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दिवाली के दिन शेयर बाज़ार में सामान्य कारोबार बंद रहता है. इसके बावजूद बाज़ार कुछ समय के लिए खुलता है और लोग शेयर ख़रीदते और बेचते हैं. इस ख़ास सत्र को 'मुहूर्त ट्रेडिंग' कहते हैं.
त्योहार के दिन होने वाला यह क़ारोबार केवल शेयरों की ख़रीद-बिक्री नहीं है. इसके पीछे शुभ समय में नई शुरुआत करने, पूजा करने और नए कारोबारी साल का स्वागत करने की पुरानी परंपरा भी है.
डीआर चोकसी फ़िनसर्व के प्रबंध निदेशक देवेन चोकसी कहते हैं कि इसकी कहानी शुभ मुहूर्त में कुछ नया ख़रीदने की परंपरा से जुड़ी है.
उनके मुताबिक़, दिवाली और धनतेरस पर लोग कोई नई चीज़ ख़रीदकर घर लाते हैं. कुछ लोग किताबें ख़रीदते हैं तो कुछ धातु से बनी चीज़ें.
शेयर बाज़ार से जुड़े लोगों ने इसी सोच को निवेश से जोड़ लिया. वे शुभ समय में शेयर ख़रीदकर नए साल में अपने क़ारोबार और निवेश की शुरुआत करने लगे.
लेकिन शेयर बाज़ार में यह परंपरा कब शुरू हुई? पुराने समय में लोग मुहूर्त ट्रेडिंग कैसे करते थे? और क्या आज भी यह केवल एक रस्म है या इस दौरान असली सौदे होते हैं?
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पुराने समय में दिवाली की तैयारी केवल घरों और दुकानों में नहीं होती थी. शेयर बाज़ार के ब्रोकरों के दफ़्तरों में भी त्योहार की तैयारियां की जाती थीं.
द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, धनतेरस पर ब्रोकर अपने दफ़्तर साफ़ करते थे. चोपड़ी (अकाउंटिंग रजिस्टर) खरीदते और पहले से ऑर्डर की गई सौदा बुक को व्यवस्थित करते थे.
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इसके बाद लक्ष्मी पूजन और 'चोपड़ा पूजन', यानी बहीखातों की पूजा होती थी. आने वाले साल में अच्छा क़ारोबार होने की उम्मीद के साथ यह पूजा की जाती थी.
रिपोर्ट में दलाल एंड ब्रोचा सिक्योरिटीज़ के पुराने ब्रोकर प्रियकांत दलाल के अनुभव भी दर्ज हैं. इसके मुताबिक़, वह 1955 से ऐसे आयोजनों में शामिल होते रहे थे.
उस दौर में कई ब्रोकरों के दफ़्तर बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) के आसपास थे. पूजा के बाद एक-दूसरे के दफ़्तर जाकर शुभकामनाएं देना आसान था. दिवाली के दिन ब्रोकर मुहूर्त ट्रेडिंग के लिए बीएसई के बड़े हॉल में जुटते थे.
दलाल का अनुभव उस दौर की परंपरा समझाता है. हालांकि, उनका 1955 से आयोजनों में शामिल होना उस साल एक्सचेंज में औपचारिक मुहूर्त ट्रेडिंग शुरू होने का प्रमाण नहीं है.
बीएसई के मुताबिक़, दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा 1957 से चली आ रही है.
बीएसई की 2024–25 की सालाना रिपोर्ट में लिखा है कि दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा 1957 से शुरू हुई. रिपोर्ट के पेज 22 पर इसका ज़िक्र है.
निवेशक और ट्रेडर हर्ष वोरा ने भी 26 अक्तूबर 2021 को टिकरटेप पर प्रकाशित अपने लेख में बीएसई में इसकी शुरुआत 1957 में बताई थी.
वोरा ने इसे नए हिंदू वर्ष की शुरुआत से जोड़ा है. उनके मुताबिक़, कई निवेशक नए साल का स्वागत करने के लिए इस सत्र में थोड़े शेयर खरीदते हैं.
हालांकि, बीएसई की सालाना रिपोर्ट यह नहीं बताती कि पहला सत्र किस व्यक्ति ने शुरू कराया था, उसमें पहला सौदा किसने किया या किस कंपनी का शेयर खरीदा गया था.
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देवेन चोकसी के मुताबिक़, ''मुहूर्त ट्रेडिंग के पीछे सोच यह थी कि कोई व्यक्ति जिस काम से जुड़ा है, वह शुभ मुहूर्त में उसी काम के ज़रिए नई शुरुआत करे.''
शेयर बाज़ार से जुड़े लोगों के लिए यह शुरुआत कुछ शेयर ख़रीदकर या कोई छोटा सौदा करके हो सकती थी.
