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29 साल की नेहा बोरा पुलिस की तमाम सख़्ती के बावजूद दिल्ली की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने उतर जाती हैं.
नेहा कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के स्टूडेंट विंग 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स यूनियन' यानी आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 10 अक्तूबर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की थी.
दीपके अपने दो साथियों सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ मुंबई से दिल्ली आ रहे थे लेकिन उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर फ़्लाइट से ही हिरासत में ले लिया.
इनका हिरासत में लिया जाना बहुत अप्रत्याशित नहीं था. इनकी वैसी कोई रणनीति भी नहीं दिख रही थी कि पुलिस को चकमा देकर सड़क पर उतरना है.
दूसरी तरफ़ शनिवार को जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नई दिल्ली के निर्धारित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर तक पहुँचने से रोक दिया, तो नेहा बोरा ने 10 किलोमीटर दूर स्थित दिल्ली हाट में फिर से इकट्ठा होने की अपील की.
उन्होंने घटनास्थल की ओर रवाना होने से पहले सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "आज दिल्ली हाट ही जंतर-मंतर बन जाएगा."
इसके बाद वह नारे लगाते हुए आगे बढ़ीं और दूसरे लोग भी उनके साथ हो लिए.
पुलिस ने उन्हें कई अन्य कार्यकर्ताओं के साथ हिरासत में ले लिया. लेकिन हिरासत में रहते हुए भी उन्होंने प्रदर्शन जारी रखने की अपील की.
ऑनलाइन पोस्ट किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा, "मैं हिरासत में हूँ. जिन्हें पुलिस ने रोक दिया था, वे जहां भी हैं, वहीं प्रदर्शन करें. उन्हें शनिवार को बाद में रिहा कर दिया गया.''
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देश - दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.
कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हो रहे इन प्रदर्शनों में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की जा रही है.
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूचियों से अपारदर्शी तरीक़े से 13 करोड़ से ज़्यादा लोगों के नाम हटा दिए गए हैं. यह संख्या जापान की आबादी से भी अधिक है.
नेहा बोरा हिरासत से बाहर आईं तो एक बार फिर रविवार को भी पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहीं. नेहा ने रविवार को असली और हमशक्ल के ज़रिए दिल्ली पुलिस को चकमा देने का दावा किया.
असली नेहा कनॉट प्लेस में भीड़ के बीच भागती दिखीं और आरके आश्रम में नेहा की हमशक्ल पुलिस के साथ उलझती दिखीं.
नेहा मार्च में शामिल हुईं. वह भागीं. उनका पीछा किया गया. उन्होंने पुलिस को चकमा दिया. फिर भागीं. आख़िरकार उन्हें पकड़ लिया गया.
उन्होंने नाराज़गी जताई और मुस्कुराईं, नारे लगाए और उन्हें धकेलकर पुलिस बस में बैठा दिया गया. बस के अंदर से उन्होंने इंस्टाग्राम के ज़रिए अपनी बात रखी.
दूसरी तरफ़ रविवार सुबह हिरासत से रिहा हुए सीजेपी नेताओं ने कहा कि अब यह आंदोलन पूरे देश में फैलाया जाएगा.
सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने कहा, "लड़ाई अभी शुरू हुई है."
सीजेपी का शीर्ष नेतृत्व हर दिन नई घोषणाएं तो कर रहा है लेकिन सड़कों पर उतरने में उसे नेहा की तरह कामयाबी नहीं मिली है.
हिरासत में लिए जाने के बाद नेहा बोरा ने एक और वीडियो पोस्ट किया.
उन्होंने कहा, "इस बस में चार 'सेल' हैं और सांस लेने तक की जगह नहीं है. क्या हिरासत में ले जाने वाली बसों को जेल में बदला जा रहा है?"
उन्होंने केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों और पुलिस पर "आम लोगों के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने" का आरोप लगाया.
उन्होंने सवाल किया, "सिर्फ़ ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए इतनी हिंसा क्यों?"
उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद से उनके इस्तीफ़े की मांग दोहराई.
निर्वाचन आयोग लगातार पक्षपात के आरोपों से इनकार करता रहा है.
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रविवार को बोरा के भागने का वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट होने के बाद एक यूज़र ने टिप्पणी की, "अगर वह कुछ दिन नज़र नहीं आती हैं, तो पुलिस भी सोचती होगी, 'आज नेहा कहाँ है?'"
फ़ेसबुक पर एक समर्थक ने लिखा, "मुझे नहीं पता कि यह लड़की किस चीज़ से बनी है! हर बार उसे रोकने की कोशिश की जाती है और हर बार वह फिर मैदान में लौट आती है!"
एक्स पर एक अन्य यूज़र ने लिखा, "गिरफ़्तार हो, बाहर आओ, जगह बदलो, पूरी रात भूमिगत रहो और सुबह उसी ताकत के साथ फिर सामने आ जाओ. कितनी ऊर्जा है!"
नेहा राजनीति में अपने प्रवेश का श्रेय थिएटर को देती हैं और बाद में 2019 और 2020 में नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ हुए छात्र-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों को इसका कारण बताती हैं.
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सात अक्तूबर को नेहा बोरा ने कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके और सौरव दास के साथ मिलकर संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर 10 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का एलान किया था.
उस दौरान जब सोशल मीडिया पर लोग नेहा बोरा को अभिजीत दीपके से ज़्यादा परिपक्व बता रहे थे तो दीपके ने इससे सहमति जताई थी.
लेकिन इस पर नेहा ने जवाब दिया था, ''एकता होनी चाहिए तुलना नहीं.''
लेकिन 10 अक्तूबर के प्रदर्शन के बाद से नेहा बोरा जहां फ़्लैश प्रोटेस्ट की रणनीति पर चलती दिखीं वहीं अभिजीत दीपके और उनके साथी अपनी रणनीति सार्वजनिक तौर पर बताते रहे हैं.
लिहाजा बोरा को हिरासत में लेने में पुलिस को ख़ासी मशक्कत करनी पड़ी लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं को पुलिस आसानी में हिरासत में लेती दिखी. सीजेपी अपनी रणनीति सार्वजनिक करती रही है.
11 अक्तूबर को कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया एक्स पर अपील की, '' दिल्ली में वर्तमान में मौजूद सभी कॉकरोचों को वहीं रुकना चाहिए. अगली कॉल आ रही है! दिल्ली के बाहर के कॉकरोचों के लिए ट्रेनें फिर से चल रही हैं.''
कॉकरोच जनता पार्टी शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील कर रही है. उसका कहना है ये आंदोलन किसी भी स्थिति में अहिंसक रहेगा.
पार्टी ने कहा है कि अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका संसद मार्ग पुलिस स्टेशन जाएंगे और जंतर-मंतर पर शांति प्रदर्शन के लिए तारीख़ तय करने की मांग करेंगे.
दिल्ली पुलिस 24 घंटे के भीतर उन्हें तारीख़ बता सकती है, वरना वे खुद प्रदर्शन का आह्वान करेंगे. अभी स्पष्ट नहीं है कि सीजेपी ने ये फ़ैसला को लेने से पहले आइसा या नेहा बोरा से संपर्क किया था या नहीं.
वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले ने इस पर लिखा , ''सीजेपी को सुप्रीम कोर्ट तक होने वाले राहुल गांधी के मार्च में शामिल होना चाहिए. भ्रामक राजनीति करना बंद करें और नेहा बोरा की तरह संघर्ष करें.''
आज राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ मार्च निकालने वाले हैं लेकिन सीजेपी ने इस मार्च में शामिल होने की बात नहीं कही है. 10 अक्तूबर सीजेपी के नेता दिल्ली में हिरासत में लिए जा रहे थे तो राहुल गांधी भी चेन्नई में थे.
सीजेपी और कांग्रेस में एक तरह की दूरी स्पष्ट दिख रही है.
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