बिहार में फर्जी आधार बनाने के लिए चीनी ऐप और अवैध वेबसाइटों का इस्तेमाल करते हुए 71 लोगों को गिरफ्तार किया गया, 44 केस दर्ज, 23 जिलों में जांच जारी।
गृह मंत्रालय ने बताया कि फर्जी आधार का प्रयोग घुसपैठियों को भारतीय पहचान दिलाने के लिए किया जा रहा है, जिससे सीमा सुरक्षा पर खतरा पैदा हो रहा है।
साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई ने राज्यभर में फर्जी पहचान पत्र व दस्तावेज बनाने के 815 मामलों को चिह्नित करते हुए 416 मामलों का सत्यापन कराया है।
इन जांचों के आधार पर 23 जिलों में 44 प्राथमिकी दर्ज हुई और 71 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।
सारण, सहरसा, सुपौल, नालंदा, मधुबनी, सीतामढ़ी, गया जी और मुजफ्फरपुर में सबसे अधिक मामले पाए गए।
सारण में सात मामलों में आठ अभियुक्त गिरफ्तार किए गए। मुजफ्फरपुर में तीन मामले पकड़े गए, जिनमें से एक पर अपील के बाद पटना हाईकोर्ट ने पुलिस से साक्ष्यों का रिकॉर्ड मांगा।
मुजफ्फरपुर पुलिस ने 7 मई को औराई के धरहरवा गांव निवासी साइबर कैफे संचालक शिवम व राजू कुमार तथा सीतामढ़ी के श्रीखंडी निवासी अनुरा झा को गिरफ्तार किया। 10 मई को सरैया थाना क्षेत्र के विपिन कुमार को पकड़ा गया।
गिरफ्तार चार आरोपितों में से तीन पर पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है। मास्टरमाइंड अभी भी गिरफ्त से बाहर है।
विपिन की जमानत याचिका पर गत मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस से केस की जांच से संबंधित रिकॉर्ड मांगा है। मामले में चार सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।
कुछ ऑनलाइन वेबसाइटों का दुरुपयोग कर फर्जी आधार व अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज बनाने के मामलों में कार्रवाई की गई है।
जांच में पता चला कि फर्जी दस्तावेज pisprintxdz, baba rtpdxdz और rajmistri shop नामक वेबसाइटों से तैयार किये गए। कार्रवाई के बाद कुछ दिनों तक ऐसे वेबसाइटों का इस्तेमाल बंद हो गया।
आरोपी लोग अपने असली दस्तावेज या कॉपी लेकर दूसरे व्यक्तियों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करते हैं। फर्जी पहचान पत्र का इस्तेमाल घुसपैठियों को स्थापित करने के साथ ही सिम कार्ड लेने, फर्जी या म्यूल बैंक खाता खोलने, केवाईसी प्रक्रिया का दुरुपयोग करने तथा अन्य साइबर एवं वित्तीय अपराधों में किया जा रहा है।
सावधानी के तौर पर: आधार, जन्म प्रमाण पत्र, पैन अथवा अन्य पहचान दस्तावेजों की प्रति अनजान व्यक्ति, दुकान या अविश्वसनीय ऑनलाइन वेबसाइट को न दें। किसी सरकारी योजना, सिम, लोन, केवाईसी के नाम पर दस्तावेज मांगे जाने पर संबंधित संस्था की प्रमाणिकता जरूर सत्यापित कर लें। आधार की छायाप्रति दे रहे तो उस पर उद्देश्य और तारीख लिखें, ताकि उसका अन्य प्रयोजन में उपयोग न हो सके। अपने आधार बायोमेट्रिक्स को आधार वेबसाइट अथवा एमआधार एप के माध्यम से लॉक रखें। संदिग्ध गतिविधि का संदेह होने पर आधार ऑथेंटिकेशन इतिहास की जांच करें। तत्काल 1930 पर संपर्क करें।
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