चोकसी बताते हैं कि पुराने समय में लोग इस दिन छोटे और प्रतीक के तौर पर सौदे करते थे. मक़सद बड़ा मुनाफ़ा कमाना नहीं, बल्कि शुभ दिन पर बाज़ार में नई शुरुआत करना था.
वह इसे नए साल की शुरुआत से भी जोड़ते हैं. इसलिए इस दिन बाज़ार में थोड़ा पैसा लगाना शुभ माना जाता है.
वरिष्ठ पत्रकार आलोक जोशी भी मुहूर्त ट्रेडिंग को बाज़ार से जुड़े लोगों की आस्था और पूजा की परंपरा से जोड़ते हैं.
वह कहते हैं कि लक्ष्मी को धन की देवी माना जाता है और बाज़ार में निवेश करने वालों के लिए लक्ष्मी और गणेश आराध्य हैं.
उनके मुताबिक़, दिवाली पर सामान्य क़ारोबार बंद रहता था. ऐसे में लक्ष्मी पूजन के समय थोड़ा कारोबार करके अपने आराध्य को पूजने की परंपरा शुरू हुई.
हालांकि, मुहूर्त में शेयर ख़रीदना निवेशकों की आस्था और बाज़ार की परंपरा का हिस्सा है. इस समय किया गया सौदा मुनाफ़े में बदलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं होती.
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आज मोबाइल फ़ोन या कंप्यूटर पर कुछ ही पलों में शेयर ख़रीदे और बेचे जा सकते हैं. लेकिन मुहूर्त ट्रेडिंग के शुरुआती दिनों में निवेश करना इतना आसान नहीं था.
देवेन चोकसी बताते हैं कि उस समय शेयरों की ख़रीद-बिक्री के ऑर्डर पर्चियों पर लिखे जाते थे.
लोगों के लिए आज की तरह हर दिन निवेश करना आसान नहीं था. इस वजह से मुहूर्त ट्रेडिंग का महत्व कहीं ज़्यादा था.
लोग इस ख़ास मौक़े पर थोड़ा क़ारोबार करते थे और शुभ शुरुआत की परंपरा निभाते थे.
समय के साथ शेयरों की ख़रीद-बिक्री का तरीक़ा बदला और कंप्यूटर के ज़रिए कारोबार शुरू हो गया.
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई में शेयरों का इलेक्ट्रॉनिक क़ारोबार तीन नवंबर 1994 की शाम दिवाली पूजा के दौरान शुरू हुआ था.
इसलिए एनएसई की स्थापना और वहां शेयरों का कारोबार शुरू होने को अलग-अलग समझना ज़रूरी है.
कई जगहों पर एनएसई में मुहूर्त ट्रेडिंग की शुरुआत 1992 में होने की बात लिखी गई है, लेकिन एनएसई के रिकॉर्ड के मुताबिक़, वहां शेयरों का क़ारोबार 1994 में शुरू हुआ था.
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मुहूर्त ट्रेडिंग हर साल एक ही समय पर नहीं होती. बीएसई और एनएसई इसकी तारीख़ और समय अपने-अपने सर्कुलर जारी करके बताते हैं.
इस साल आठ नवंबर को मुख्य शेयर क़ारोबार का समय दोपहर 2:20 से 3:30 बजे तक रखा गया है. इससे पहले दोपहर 2:05 बजे प्री-ओपन सत्र शुरू होगा.
प्री-ओपन सत्र में ख़रीद-बिक्री के शुरुआती ऑर्डर लिए जाते हैं. इसी दौरान यह तय करने की प्रक्रिया होती है कि बाज़ार खुलने पर शेयरों का शुरुआती भाव क्या होगा.
साल 2024 में मुहूर्त ट्रेडिंग एक नवंबर को शाम छह से सात बजे तक हुई थी. इससे पहले शाम 5:45 से छह बजे तक प्री-ओपन सत्र रखा गया था.
वहीं, 21 अक्तूबर 2025 को मुख्य क़ारोबार दोपहर 1:45 से 2:45 बजे तक हुआ था. इससे पहले दोपहर 1:30 से 1:45 बजे तक प्री-ओपन सत्र रखा गया था.
इससे साफ़ है कि मुहूर्त ट्रेडिंग हमेशा शाम को नहीं होती. इसका समय हर साल बदल सकता है.
आमतौर पर मुहूर्त ट्रेडिंग के मुख्य सत्र में शेयर ख़रीदे और बेचे जाते हैं.
इसके अलावा प्री-ओपन सत्र, बड़े सौदों और कुछ ख़ास तरह के शेयरों के लिए अलग समय रखा जा सकता है.
मुहूर्त ट्रेडिंग केवल शेयरों तक सीमित नहीं है.
साल 2025 में शेयरों के साथ फ़्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग के लिए भी मुहूर्त ट्रेडिंग का अलग सत्र रखा गया था.
