एनडीए में दलित आरक्षण में क्रीमी लेयर के मुद्दे पर झगड़ा बढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने नरेंद्र मोदी कैबिनेट में अपने सहयोगी जीतनराम मांझी का इस्तीफा मांग लिया है। उन्होंने मांझी के बेटे एवं बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन को भी कुर्सी छोड़ने को कहा है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग ने शनिवार को कहा कि हिंदुस्तान आवामी मोर्चा (HAM) के सुप्रीमो मांझी दलित आरक्षण में सब-कैटगराइजेशन की बात रहे हैं, तो सबसे पहले वह खुद और उनके बेटे मंत्री पद छोड़ें।
चिराग पासवान ने शनिवार को पटना में मीडिया से बातचीत में कहा कि अनुसूचित वर्ग की सभी जातियां एकजुट हैं, तभी ताकत बनी हुई है। अगर इसमें बंटवारा हुआ तो आरक्षण समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जब दलित और महादलित का बंटवारा करने की कोशिश हुई थी, तब भी उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी। लोजपा-आर दलित आरक्षण में सब-कोटा के सख्त खिलाफ है।
चिराग ने एससी आरक्षण में क्रीमी लेयर को संविधान के विरूद्ध बताया। उन्होंने कहा कि दलितों को सामाजिक और छूआछूत के आधार पर आरक्षण मिला हुआ है। संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि यह आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए।
चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी पर पलटवार करते हुए कहा, “अगर वह चाहते हैं कि आरक्षण में क्रीमी लेयर होनी चाहिए, तो सबसे पहले वह खुद इस्तीफा दें। उनके बेटे भी बिहार सरकार में मंत्री पद छोड़ें। फिर सदन के पटल पर इस पर चर्चा करवाएं। संविधान बदलना है तो सदन में ही चर्चा होनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि अगर एससी आरक्षण में सब-कोटा, क्रीमी लेयर का कॉन्सेप्ट आ गया, तो सामाजिक न्याय की लड़ाई के मायने खत्म हो जाएंगे। फिर किसी दलित को घोड़ी चढ़ने से रोका जाएगा। बारात निकालने से रोका जाएगा। यहां तक कि मंदिर में जाने से भी रोका जाएगा।
चिराग ने कहा कि उदाहरण हमारे सामने हैं। देश की राष्ट्रपति तक को मंदिर के अंदर नहीं जाने दिया गया। खुद मांझी के साथ ऐसी घटना हो चुकी है, जब वो मुख्यमंत्री थे। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ भी ऐसा हुआ था। फिर भी मांझी को क्रीमी लेयर चाहिए तो वह फिर वह मंत्री पद से इस्तीफा दे दें।
एक दिन पहले केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के बेटे संतोष सुमन ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग की थी। संतोष हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार में लघु जल संसाधन मंत्री हैं। उन्होंने कहा कि वह एससी-एसटी आरक्षण में सब-कैटगराइजेशन लागू करने के पक्ष में हैं। इसका मतलब आरक्षण खत्म करना नहीं है। बल्कि आरक्षण का लाभ किस समुदाय तक कितना पहुंचा, इसका मूल्यांकन होना चाहिए।
संतोष सुमन ने कहा कि बिहार में एससी वर्ग में कई ऐसी जातियां हैं जो आज भी अत्यधिक पिछड़ी हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि दलित आरक्षण का लाभ पासवान और रविदास जैसी कुछ एक जातियों तक सीमित है, जबकि अन्य जातियां अब भी बहुत पीछे हैं। मुसहर समाज से एक भी आईएएस नहीं बन पाया है।
दरअसल, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर स्पष्ट किया कि एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू नहीं होता। संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। क्रीमी लेयर की अवधारणा सिर्फ ओबीसी आरक्षण से जुड़ी हुई है। दरअसल, शीर्ष अदालत में जनहित याचिका दायर कर एससी-एसटी आरक्षण में सब-कैटगरी (उप श्रेणी) बनाकर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नौकरी और एडमिशन में प्राथमिकता देने की मांग की गई थी। इन्हीं याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा था।
केंद्र का हलफनामा आने के बाद इस पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई। एनडीए में बिहार को दो पार्टियां लोजपा-आर और हम आमने-सामने हो गई है। लोजपा-आर के प्रमुख चिराग पासवान दलित वर्ग से आते हैं। वहीं, हम सुप्रीमो जीतनराम मांझी मुसहर जाति से आते हैं, जो महादलित हैं। दलित आरक्षण में सब-कोटा पर एनडीए में तनातनी और बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं।
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