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इंडोनेशिया में 1,273 मीटर ऊंचे ज्वालामुखी माउंट दुकोनो पर चढ़ते समय कंटेंट क्रिएटर जोनाथन ले ब्लांक अपने पैरों के नीचे धरती को हिलता हुआ महसूस कर सकते थे.
शिखर पर क्रेटर के किनारे से नीचे देखते हुए, उनका कैमरा बेहद गर्म गैस और राख के गुबारों को हवा में ऊंचाई तक निकलते हुए कैद करता है.
अचानक, वह अपना मुंह ढक लेते हैं और पहाड़ से नीचे तेजी से उतरने लगते हैं.
"ज़हरीली गैस है, इसलिए हमें अभी भागना होगा," वह कैमरे में कहते हैं. नीचे उतरते समय उनके पैर फिसल रहे हैं और वह तेजी से पहाड़ से नीचे जा रहे हैं.
कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया के शौकीनों के लिए ज्वालामुखी शानदार जगहें हो सकती हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि रोमांच के कुछ शौकीन, चेतावनियों को नज़रअंदाज़ कर नियम तोड़ रहे हैं, जिसके घातक नतीजे सामने आ रहे हैं.
वीडियो कॉल पर ले ब्लांक कहते हैं, "वीडियो के लिए ज्वालामुखी बेहद आकर्षक हो सकते हैं, क्योंकि यह ऐसी चीज है जिसे बहुत से लोग नहीं देख पाते."
वह कहते हैं, "ऐसा लगता है जैसे आप किसी फ़िल्म में हैं, जो एक ख़तरनाक जगह पर चल रही है. मैं समझ सकता हूं कि रोमांच के शौकीन लोग वहां जाना क्यों पसंद करते हैं."
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ले ब्लांक एक ट्रैवल ब्लॉगर हैं. दुनिया भर में दूरदराज़ और मुश्किल पहुंच वाली जगहों से उनके वीडियो को ऑनलाइन हज़ारों व्यूज़ मिलते हैं.
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उन्होंने पिछले साल अप्रैल में माउंट दुकोनो पर चढ़ाई की थी. कुछ महीने पहले इसी जगह पर एक हादसा हुआ था.
मई में क्रेटर तक पैदल जाने के बाद तीन पर्यटकों की मौत हो गई थी. यह घटना उस समय हुई, जब पहाड़ पर चढ़ाई करने पर कुछ हफ़्ते पहले ही रोक लगा दी गई थी.
स्थानीय पुलिस ने कहा कि इस समूह ने चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया था. पुलिस ने यह भी कहा कि "कई (पर्वतारोही) विदेशी पर्यटक हैं, जो सोशल मीडिया कंटेंट बनाना चाहते हैं."
हालांकि, मृत पर्यटकों में से एक की सौतेली बहन ने स्थानीय मीडिया से कहा कि वह सिर्फ़ सोशल मीडिया के लिए तस्वीरें लेने के मक़सद से इस यात्रा पर नहीं गया था, बल्कि इसलिए गया था क्योंकि उसे कुदरत से प्यार था.
ले ब्लांक कहते हैं कि वह हमेशा स्थानीय नियमों का पालन करते हैं और स्थानीय गाइड से कभी ऐसे इलाक़ों में ले जाने के लिए नहीं कहते, जहां जाने में वे सहज महसूस न करते हों.
वह कहते हैं, "हम सुरक्षा पर बहुत ज़्यादा ध्यान देते हैं और साथ ही इसे एक दिलचस्प वीडियो बनाने के साथ संतुलित करने की कोशिश करते हैं."
लेकिन कुछ लोग इससे भी बड़े जोखिम उठाने को तैयार हैं.
इंडोनेशियन माउंटेन गाइड एसोसिएशन के अनुसार, साल 2022 से इस साल अगस्त तक चढ़ाई वाले इलाक़ों में 116 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें से 27 मौतें ज्वालामुखी विस्फोटों के कारण हुईं.
दूरदराज़ के इलाक़ों में बुनियादी ढांचा सीमित होने के कारण इन आपात स्थितियों में मदद के लिए पहुंचने वाली स्थानीय बचाव टीमों को भी बेहद ख़तरनाक हालात का सामना करना पड़ता है.
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अगाम रिंजानी इस बात से अच्छी तरह वाक़िफ़ हैं कि ज्वालामुखी की यात्रा के दौरान कुछ ग़लत होने पर क्या होता है.