इसके अलावा कमोडिटी ट्रेडिंग के लिए भी अलग सत्र हुआ था. इसमें सोने, चांदी और दूसरी कमोडिटी की क़ीमत से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट ख़रीदे और बेचे जाते हैं.
साल 2025 में इन सभी का मुख्य क़ारोबारी सत्र दोपहर 1:45 से 2:45 बजे तक चला था.
किसी धातु से जुड़ा कॉन्ट्रैक्ट ख़रीदना और उस धातु का कारोबार करने वाली कंपनी का शेयर ख़रीदना दो अलग-अलग तरह के निवेश हैं.
एनएसई पर सोना, चांदी, तांबा, एल्युमिनियम और ज़िंक जैसी कमोडिटी से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेडिंग होती है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर भी दिवाली के दिन मुहूर्त ट्रेडिंग होती है.
शेयरों में भी हर कंपनी के लिए ट्रेडिंग का तरीक़ा एक जैसा नहीं होता. मुहूर्त ट्रेडिंग के समय जो शेयर कारोबार के लिए उपलब्ध होते हैं, उन पर शेयर बाज़ार के तय नियम लागू होते हैं.
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बीएसई की मुहूर्त ट्रेडिंग में फ़िल्मी हस्तियों को भी विशेष मेहमान के तौर पर बुलाया जाता रहा है.
साल 2015 में अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर ने बीएसई के अधिकारियों के साथ घंटी बजाकर मुहूर्त ट्रेडिंग की शुरुआत की थी.
साल 2019 में मौनी रॉय और राजकुमार राव इस समारोह के विशेष मेहमान बने. बीएसई इंस्टीट्यूट के रिकॉर्ड के मुताबिक़, लक्ष्मी
पूजा के बाद मौनी रॉय ने घंटी बजाकर उस साल की मुहूर्त ट्रेडिंग शुरू की.
वहीं, राजकुमार राव भी बीएसई के अधिकारियों और दूसरे मेहमानों के साथ नए संवत की शुरुआत के समारोह में शामिल हुए थे.
इसके बाद साल 2022 में अजय देवगन ने अपनी टीम और बीएसई के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ घंटी बजाकर दिवाली की मुहूर्त ट्रेडिंग की शुरुआत की. इसकी पुष्टि बीएसई की 2022-23 की सालाना रिपोर्ट में भी होती है.
यह घंटी उस दिन के विशेष कारोबारी सत्र की शुरुआत का संकेत होती है. इसके बाद तय समय पर शेयरों की ख़रीद-बिक्री शुरू होती है.
पुराने समय में मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान छोटे और प्रतीक के तौर पर सौदे किए जाते थे. लेकिन परंपरा निभाने के लिए किया गया सौदा भी असली होता है.
मुहूर्त ट्रेडिंग में शेयर ख़रीदने या बेचने के बाद सौदे का निपटारा बाज़ार के तय नियमों के मुताबिक़ होता है. यानी शेयरों का भुगतान और लेनदेन उसी तरह पूरा करना पड़ता है, जैसे किसी सामान्य कारोबारी दिन होता है.
मार्केट एक्सपर्ट हर्ष वोरा अपने आर्टिकल में लिखते हैं कि मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान निवेश और कारोबार के बुनियादी नियम नहीं बदलते.
त्योहार का दिन किसी कंपनी के क़ारोबार की हालत नहीं बदलता और न ही अपने आप किसी शेयर को ख़रीदने की वजह बन जाता है.
इसलिए मुहूर्त ट्रेडिंग में निवेश करते समय भी वही सावधानी बरतनी चाहिए, जो बाज़ार के किसी सामान्य दिन बरती जाती है.
देवेन चोकसी कहते हैं कि बहीखातों की पूजा से लेकर मोबाइल और कंप्यूटर पर शेयर ख़रीदने तक, बाज़ार में क़ारोबार करने का तरीक़ा पूरी तरह बदल चुका है.
पहले कारोबारी बीएसई के हॉल में एक साथ जुटते थे. ऑर्डर पर्चियों पर लिखे जाते थे और पूजा के बाद छोटे सौदों से नए कारोबारी साल की शुरुआत होती थी.
अब निवेशक फ़ोन या कंप्यूटर से शेयर ख़रीद और बेच सकते हैं. बाज़ार में युवाओं और छोटे निवेशकों की मौजूदगी भी बढ़ी है.
कारोबार का तरीक़ा बदल गया है, लेकिन मुहूर्त ट्रेडिंग के पीछे शुभ शुरुआत की सोच आज भी वही है. यही वजह है कि दिवाली का यह छोटा कारोबारी सत्र अब भी बहुत से निवेशकों के लिए ख़ास बना हुआ है.
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