नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों रसुवा और धादिंग जिलों में आई भीषण बाढ़ का सीधा असर अब उत्तर बिहार पर पड़ने लगा है। नेपाल के बैराजों से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद गंडक और कोसी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान की ओर तेजी से बढ़ रहा है। बिहार में बाढ़ के खतरे को देखते हुए छह जिलों से लोगों को निकालना शुरू कर दिया गया है। 9 जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का काम शुरू कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक, ऐसा माना जा रहा है कि आज रात नेपाल की तरफ से आ रहा पानी अपने रास्ते में पड़ने वाली बिहार की नदियों में फैल जाएगा। इसके लिए रात भर सरकार, प्रशासन और संभावित प्रभावित इलाकों के लोग चौकसी में रहेंगे।
दरअसल मध्य नेपाल के कई जिले बुधवार को तिब्बत में अचानक आई भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए, जिससे कम से कम 46 लोगों की मौत हो गई और 105 भारतीयों समेत करीब 500 लोग लापता हैं। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 46 शव बरामद किए गए हैं।
गंडक नदी के संभावित बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए पश्चिमी चंपारण (बेतिया), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में ज्यादा सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा सीतामढ़ी, शिवहर और दूसरे संवेदनशील जिलों में भी स्थिति पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। मुख्यालय के स्तर पर सभी जिला अधिकारियों को नदी के जलस्तर, तटबंधों, निचले इलाकों, पुल-पुलियों और दूसरे संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी करने और स्थानीय समुदाय को समय पर अलर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को लोक सेवक आवास में नेपाल में आई बाढ़ की स्थिति और गंडक नदी में अचानक जल स्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने बिहार के संबंधित जिलों में विशेष सतर्कता बरतने और सभी जरूरी तैयारियां पूरी रखने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि नेपाल की स्थिति को देखते हुए बिहार में संभावित प्रभाव वाले इलाकों पर लगातार नजर रखी जाए। खासकर गंडक नदी से जुड़े पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर एवं वैशाली सहित दूसरे संवेदनशील जिलों में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहे।
अधिकारियों को पूरी तरह अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया गया है। सीएम कहा कि नेपाल में बाढ़ के कारण आने वाले पानी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए तथा संभावित प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने अपने सभी फील्ड इंजीनियरों, तकनीकी कर्मचारियों और तटबंध सुरक्षा टीमों की छुट्टियां तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी हैं।
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