपको यह पता हो कि आपके जीन्स से आपको ये बीमारियाँ मिल सकती हैं, तो आप शुरुआत से ही सतर्क रहें. यदि आप ज़रूरी कदम उठाते हैं, तो यह आवश्यक नहीं है कि आपको भी वे बीमारियाँ हों. आप उनसे बच सकते हैं.
देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.
सबसे पहले हार्मोनल स्तर की जांच करवानी चाहिए. यदि फेमिली हिस्ट्री रही है, तो 30 साल की उम्र के बाद नियमित जांच करवानी चाहिए. अपनी ज़िंदगी में कई तरह के बदलाव करने चाहिए.
अच्छा खान-पान, कम से कम एक घंटे का व्यायाम और 7 से 8 घंटे की नींद आपको मोटापे और इसके कारण होने वाली बीमारियों से बचा सकती है.
मोटापे के लक्षण क्या हैं, किसी व्यक्ति को कैसे पता चले कि वह मोटापे से जूझ रहा है?
सीढ़ियां चढ़ते समय आपकी सांस फूल रही है, घुटनों में दर्द हो रहा है, टांगों में दर्द हो रहा है और आप जल्दी थक जाते हैं. आपको अपने वज़न को लेकर सतर्क रहना चाहिए कि कहीं आपका वज़न तो नहीं बढ़ रहा.
ये सभी शुरुआती लक्षण होते हैं. यदि आपने ज़्यादा वज़न की अवस्था में ही इस पर नियंत्रण नहीं पाया, तो आपको पता भी नहीं चलेगा कि आप कब मोटापे का शिकार हो गए.
मोटापा किन गंभीर बीमारियों का कारण बनता है?
मोटापा सभी बीमारियों की जननी है. यदि आपको मोटापा है, तो हार्ट अटैक, हार्ट स्ट्रोक और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के होने की संभावना दोगुनी हो जाती है.
यदि मेटाबोलिक बीमारियों की बात की जाए, तो डायबिटीज, हाइपोथायरॉइड, हाई कोलेस्ट्रॉल, मेटाबोलिक सिंड्रोम और पीसीओडी जैसी बीमारियों की आशंका बनी रहती है.
कई प्रकार के कैंसर मोटापे से जुड़े हुए हैं. एंडोमेट्रियल कैंसर, कोलन कैंसर, गॉलब्लैडर कैंसर... ये सभी मोटापे से जुड़े हुए हैं. मोटापे के कारण कई लोगों में किडनी डिसफंक्शन हो जाता है, दिमाग में सूजन आ जाती है.
यदि देखा जाए, तो मोटापे से लगभग 200 तरह की समस्याएं जुड़ी हुई हैं, जो बहुत गंभीर हैं और हम इसे बहुत हल्के में ले लेते हैं. लेकिन वास्तव में मोटापा आपको कई तरह की बीमारियां देता है.
इमेज स्रोत, Getty Images
मोटापा ठीक करने के तीन तरीके हैं. पहला है डाइट और व्यायाम. मोटापा घटाने में डाइट का 70 से 80 प्रतिशत और व्यायाम का 20 से 30 प्रतिशत योगदान होता है.
लेकिन इसके साथ हार्मोनल बदलाव और मेडिकल डिसऑर्डर्स की भी अहम भूमिका होती है और इसका इलाज करवाने के लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
डाइट भी आपको सोशल मीडिया देखकर फॉलो नहीं करनी चाहिए. वहां सभी सलाह व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामान्य होती हैं, जो सही तरीके से काम नहीं करतीं. इसके लिए आपको किसी विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए.
खाने-पीने की आदतों में किस तरह का बदलाव करना चाहिए?
गाइडलाइंस कहती हैं कि मेडिटेरेनियन डाइट अपनानी चाहिए. जैसे खाने में फाइबर होना चाहिए, सब्जियों और फलों में फाइबर होता है.
प्रोटीन ज़्यादा लें (जैसे दाल, चिकन, अंडे, मछली और ड्राई फ्रूट्स), लेकिन रेड मीट खाने से परहेज़ करना चाहिए. पोर्शन का भी ध्यान रखना चाहिए कि आप कितना खा रहे हैं.
शारीरिक व्यायाम भी ज़रूर करें. सिर्फ़ कार्डियो (जैसे साइक्लिंग, ट्रेडमिल या सैर) ही नहीं, बल्कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी बहुत ज़रूरी है.
जो लोग जिम नहीं जा सकते, वे घर पर ही योग कर सकते हैं. सूर्य नमस्कार, वॉल पुश-अप्स, सिट-अप्स, बिना सहारे उठक-बैठक करना, प्लैंक करना, ये सभी व्यायाम बहुत मदद करते हैं.
जब आप बहुत कम कैलोरी लेते हैं, तो शरीर स्टार्वेशन मोड (भुखमरी) में चला जाता है. फिर इस तरह के एंज़ाइम बनने लगते हैं, जो शरीर के लिए अच्छे नहीं होते.
इससे वसा जमा होने लगती है और मांसपेशियां कम होने लगती हैं. मांसपेशियां हमारे शरीर के लिए बहुत ज़रूरी होती हैं.
जब आप वजन घटाने के लिए क्रैश डाइट करते हैं, तो इससे पित्त की पथरी, मांसपेशियों का कमज़ोर होना जैसी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
जब आप इस डाइट को छोड़ेंगे और सामान्य डाइट पर वापस आएंगे, तो आपको महसूस होगा कि आपका वजन पहले की तुलना में और बढ़ गया है.
इमेज स्रोत, Getty Images
मोटापे से जूझ रहे बहुत से लोगों को स्कूलों, कॉलेजों, दफ्तरों और अन्य जगहों पर बॉडी शेमिंग का सामना करना पड़ता है, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है.
कई लोग डिप्रेशन का भी शिकार हो जाते हैं. डिप्रेशन के कारण कई लोग ज़्यादा खाना खाने लगते हैं और एक दुष्चक्र बन जाता है, जिससे मोटापा और बढ़ जाता है.
मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए आपका क्या संदेश है?
मोटापे को सिर्फ़ खाने और आलस्य से जोड़कर न देखें. यह समझें कि मोटापा भी एक बीमारी है, ठीक उसी तरह जैसे थायरॉयड, बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल.
यदि आप मोटापे से जूझ रहे हैं, तो डॉक्टर से सहायता लें. खुद से इलाज की कोशिश न करें.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
शॉर्ट वीडियो का अंत
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
© 2026 BBC. बाहरी साइटों की सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है. बाहरी साइटों का लिंक देने की हमारी नीति के बारे में पढ़ें.
Comments ()
Be the first to share your perspective on this story!