साल 2025 में इस इंडोनेशियाई बचावकर्मी ने एक बेहद मुश्किल अभियान में अपनी जान जोखिम में डालने के बाद ऑनलाइन लोगों का ध्यान खींचा था.
वह 50 लोगों की उस टीम का हिस्सा थे, जो 26 वर्षीय ब्राजीलियाई पर्यटक जुलियाना मारिन्स के शव को निकालने में शामिल थी.
जुलियाना 3,726 मीटर ऊंचे ज्वालामुखी माउंट रिंजानी के क्रेटर में गिर गई थीं. उनकी बहादुरी के लिए ऑनलाइन उनकी तारीफ़ की गई, लेकिन उस अभियान के ख़तरे अब भी उन्हें याद हैं.
वह कहते हैं, "भगवान का शुक्र है कि बचाव अभियान के बाद मैं अभी भी ज़िंदा हूं. मैं ख़ुद से कह रहा था कि मैं अब ऐसा दोबारा नहीं करना चाहता, यह डरावना है. लेकिन उसके बाद मुझे हाल ही में मकास्सर में विमान हादसे के एक व्यक्ति को बचाने के लिए फ़ोन आया और मैं वहां चला गया. वहां न जाना मुश्किल है."
रिंजानी कहते हैं कि कुछ पर्वतारोही बचाव के दौरान भी अपने फ़ोन से वीडियो बनाते रहते हैं. इनमें एक ऐसा व्यक्ति भी था, जो पहाड़ से 200 मीटर नीचे गिर गया था.
वह कहते हैं, "उसने सबसे पहले अपना फ़ोन ढूंढा ताकि रिकॉर्डिंग शुरू कर सके. मैंने कहा, 'नहीं', और उसके शरीर पर बचाव हार्नेस लगा दिया."
उन्हें चिंता है कि बिना पर्याप्त तैयारी के यात्रा करने वाले लोग न सिर्फ़ अपने लिए, बल्कि आपातकालीन बचावकर्मियों के लिए भी जोखिम पैदा करते हैं.
वह कहते हैं, "जब आप सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते हैं, तो इससे आपको, आपके परिवार, आसपास के लोगों, बचाव दल, उनके परिवारों और यहां तक कि अधिकारियों को भी परेशानी हो सकती है. जब कोई हादसा होता है, तो इससे बहुत से लोगों पर भारी बोझ पड़ता है."
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इंडोनेशिया के सेंटर फॉर वोल्केनोलॉजी एंड जियोलॉजिकल हैजर्ड मिटिगेशन की प्रमुख सिती सुमिलाह रीता सुसिलावती भी रिंजानी की चिंताओं से सहमत हैं.
वह चाहती हैं कि कंटेंट क्रिएटर्स ज्वालामुखी पर्यटन को जिम्मेदारी पूर्वक बढ़ावा देने और ख़तरनाक जगहों पर जाने के सुरक्षित तरीकों के बारे में ज़्यादा काम करें, न कि ऐसी ख़तरनाक जगहों तक पहुंच पर रोक लगाने की मांग की जाए, जिन्हें कुछ लोग देखना चाहते हैं.
वह कहती हैं, "हम चाहते हैं कि इन्फ्लुएंसर्स इस बारे में जागरूकता अभियान में मदद करें कि पहाड़ों की खूबसूरती का ज़िम्मेदारी से आनंद कैसे लिया जाए."
वह कहती हैं, "हमें सिर्फ़ अपने लिए ही नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी ज़िम्मेदार होना होगा, जो हमारे काम से प्रभावित होंगे. अगर आप वास्तव में ज्वालामुखी देखने के शौकीन हैं, तो आपको अपनी ज़िम्मेदारियों का पता होना चाहिए."
इंडोनेशिया के द्वीपों पर मौजूद दर्जनों शानदार सक्रिय ज्वालामुखी, देखने की चाहत रखने वाले लोगों को आकर्षित करते रहेंगे.
अधिकारियों के सामने चुनौती यह बनी हुई है कि कंटेंट क्रिएटर्स को सही तस्वीर लेने के लिए इन जगहों तक पहुंच देने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए.
(सिल्वानो हाजिद मौलाना की अतिरिक्त रिपोर्टिंग)
हमने इस लेख का अनुवाद करने में एआई की मदद ली है, जिसे मूल रूप से अंग्रेज़ी में लिखा गया था. बीबीसी के एक पत्रकार ने प्रकाशन से पहले इस अनुवाद की जांच की. हम एआई का उपयोग कैसे कर रहे हैं, इसके बारे में और जानें.
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