मक्का समझौते को लागू करने की तैयारी के बीच, सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के बावजूद, पाकिस्तान और सऊदी के बीच सैन्य संबंधों पर नई चर्चा शुरू हुई है।
पाकिस्तान के वरिष्ठ सैन्य और सरकारी अधिकारियों ने कहा कि हाल ही में किए गए सुरक्षा वादों को दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों के संदर्भ में देखना चाहिए।
दोनों देशों के बीच सैन्य प्रशिक्षण, सलाह, सैनिक तैनाती और अन्य सुरक्षा मामलों के लिए कई रक्षा समझौते मौजूद हैं, जिनसे पाकिस्तान सऊदी अरब का सबसे करीबी रक्षा सहयोगी बन गया है।
5 अक्टूबर को रियाद में मक्का गठबंधन की बैठक (जिसमें पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की शामिल थे) के बाद, तीनों देशों ने सैनिक और सैन्य क्षमताएँ उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने और तैनाती सुनिश्चित करने पर सहमति जताई। यह निर्णय सऊदी पर लगातार हूती हमलों के बीच हुआ।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा कि पाकिस्तान और तुर्की की उपस्थिति पहले से ही क्षेत्र में है और वे निगरानी व अन्य कार्यों में सऊदी को सहायता प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि “सऊदी सेना लड़ रही है, हम यहाँ मौजूद हैं और ज़रूरी मदद कर रहे हैं।”
सात अक्टूबर को सीएनएन से बात करते हुए, सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ़ चौधरी ने बताया कि पाकिस्तानी सैनिक दशकों से सऊदी में मौजूद हैं और विभिन्न ज़िम्मेदारियाँ निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मक्का समझौता अचानक नहीं आया, बल्कि यह लंबे समय से चल रहे राजनीतिक, सैन्य और कूटनीतिक संबंधों का परिणाम है।
पाकिस्तान और सऊदी के बीच पहला रक्षा सहयोग समझौता 1967 में हुआ, जिसे 1982 में ‘सऊदी‑पाकिस्तानी आर्म्ड फ़ोर्सेज़ ऑर्गनाइज़ेशन’ के गठन से सुदृढ़ किया गया। उसी समय 20,000 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक सऊदी में तैनात थे।
1979 में मक्का की ग्रैंड मस्जिद पर हुए हथियारबंद कब्जे के बाद, पाकिस्तानी विशेष बलों ने सऊदी सैनिकों की मदद की। 2015 में सऊदी के नेतृत्व वाले इस्लामी सैन्य गठबंधन के गठन के बाद, पाकिस्तान ने इस गठबंधन में सक्रिय भूमिका निभाई।
फ़रवरी 2018 में, पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर 1,379 सैनिकों की दूसरी टुकड़ी सऊदी में भेजी, जिन्हें प्रशिक्षण और सलाह देने के लिए भेजा गया। इस तैनाती को दोनों देशों के मौजूदा सुरक्षा सहयोग का हिस्सा माना गया।
सितंबर 2025 में, पाकिस्तान और सऊदी ने ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफ़ेंस एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर किए, जिसमें किसी भी देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा। अप्रैल 2026 में, सऊदी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस समझौते के तहत पाकिस्तानी सैनिक और सैन्य विमान सऊदी पहुँच चुके हैं।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि 2025 से पाकिस्तान ने 30,000 से 40,000 सैनिक सऊदी में तैनात किए हैं, परंतु पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने 6 अक्टूबर को इस दावे को ‘अटकलों पर आधारित’ बताते हुए खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि रक्षा व्यवस्था से जुड़ी कार्रवाइयों की जानकारी गोपनीय है।
मीडिया ने पाकिस्तान को सऊदी की बढ़ती निर्भरता के बीच किसी बड़े युद्ध में सीधे शामिल होने से बचने का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि “सऊदी रक्षा” में पाकिस्तान की भूमिका उसे उन युद्धों के करीब ला सकती है, जिनमें उसने 2015 में शामिल होने से इनकार किया था।
सारांशतः, मक्का समझौते के लागू होने के बावजूद, पाकिस्तान और सऊदी के बीच सैन्य सहयोग गहराता जा रहा है, परंतु दोनों देशों को संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए किसी भी बड़े संघर्ष से दूर रहने की आवश्यकता है।
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